कोरोना वायरस (फाइल फोटो)
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इम्यूनिटी की ढाल कोरोना वायरस से आखिर कब तक बचाएगी, ये सवाल बहुत महत्वपूर्ण है। इससे ना सिर्फ कोरोना को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी, बल्कि असरदार वैक्सीन बनाने का राज भी इसी सवाल में छिपा हुआ है। फिलहाल वैक्सीन को लेकर जो अनिश्चितता बनी हुई है, उसकी वजह से सर्दियों में कोरोना के मामले बढ़ने की आशंका, चिंता की लकीरों को और गहरा कर देती है। "ये बात बहुत स्पष्ट है कि जब अगला फ्लू सीजन आएगा, हमें कोरोना इंफेक्शन की सेकेंड वेव का सामना करना पड़ेगा। सवाल ये है कि सेकेंड वेव से हम कैसे निपटेंगे, बीमारी को फैलने से कैसे रोकेंगे और संक्रमित हुए मरीजों का ठीक से इलाज कैसे करेंगे।" ये सवाल हैं जूडिथ वाल के जो बार्सिलोना यूनिवर्सिटी में 'हेल्थ एंड लेबर इकॉनोमिक्स' की प्रोफेसर हैं।
प्रोफेसर जूडिथ का मानना है कि साल 2020 के पहले आठ महीनों में जो अनुभव हुए हैं, उनसे सबक सीखना जरूरी है। सर्दियों में कोरोना का खतरा बढ़ने की आशंकाओं पर वो कहती हैं, "सिस्टम में तालमेल बढ़ाना होगा। प्राइमरी हैल्थ सेंटर्स और बड़े अस्पतालों में तालमेल की जरूरत है। लोकल लेवल पर ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने होंगे और केवल गंभीर मरीजों को ही बड़े अस्पताल में भर्ती कराना होगा, सेकेंड वेव की नौबत आने पर सिस्टम तभी कारगर तरीके से काम कर पाएगा।"