क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर के भीतर भी एक घड़ी होती है? ये भले ही दिखाई न देती हो पर शरीर के कामकाज और सेहत में इसकी बड़ी भूमिका मानी जाती है। सुबह समय पर उठना, दिन में ऊर्जावान रहते हुए काम करना, सही समय पर खाना और रात में नींद आना ये सब इसी घड़ी से निर्धारित होता है। इसे बॉडी क्लॉक या सर्केडियन रिदम कहा जाता है। हालांकि जब हमारी रोजमर्रा की जिंदगी इस बॉडी क्लॉक के निर्धारित समय से बाहर निकलने लगती है, तब कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
रात में देर तक मोबाइल चलाना,देर से खाना, रोज अलग समय पर सोना-जागना और दिन में पर्याप्त सूरज की रोशनी न मिलना बॉडी क्लॉक को प्रभावित कर सकती है। इसका असर केवल नींद तक सीमित नहीं रहता। अध्ययनों में पाया गया है कि सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी के कारण समय के साथ मोटापा, डायबिटीज, मूड संबंधी समस्याएं, हृदय और ब्लड प्रेशर से जुड़ी दिक्कतों से लेकर कुछ प्रकार के कैंसर तक का खतरा बढ़ सकता है।
कहीं आपका बॉडी क्लॉक भी तो गड़बड़ नहीं हो गया है?