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Health Tips: शरीर के लिए प्रोटीन जरूरी पर सीमित मात्रा में, हाई प्रोटीन डाइट से हो सकते हैं गंभीर नुकसान

Thu, 24 Jul 2025 07:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • प्रोटीन, मांसपेशियों के निर्माण से लेकर हड्डियों और दांतों को मजबूत करने के लिए जरूरी है, लेकिन कुछ बीमारियों में अधिक प्रोटीन वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए। 
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हाई प्रोटीन वाली डाइट के नुकसान - फोटो : Adobe Stock
जब भी बात शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्वों की आती है तो प्रोटीन की सबसे ज्यादा चर्चा होती है। बॉडी बिल्डिंग हो या वजन घटाना, हर कोई हाई प्रोटीन डाइट की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहा है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि ज्यादा प्रोटीन हर किसी के लिए फायदेमंद नहीं हो सकता?

दरअसल, हाई प्रोटीन डाइट का चलन जितना बढ़ा है, उससे जुड़े साइड इफेक्ट्स और रिस्क पर उतनी चर्चा नहीं होती। कई शोध बताते हैं कि ज्यादा प्रोटीन का सेवन कुछ लोगों के लिए फायदे की जगह नुकसानदायक हो सकता है।

हाई प्रोटीन डाइट का मतलब है कि आप दिन भर में जितनी कैलोरी का सेवन करते हैं उसका 25% से 35% हिस्सा प्रोटीन से आता है। इसमें अंडे, चिकन, मछली, पनीर, दालें, प्रोटीन पाउडर जैसी चीजों का सेवन अधिक और कार्ब्स की मात्रा कम कर दी जाती है। पर ये सभी के लिए फायदेमंद हो ऐसा जरूरी नहीं है।
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आहार को ठीक रखना जरूरी - फोटो : Adobe Stock
प्रोटीन का अधिक सेवन हो सकता है नुकसानदायक

आहार विशेषज्ञ कहते हैं,  प्रोटीन शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन कई स्वास्थ्य समस्याओं में अधिक प्रोटीन का सेवन नुकसान पहुंचा सकता है। प्रोटीन मांसपेशियां बनाने से लेकर हड्डियों और दांतों को मजबूत करने के लिए जरूरी है, लेकिन कुछ बीमारियों में अधिक प्रोटीन वाले आहार का सेवन नहीं करना चाहिए।

यूरिक एसिड की समस्या से पीड़ित लोगों के लिए उच्च प्रोटीन आहार यूरिक एसिड के स्तर को और बढ़ा सकता है, जिससे समस्या बढ़ सकती है। इसलिए आप चोकर युक्त आटा, भुट्टा, बेकरी के खाद्य पदार्थ के सेवन से बचें। इसके अलावा उड़द, मांस, मछली, सेम, सहजन, पालक, मटर, मशरूम चुकंदर, कद्दू के बीज का सेवन न करें। आप चिकित्सक की सलाह के अनुसार कम प्रोटीन वाले आहार को अपना सकते हैं।
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बढ़ सकती हैं किडनी की दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
किडनी की बढ़ सकती है दिक्कत

हाई प्रोटीन डाइट से किडनी को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे किडनी संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, खासकर उन लोगों में, जिन्हें पहले से किडनी की समस्याएं हैं। जिन लोगों को क्रॉनिक किडनी डिजीज की समस्या हो उन्हें आहार में कोई भी बदलाव डॉक्टर के सलाह पर ही करना चाहिए। आप चिकित्सक से पूछकर पौधे आधारित प्रोटीन, जैसे- फलियां, मेवे और बीज, साबुत अनाज तथा सोया का सेवन कर सकते हैं।

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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पी. बी. मिश्रा कहते हैं, अधिक प्रोटीन खाने से वजन बढ़ता है, साथ ही पाचन संबंधी समस्याएं गुर्दे पर दबाव और निर्जलीकरण भी हो सकता है। इसलिए अपना आहार परिवर्तन करने से पहले चिकित्सक से सलाह जरूर लें। हाई प्रोटीन डाइट चमत्कारी लग सकती है, लेकिन यह हर शरीर और हर स्थिति के लिए सही नहीं होती।

अगर आप वजन घटाने या मसल्स बनाने के लिए हाई प्रोटीन डाइट लेना चाहते हैं, तो किसी डाइटीशियन या डॉक्टर से सलाह जरूर लें। सबसे बेहतर है बैलेंस्ड डाइट, जिसमें प्रोटीन, कार्ब्स, फैट, फाइबर और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स सभी उचित मात्रा में हों।
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हाई प्रोटीन वाली चीजों के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
अधिक प्रोटीन के ये नुकसान भी जान लीजिए

हाई प्रोटीन डाइट के कई प्रकार से नुकसान हो सकते हैं जिसके बारे में जानना और बचाव के उपाय करते रहना आवश्यक हो जाता है।
  • हार्वर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, हाई प्रोटीन, खासकर पशु आधारित स्रोतों से प्राप्त प्रोटीन शरीर में यूरिया और नाइट्रोजन वेस्ट को बढ़ाता है, जिससे किडनी को ज्यादा काम करना पड़ता है। जिन्हें पहले से ही किडनी की बीमारी है उनके लिए ये बहुत नुकसानदायक हो सकता है।
  • हाई प्रोटीन की पचाना भी कठिन होता है, ऐसे में कुछ लोगों को पाचन संबंधित समस्याएं भी हो सकती हैं। लो फाइबर और हाई प्रोटीन वाला आहार पाचन को प्रभावित कर सकता है।
  • कुछ अध्ययनों के मुताबिक, बहुत अधिक प्रोटीन (विशेषकर  पशु आधारित का अत्यधिक सेवन दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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