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Hepatitis A: लिवर को फेल कर सकता है ये संक्रमण, आपकी छोटी सी गलती बढ़ा सकती है सेहत के लिए मुश्किलें

Tue, 22 Jul 2025 07:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ के अनुसार, हेपेटाइटिस -ए दुनियाभर में हर साल लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख से अधिक) लोगों को प्रभावित करता है।
  • भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई की कमी है, वहां इसका संक्रमण अधिक पाया जाता है।
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हेपेटाइटिस का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
Liver Infection: हेपेटाइटिस का संक्रमण हमारी सेहत को कई प्रकार से नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। ये लिवर को प्रभावित करने वाली बीमारी है जिसके कारण लिवर में इंफ्लेमेशन होने का जोखिम बढ़ जाता है। हेपेटाइटिस का संक्रमण अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों हो सकता है और इसकी गंभीर स्थित में लिवर डैमेज होने का खतरा भी बढ़ जाता है।

हाल के दिनों में हेपेटाइटिस-ए संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते हुए रिपोर्ट किए गए हैं। ये एक संक्रामक वायरल बीमारी है, जो हेपेटाइटिस ए वायरस (एचएवी) के कारण होती है। मुख्यरूप से ये संक्रमित व्यक्ति के मल और दूषित भोजन या पानी के कारण फैलता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन स्थानों पर स्वच्छता की कमी होती है वहां इस प्रकार के संक्रमण का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। ये संक्रामक रोग कितना खतरनाक है और इससे किस प्रकार के जोखिम हो सकते हैं, आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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लिवर में संक्रमण का खतरा - फोटो : adobe stock images
लाखों लोग होते हैं इस संक्रमण का शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हेपेटाइटिस-ए दुनियाभर में हर साल लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख से अधिक) लोगों को प्रभावित करता है। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई की कमी है, वहां इसका संक्रमण अधिक पाया जाता है। हालांकि सरकार ने स्वच्छता अभियान चलाया जिसके परिणामस्वरूप पहले की तुलना में अब इस रोग का जोखिम कम देखा जा रहा है।

डॉक्टर बताते हैं, ज्यादातर मामलों में ये बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है, लेकिन जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है या फिर बुजुर्गों में यह गंभीर लिवर फेलियर तक का कारण बन सकती है।
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लिवर से संबंधित गंभीर दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
ये संक्रमण होता कैसे है?

हेपेटाइटिस-ए आमतौर पर साफ-सफाई की कमी, दूषित खाना-पानी और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में गैस्ट्रोइंटस्टाइनल विभाग के डॉक्टर भूषण आनंद बताते हैं पांच चीजें हैं जो इस संक्रामक रोग को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिससे बचाव करते रहना जरूरी है।
  • दूषित पानी पीने, ठीक से न पके भोजन (खासकर स्ट्रीट फूड), संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या टॉयलेट साझा करने, बिना हाथ धोए खाना खाने से और जिन स्थानों पर इस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं वहां हेपेटाइटिस ए का खतरा अधिक रहता है। इन पांचों स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इससे बचाव करते रहना चाहिए।

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लिवर में संक्रमण के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock
कैसे जानें कहीं हो तो नहीं गया है संक्रमण?

डॉक्टर बताते हैं, हेपेटाइटिस-ए का संक्रमण अक्सर शुरुआती स्थितियों में पकड़ में नहीं आता, लेकिन जैसे-जैसे बीमारी बढ़ती जाती है इस रोग के लक्षण भी स्पष्ट होने लग जाते हैं। संक्रमण के लक्षण आमतौर पर संक्रमण के 2 से 6 हफ्तों के भीतर दिखते हैं।

आमतौर पर संक्रमितों में थकान और कमजोरी, भूख न लगने, अक्सर पेट में दर्द बने रहने, मतली और उल्टी के साथ के साथ गाढ़े रंग का पेशाब आने की दिक्कत देखी जाती रही है। संक्रमण बढ़ने की स्थिति में त्वचा और आंखों में पीलापन (पीलिया) का खतरा बढ़ जाता है।
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हेपेटाइटिस-ए का टीकाकरण - फोटो : Freepik.com
इस संक्रमण से बचाव के लिए क्या करें?

हेपेटाइटिस-ए को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआत में ये आम फूड पॉइजनिंग जैसा लगता है, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आपके लिवर को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है।

इस संक्रामक रोग से बचे रहने के लिए वैक्सीनेशन एक बेहतर तरीका है। इसके अलावा शुद्ध, उबला हुआ पानी पीना चाहिए। भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ धोना और सड़क किनारे का खाना खाने से बचना बहुत आवश्यक है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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