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सावधान: पैरों में दिख रहे हैं काले धब्बे? यह बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का हो सकता है संकेत, तुरंत हो जाएं अलर्ट

Thu, 11 Aug 2022 06:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हाई कोलेस्ट्रॉल के संकेतों को जानिए - फोटो : iStock
वैश्विक स्तर पर पिछले एक दशक के आंकड़े उठाकर देखे तो पता चलता है कि हृदय रोग सबसे तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है। कुछ वर्षों पहले तक जहां हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था, वहीं अब कम आयु के लोग भी इसके शिकार होते जा रहे हैं। इतनी ही नहीं 30-40 की आयु वाले लोगों में हार्ट अटैक के कारण मौत के मामले भी बढ़ते हुए देखे गए हैं। हृदय रोग की बढ़ती समस्याओं के लिए हाई कोलेस्ट्रॉल को प्रमुख कारण के तौर पर जाना जाता है।

कोलेस्ट्रॉल रक्त में पाया जाने वाला एक तत्व है। हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण आपकी रक्त वाहिकाओं में वसायुक्त पदार्थ बनाने शुरू हो जाते हैं जिससे हृदय तक रक्त का सामान्य संचार प्रभावित हो सकता है। यह स्थिति गंभीर रूप से हृदय की समस्याओं का कारण बन सकती है।

धमनियों में रुकावट के कारण  दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की आशंका होती है। हाई कोलेस्ट्रॉल के स्तर के लिए आहार में स्वस्थ और पौष्टिक चीजों की कमी और खराब लाइफस्टाइल को प्रमुख कारक के तौर पर जाना जाता है। आमतौर पर रक्त की जांच के माध्यम से कोलेस्ट्रॉल के स्तर का पता लगाया जा सकता है, पर क्या आप जानते हैं कि इसका स्तर बढ़ने पर शरीर में कुछ बदलाव आने लगते हैं जिसके आधार पर भी इस समस्या का निदान किया जा सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की समस्या - फोटो : istock
हाई कोलेस्ट्रॉल के कारण क्या हैं? 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ जीवनशैली की गड़बड़ी को कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का प्रमुख कारण मानते हैं। मुख्यरूप से वसायुक्त भोजन करने, पर्याप्त व्यायाम न करने, शरीर का वजन बढ़ने, धूम्रपान और शराब जैसी स्थितियां कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण हो सकती हैं। अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए तो स्थिति हृदय को भी नुकसान पहुंचाना शुरू कर देती है। कुछ लोगों में आनुवांशिक तौर पर भी कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा हो सकता है, ऐसे में अपने जोखिम कारकों के बारे में सभी लोगों को जानना और इससे बचाव के उपाय करना आवश्यक है।
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पैरों की स्थिति में बदलाव के संकेत - फोटो : istock
पैरों में हाई कोलेस्ट्रॉल के लक्षण

आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ गया है, इसका अंदाजा पैरों की स्थिति में कुछ बदलाव के आधार पर भी लगाया जा सकता है। डॉक्टर्स बताते हैं कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के कारण शरीर के निचले अंगों में भी रक्त का सुचारू प्रवाह बाधित होने लगता है जिसके कारण पेरिफिरल आर्टरी डिजीज (पीएडी) हो सकता है। पीएडी के कारण आपके पैरों के रंग में बदलाव आने लगता है। इस स्थिति में आपके पैरों का रंग नीला या काला होने लगता है और इसके साथ दर्द भी हो सकता है। चलने पर ये स्थिति और गंभीर हो सकती है हालांकि आराम करने के कुछ ही मिनटों में यह कम हो जाती है।

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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण क्या है - फोटो : iStock
हाई कोलेस्ट्रॉल के जोखिम कारकों के बारे में जानिए

कुछ स्थितियां आपमें कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का कारण बन सकती हैं जिसको लेकर सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना चाहिए। अगर इनपर समय रहते ध्यान न दिया जाए या इनकी रोकथाम न की जाए तो ये कम उम्र में ही हृदय रोगों का कारण बन सकती हैं। डॉक्टर्स बताते हैं कि बहुत अधिक सेचुरेटेड या ट्रांस फैट वाली चीजों का सेवन करना अस्वास्थ्यकर कोलेस्ट्रॉल का जोखिम बढ़ा देता है। इसके अलावा जिन लोगों का बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई)  30 या इससे अधिक होता है ऐसे लोगों में भी हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा अधिक हो सकता है। 
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हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : Pixabay
कोलेस्ट्रॉल को कैसे नियंत्रित रखें?

हृदय की गंभीर बीमारियों से सुरक्षित रहने के लिए कोलेस्ट्रॉल के स्तर को कंट्रोल रखना बहुत आवश्यक माना जाता है। इसके लिए पांच बातों का विशेष ख्याल रखा जाना चाहिए।
  • हृदय को स्वस्थ रखने वाले भोजन करें।
  • नियमित रूप से व्यायाम-योग की आदत बनाएं।
  • धूम्रपान शरीर के लिए कई प्रकार से हानिकारक है, इससे दूरी बनाकर रखें। 
  • वजन कम करें, ऐसा करके कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद मिल सकती है। 
  • शराब से परहेज करें, ये लिवर के साथ कोलेस्ट्रॉल और हृदय के लिए भी नुकसानदायक माना जाता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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