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सावधान: लगभग 30% भारतीय इस समस्या से पीड़ित, समय पर न दिया गया ध्यान तो हो सकता है हार्ट अटैक

Thu, 21 Nov 2024 05:56 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

करीब 30 फीसदी भारतीय आबादी को हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या है। इसमें से बहुत से लोग अपनी इस स्थिति से अनजान हैं। अगर कोलेस्ट्रॉल  पर ध्यान न दिया जाए या फिर इसे कंट्रोल में न रखा जाए तो इसके कारण हृदय की गंभीर समस्या यहां तक कि हार्ट अटैक हो सकता है।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : freepik.com
पिछले एक दशक के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारतीय आबादी में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। डायबिटीज और हृदय रोगों का जोखिम अब कम उम्र के लोगों में भी देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस बीमारी के लिए जिन कारणों को जिम्मेदार माना जाता है- हाई कोलेस्ट्रॉल उनमें से एक है। लगातार बढ़े रहने वाली कोलेस्ट्रॉल की समस्या हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बन सकती है। 

आंकड़ों से पता चलता है कि करीब 30 फीसदी भारतीय आबादी को हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत है। इसमें से बहुत से लोग अपनी इस स्थिति से अनजान हैं। अगर कोलेस्ट्रॉल पर ध्यान न दिया जाए या फिर इसे कंट्रोल में न रखा जाए तो इसके कारण हृदय की गंभीर समस्या यहां तक कि हार्ट अटैक हो सकता है।

कोलेस्ट्रॉल हमारी धमनियों में जमा होकर रक्त के संचार को बाधित कर देती है जिसके कारण हृदय तक रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। ये हार्ट अटैक के लिए प्रमुख कारण है जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की जरूरत है।
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हाई कोलेस्ट्रॉल का खतरा - फोटो : Freepik.com
अमेरिकी लोगों में भी खतरा

हाई कोलेस्ट्रॉल से प्रभावित लोगों की संख्या सिर्फ भारत में ही अधिक नहीं है। यू.एस. सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) के मुताबिक अमेरिकी वयस्कों में भी इसका जोखिम देखा जा रहा है। हर 10 अमेरिकी वयस्कों में से एक उच्च कोलेस्ट्रॉल के स्तर के साथ जी रहा है। साल 2021 से 2023 तक के डेटा से पता चलता है कि 11.3% वयस्कों में हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, दुनियाभर में बढ़ते हृदय रोगों के लिए इसे एक कारण माना जा सकता है जिसके बारे में सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों में कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत अधिक देखी जाती है।
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हृदय रोगों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
हार्ट अटैक का बढ़ सकता है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, ब्लड कोलेस्ट्रॉल का स्तर 300 mg/dL या उससे अधिक होने पर दिल का दौरा पड़ने का जोखिम दोगुना से भी अधिक हो जाता है। कोलेस्ट्रॉल धमनियों में रुकावट पैदा कर सकता है, इससे सिर्फ हार्ट अटैक ही नहीं स्ट्रोक और इसके कारण जान जाने का भी जोखिम रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया जो लोग शराब या धूम्रपान करते हैं उनमें हाई कोलेस्ट्रॉसल के कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को खतरा अन्य लोगों की तुलना में और अधिक होता है।

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हाई कोलेस्ट्रॉल की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
क्यों बढ़ता है कोलेस्ट्रॉल

डॉक्टर बताते हैं कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। दिनचर्या और आहार में गड़बड़ी से इसका खतरा काफी बढ़ जाता है। अगर आप अस्वास्थ्यकर आहार का सेवन करते हैं, शारीरिक गतिविधि की कमी है या अधिक वजन से परेशान हैं तो ये सभी हाई कोलेस्ट्रॉल के खतरे को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। संतृप्त और ट्रांस फैट वाली चीजें जैसे रेड मीट, फुल फैट वाले डेयरी उत्पाद,  मक्खन, क्रीम का भी अधिक सेवन करने से इसका खतरा हो सकता है।

कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग अधिक तनाव लेते हैं या फिर शराब का सेवन करते हैं उनमें भी इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
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आहार का रखें ख्याल - फोटो : Freepik.com
कोलेस्ट्रॉल को कैसे रखें कंट्रोल?

डॉक्टर ने कहा, दिनचर्या में कुछ बदलाव करके कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल में रखा जा सकता है। इसके लिए सबसे जरूरी है कि आप स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन करें। बीन्स, दाल, फल और सब्जियों जैसे घुलनशील फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों को आहार का हिस्सा बनाना लाभदायक माना जाता है। एवोकाडो, नट्स-सीड्स और ऑलिव ऑयल के सेवन को अध्ययनों में कोलेस्ट्रॉल को बढ़ने से रोकने और हृदय को स्वस्थ रखने में फायदेमंद पाया गया है।

स्वस्थ आहार के साथ शारीरिक गतिविधि भी बढ़ाएं। सप्ताह में कम से कम 30 मिनट तक चलने, दौड़ने या साइकिल चलाने जैसे एरोबिक व्यायाम की आदत बनाएं। इससे भी आपको लाभ मिल सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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