वायु प्रदूषण से होने वाली दिक्कतें`
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अध्ययन में क्या पता चला?
अध्ययन के नतीजे दर्शाते हैं कि पिछले तीन दशकों में न केवल गर्मी और प्रदूषण की घटनाएं पहले से अधिक बार हुई हैं, साथ ही इनके दौरान पीएम2.5 का स्तर भी काफी बढ़ा है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि 1990 से 2019 के बीच गर्मी और प्रदूषण भरे दौर में पीएम2.5 के संपर्क में आने से दुनिया भर में 6,94,440 लोगों की असमय मृत्यु हुई है।
भारत में किए गए अध्ययन में यह सामने आया कि जब गर्मी अत्यधिक होती है और उसी समय पीएम2.5 का स्तर भी बढ़ा होता है तो मृत्यु दर में तीव्र वृद्धि होती है। करीब 36 लाख मौतों के डाटा के विश्लेषण में यह पाया गया कि अत्यधिक गर्म दिनों में, यदि पीएम 2.5 का स्तर 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर बढ़े तो उस दिन मौतों में 4.6% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। यह आंकड़ा सामान्य दिनों में देखे गए 0.8% की वृद्धि से कई गुना अधिक है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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