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डिजिटल साथी: डॉक्टरों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है ये एआई सिस्टम, दवा की गलतियां रोकने में मिलेगी मदद

Sat, 12 Sep 2026 06:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक अध्ययन में 28 लाख दवा की पर्चियों और 1700 डॉक्टरों के काम का विश्लेषण किया गया। एआई आधारित सिस्टम ने डॉक्टरों को दवाओं के संभावित खतरनाक कॉम्बिनेशन की जानकारी दवा लिखते समय दे दी। इससे 8.6 फीसदी गलतियां पकड़ी और सुधारी गईं।
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डॉक्टरों की मदद करने वाला एआई - फोटो : Amarujala.com/AI
डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट की बीमारी में मरीजों को एक साथ कई तरह की दवाएं लेनी पड़ती हैं। ऐसे में जब डॉक्टर कोई नई दवा शुरू करते हैं, तो यह देखना जरूरी हो जाता है कि नई दवा पहले से चल रही दवाओं के साथ मिलकर कोई नुकसान तो नहीं करेगी? इसी काम में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई मददगार साबित हो रहा है।

एक नए अध्ययन में 28 लाख दवा पर्चियों और करीब 1700 डॉक्टरों के काम का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि एआई आधारित डिजिटल सिस्टम की मदद से डॉक्टरों ने दवाओं के कॉम्बिनेशन से जुड़ी 8.6 फीसदी संभावित गलतियां पहचानकर उनमें सुधार किया।

इस सिस्टम की खासियत यह थी कि डॉक्टर को दवा लिखने के दौरान ही संभावित खतरे की जानकारी मिल जाती थी। कंप्यूटर मरीज की पहले से चल रही दवाओं और डॉक्टर द्वारा लिखी जा रही नई दवा को एक साथ देखकर यह संकेत देता था कि दोनों को साथ लेने में कोई जोखिम हो सकता है।
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डॉक्टरों की मदद कर रहा है एआई - फोटो : Adobe Stock
दवा लिखते समय मिल जाती है चेतावनी

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इसका फायदा यह हुआ है डॉक्टर के पास उसी समय दवा बदलने, किसी दवा को रोकने या उपचार के फैसले पर दोबारा विचार करने का मौका हो सकता है।

इस अध्ययन की सबसे अहम बात यह सामने आई कि एआई का इस्तेमाल केवल गलती पकड़ने के लिए बाद में नहीं किया गया। 
 
  • डॉक्टर जब मरीज के लिए दवा लिख रहे होते हैं, उसी समय डिजिटल सिस्टम संभावित खतरे की जानकारी सामने रख सकता है।
  • मसलन, अगर किसी मरीज की पहले से कुछ दवाएं चल रही हैं और डॉक्टर ने उसके इलाज में एक नई दवा जोड़ने का फैसला किया, तो सिस्टम दोनों के बीच संभावित दवा-परस्पर क्रिया यानी ड्रग इंटरैक्शन का संकेत दे सकता था। 
  • इससे डॉक्टर को तुरंत यह सोचने का अवसर मिला कि नई दवा उसी रूप में जारी रखनी है या उपचार में कोई बदलाव करना बेहतर होगा।

अध्ययन में यह भी सामने आया कि इस तरह की डिजिटल मदद का असर उन डॉक्टरों के काम में खास तौर पर अधिक दिखाई दिया, जिनके पास मरीजों की संख्या ज्यादा थी और काम का दबाव भी अधिक था। ऐसे डॉक्टरों के लिए हर मरीज की पहले से चल रही सभी दवाओं को ध्यान में रखते हुए नई दवा के संभावित असर को तुरंत जांचना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

एआई आधारित सिस्टम इस प्रक्रिया में अतिरिक्त जानकारी देकर डॉक्टर को निर्णय लेने में मदद कर सकता है।
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एआई करेगा डॉक्टरों की मदद - फोटो : Freepik.com
दवा लिखते समय गलती पकड़ने में मिलेगी मदद

नानयांग बिजनेस स्कूल और नानयांग टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी के शियाओदान शाओ, विवेक चौधरी और अर्नब मजूमदार ने ये अध्ययन किया। अध्ययन में समय के साथ डॉक्टरों के व्यवहार में एक और दिलचस्प बदलाव देखा गया। 
  • शुरुआत में जब एआई सिस्टम संभावित खतरे की चेतावनी देता था, तो डॉक्टर उस जानकारी के आधार पर कुछ दवाओं को बदलते या हटाते थे और इस तरह संभावित गलती को सुधारते थे।
  • लेकिन बाद में सिर्फ चेतावनी मिलने पर प्रतिक्रिया देने के बजाय डॉक्टर पहले से मिली जानकारी से सीखने लगे।
  • यानी उन्हें यह समझ आने लगा कि किन दवाओं के कॉम्बिनेशन को लेकर ज्यादा सावधानी बरतनी है।

इससे संकेत मिलता है कि एआई की भूमिका केवल दवा लिखते समय गलती पकड़ने तक सीमित नहीं रह सकती। लगातार इस्तेमाल होने पर यह डॉक्टरों को संभावित दवा जोखिमों के बारे में बेहतर निर्णय लेने में भी मदद कर सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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