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ज्यादा होमवर्क मिलने से बच्चे हो रहे "डिप्रेशन" का शिकार, जानें क्या कहता है शोध

Sun, 01 Sep 2019 11:49 AM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : pixa
आजकल के समय में बच्चों पर पढ़ाई का सबसे ज्यादा भार रहता है। बच्चे अपना पूरा दिन स्कूल के काम में ही बिता देते हैं , लेकिन क्या आपको पता है कि स्कूल द्वारा दिये गये काम की वजह से आपके बच्चे पर क्या असर पड़ता है। सही मायने में देखा जाये तो इस वजह से आपके बच्चे की सेहत पर काफी असर पड़ता है। छोटे बच्चे भी अपना पूरा दिन होमवर्क करने में ही बिता देते हैं। बच्चों में होमवर्क की वजह से बेहद तनाव रहता है ,क्योंकि अगर होमवर्क वक्त से नहीं किया गया तो स्कूल में उन्हें दंड दिया जाएगा। इसी तनाव के चलते बच्चे अक्सर सर दर्द ,मायूसी,अकेलेेपन जैसी  बीमारी के चपेट में आ जाते हैं। 

 
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- फोटो : pixa
शोधकर्ताओं ने बताया है कि छोटे बच्चों के लिए होमवर्क का समय सिर्फ दस मिनट ही रहना चाहिए। अगर वह अगर वह इससे ज्यादा समय देते हैं, तो वह कहीं न कहीं अपने आप को परेशानी में डाल सकते हैं। वहीं बड़े बच्चों के लिए होमवर्क का समय दो घंटे है। इससे ज्यादा अगर समय दिया जाये तो यह उनके लिए फायदेमंद साबित नहीं होगा। 
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- फोटो : pixa
बड़े बच्चे भी होमवर्क की वजह से बेहद दुखी रहती हैं। होमवर्क के चलते वह अपने टेलेंट को कहीं पीछे छोड़ देते हैं , क्योंकि उनका पूरा वक्त तो सिर्फ होमवर्क करने में  निकल जाता है। 

 

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- फोटो : pixa
बात की जाए तनाव की तो 70 प्रतिशत बच्चों का कहना है कि वह अक्सर होमवर्क के चलते तनाव में रहते हैं। वहीं 56 प्रतिशत बच्चों का कहना हैं कि उन्हें होमवर्क का तनाव सबसे पहले सताता हैं। सिर्फ 1 प्रतिशत बच्चे हैं जो होमवर्क को तनाव नहीं मानते हैं। शोधकर्ताओं ने बताया कि होमवर्क के चलते बच्चे सिरदर्द ,पेट दर्द, वजन घटना और नींद न आने जैसी बीमारी के शिकार हो जाते हैं। शोधकर्ताओं ने पाया है कि होमवर्क में ज्यादा समय बिताने से बच्चे अपने टेलेन्ट को नहीं सीख पाते हैं।  ऐसे बच्चे अक्सर अपने परिवार और दोस्तों से दूर हो जाते हैं। 
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- फोटो : pixa
बड़े बच्चे अक्सर इसी तनाव को कम करने के लिए गलत आदतों के आदि हो जाते हैं। इस तनाव को कम करने के लिए वह कई प्रकार की दवाईयां मारीजुआना जैसे नशीले पदार्थो का इस्तेमाल करते हैं।
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