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Holi 2025: होली के रंगों से दूर हो सकती हैं कई बीमारियां, जानिए क्या होती है कलर थेरेपी और इसके फायदे

Wed, 12 Mar 2025 10:57 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

कलर थेरेपी रंगों के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने की एक विधि है। इसे क्रोमोथेरेपी (Chromotherapy) भी कहा जाता है।
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कलर थेरेपी क्या है ? - फोटो : Adobe
Holi 2025 Color Therapy: होली रंगों का पर्व है। इस त्योहार में लोग अपने प्रियजनों, दोस्तों को रंग लगाकर होली की शुभकामनाएं देते हैं और पर्व को उत्साह से मनाते हैं। रंग लगाना धार्मिक या केवल मस्ती मौज तक सीमित नहीं, बल्कि इसका एक वैज्ञानिक कारण भी है। होली के रंगों से खेलना स्वास्थ्यवर्धक भी हो सकता है। ये कलर थेरेपी का एक रूप है, जिसमें हमारे मूड और ऊर्जा के स्तर पर गहरा असर पड़ता है। होली में रंगों से खेलने से मन में खुशी, ऊर्जा और आशावाद की भावना आती है। 

होली में रंगों का उपयोग करने से हमें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक लाभ मिलते हैं। इसलिए होली में रंगों की विज्ञान को समझें। इस लेख में होली के रंगों का वैज्ञानिकी महत्व, कलर थेरेपी क्या है और इसके क्या स्वास्थ्य लाभ हैं, के बारे में बताया जा रहा है। 

क्या है कलर थेरेपी?   

कलर थेरेपी रंगों के माध्यम से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने की एक विधि है। इसे क्रोमोथेरेपी (Chromotherapy) भी कहा जाता है। इस थेरेपी में हर रंग का खास महत्व होता है। रंगों और रोशनी का उपयोग करके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की कोशिश की जाती है। 
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कलर थेरेपी के फायदे - फोटो : Adobe
कैसे काम करती है कलर थेरेपी?

कलर थेरेपी में रंगों के जरिए शरीर के कई तत्वों को बैलेंस करने की कोशिश की जाती है। जब हम किसी रंग को देखते हैं तो हमारा मस्तिष्क उस रंग की तरंगों को ग्रहण करता है और उसके अनुरूप हमारी भावनाएं व शरीर प्रतिक्रिया देते हैं।  

कलर थेरेपी के फायदे 

लाल रंग 

ऊर्जा और आत्मविश्वास का रंग है। यह रंग जोश और साहस बढ़ाने में मदद करता है। रक्त संचार को बेहतर बनाता है और थकान दूर करता है। हालांकि अत्यधिक लाल रंग गुस्से और आक्रामकता को भी बढ़ा सकता है, इसलिए इसका संतुलित उपयोग करना चाहिए।  

पीला रंग 

पीला रंग सकारात्मकता और बुद्धिमता का रंग है। यह रंग खुशी, आत्मनिर्भता और रचनात्मकता को बढ़ाता है। पाचन तंत्र को मजबूत करने और एकाग्रता में सुधार लाता है। इस रंग से मानसिक अवसाद और तनाव को दूर करने में मददगार होता है।  

हरा रंग 

हरे रंग से आंतरिक शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है। यह दिल और फेफड़ों की कार्यप्रणाली को मजबूत करता है। प्रकृति से जुड़ा ये रंग तनाव को कम करने में सहायक है। 

नीला रंग 

नीला ठंडक और सुकून का रंग है। यह नींद की गुणवत्ता सुधारता है और तनाव दूर करता है। ब्लड प्रेशर नियंत्रित करने में भी नीला रंग सहायक माना जाता है।   
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होली में रंगों का वैज्ञानिक महत्व - फोटो : अमर उजाला
होली में रंगों का वैज्ञानिक महत्व

होली का पर्व बसंत ऋतु में आता है। इस दौरान मौसम में बदलाव होता है जिससे शरीर में कई प्रकार के संक्रमण और एलर्जी होने की संभावना बढ़ जाती है। इसलिए बसंत ऋतु में रंगों का उपयोग करने से हमारा शरीर सकारात्मक ऊर्जा से भर जाता है। रंगों से खेलने से एंडोर्फिन (हैप्पी हार्मोन) रिलीज होते हैं, जिससे मूड बेहतर होता है। वहीं होली में लोग घर के बाहर धूप में रंग खेलते हैं। धूप से विटामिन डी मिलता है जो हड्डियों के लिए फायदेमंद होता है। प्राकृतिक रंग त्वचा के लिए भी फायदेमंद होते हैं और टॉक्सिन्स को दूर करने में मदद करते हैं।

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कैसे अपनाएं कलर थेरेपी? - फोटो : freepik
कैसे अपनाएं कलर थेरेपी?

होली में रंगों से खेलने के अलावा कई तरीकों से कलर थेरेपी को अपना सकते हैं। अपने घर या दफ्तर की दीवारों पर मन को शांत करने वाले रंगों का उपयोग करें। रंगों से भरपूर पेटिंग्स सजाएं और उन्हें देखें। कपड़े और एक्सेसरीज में अपनी मनोदशा के अनुसार रंगों को शामिल करें। रंगीन लाइटिंग और डेकोरेशन से मूड को प्रभावित करें। रोजाना ध्यान या योग के दौरान उपयुक्त रंगों का ध्यान करें।
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कलर थेरेपी - फोटो : Adobe stock

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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