होली के रंग और गुलाल से हो सकता है अस्थमा अटैक
- फोटो : Adobe
होली में बढ़ सकती हैं सांस की दिक्कतें
होली के दौरान अस्थमा अटैक के खतरे को कम करने, सांस की समस्याओं से बचे रहने के लिए श्वसन रोग विशेषज्ञ डॉ रितु आचार्य ने कुछ जरूर सलाह दी हैं जिसके बारे में सभी लोगों को जानना जरूरी है।
डॉक्टर कहती हैं, हवा में उड़ते सूखे रंग, कैमिकल युक्त गुलाल, धूल और धुआं सांस के मरीजों के लिए परेशानी बढ़ा सकते हैं। खासतौर पर अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, एलर्जिक राइनाइटिस या क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) से पीड़ित मरीजों को इसके कारण सांस फूलने, सीने में जकड़न और अस्थमा अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
रंग-गुलाल की सावधानी से करें इस्तेमाल
जिन लोगों को पहले से सांस की बीमारी है उन्हें होली के उत्सव के दौरान विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता होती है।
- सूखे गुलाल-रंग हवा की गुणवत्ता को खराब कर देते हैं, जिससे सांस की दिक्कत बढ़ सकती है।
- आमतौर पर बाजार में बिकने वाले रंगों में लेड-मेटल और रसायन हो सकते हैं जो श्वास नली में दिक्कतें बढ़ा देते हैं।
- महीन कण सांस के रास्ते फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और वायुमार्ग में सूजन और संकुचन पैदा कर सकता है।
- इससे सीटी जैसी आवाज, खांसी और सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।