फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Heatwave: बढ़ रहा है तापमान, बच्चों की सेहत पर पड़ सकता है असर; स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए जरूरी सुझाव

Sat, 14 Jun 2025 05:45 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अस्पतालों में रोजाना गर्मी के कारण होने वाली समस्याओं के साथ कई बच्चे आ रहे हैं, इसलिए सभी माता-पिता को इन दिनों अतिरिक्त सावधान बरतनी चाहिए। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए स्कूलों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं
विज्ञापन
1 of 5
बच्चों में हीटस्ट्रोक का खतरा - फोटो : Freepik.com
देश के अधिकतर राज्य इन दिनों बढ़ती गर्मी का प्रकोप झेल रहे हैं। कई स्थानों पर तापमान 40 डिग्री को पार कर गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस तरह की बढ़ती गर्मी का सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। 40 से अधिक के तापमान के कारण हीटस्ट्रोक का जाोखिम बढ़ जाता है, जो पूरे शरीर के कार्यों को प्रभावित करने वाली हो सकती है।

वैसे तो इस भीषण गर्मी से बचाव करते रहना सभी के लिए आवश्यक है पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे और बुजुर्गो की सेहत पर लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। चूंकि बच्चे स्कूल जाते हैं, बाहर खेलते हैं इस वजह से उनमें हीट स्ट्रोक का जोखिम अधिक हो सकता है।

सभी माता-पिता ये सुनिश्चित करें कि बच्चे धूप के सीधे संपर्क में कम से कम आएं और गर्मी के दुष्प्रभावों से बचाव के लिए उपाय करते रहें।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने तेज गर्मी में बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी सुझाव दिए हैं जिसके बारे में माता-पिता को जानना और इसका पालन करते रहना जरूरी है।
Trending Videos
विज्ञापन

2 of 5
बढ़ता तापमान सेहत के लिए नुकसानदायक - फोटो : ANI
बढ़ती गर्मी का बच्चों की सेहत पर असर

बढ़ा हुआ तापमान बच्चों की सेहत पर गंभीर असर डाल सकता है। बच्चों की प्रतिरक्षा प्रणाली (इम्यून सिस्टम) वयस्कों की तुलना में कमजोर होती है, जिससे वे हीटवेव, डिहाइड्रेशन और अन्य गर्मी से जुड़ी बीमारियों के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं।

यूनिसेफ की रिपोर्ट्स के अनुसार, हीट स्ट्रोक बच्चों में जानलेवा हो सकता है, खासकर 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में इसके कारण गंभीर जोखिमों को डर रहता है। 

अस्पतालों में रोजाना गर्मी के कारण होने वाली समस्याओं के साथ कई बच्चे आ रहे हैं, इसलिए सभी माता-पिता को इन दिनों अतिरिक्त सावधान बरतनी चाहिए।
विज्ञापन

3 of 5
बच्चों को हीटवेव से कैसे बचाएं? - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिए जरूरी सलाह

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बच्चों को गर्मी से बचाने के लिए स्कूलों के लिए कुछ सुझाव दिए हैं।
  • स्वच्छ एवं ठंडे पेयजल की सुविधा सुनिश्चित करें।
  • साफ और सुरक्षित पानी के लिए वाटर कूलरों की नियमित रूप से सफाई करें और निगरानी करें।
  • छात्र और शिक्षकों के नियमित स्वच्छता संबंधी आवश्यकताओं के लिए पर्याप्त जल भंडारण सुनिश्चित करें।
  • कक्षाओं को प्राकृतिक या कृत्रिम तरीके, जैसे पंखे, कूलर आदि से अच्छी तरह हवादार रखें।
  • विशेष रूप से लू की चेतावनी के दौरान, अत्यधिक धूप के दौरान (12-3 बजे) किसी भी बाहरी गतिविधियों से बचें।
  • बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और शरीर को ठंडा रखने के महत्व के बारे में बतायें। 
  • एक खास अंतराल पर घंटी बजाकर बच्चों को पानी पीने के बारे में याद दिलाएं ।
  • बच्चों को गर्मी/लू से संबंधित संकेत एंव लक्षणों को पहचाने के बारे में और प्राथमिक चिकित्सा के बारे में बतायें।
  • बच्चों को उनके मूत्र के रंग से शरीर में पानी की कमी के लक्षणों की पहचान करने के लिए शिक्षित करें।

4 of 5
हीट स्ट्रोक के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
तापमान बढ़ने से बच्चों को होने वाली मुख्य समस्याएं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अधिक तापमान में रहने वाले बच्चों को हीट स्ट्रोक हो सकता है। इसमें शरीर का तापमान 104°F (40°C) से अधिक हो जाता है। इसके अलावा चक्कर-उल्टी आने, सांसे और धड़कन बढ़ने, बेहोशी जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। 

गर्मी के दिनों में बच्चों में डिहाइड्रेशन का भी खतरा रहता है। इसके कारण अत्यधिक प्यास लगने, पेशाब कम लगने, होंठ-जीभ सूखने, सुस्ती या चिड़चिड़ापन जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं। इससे बचे रहने के लिए दिनभर में बच्चों को पर्याप्त मात्रा में पानी पिलाते रहें। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
गर्मी के कारण होने वाले दुष्प्रभाव - फोटो : freepik.com
बच्चों में डिहाइड्रेशन का खतरा

जर्नल ऑफ पेडियाट्रिक्स में साल 2020 में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि 6 से 12 वर्ष की उम्र के 60% बच्चे गर्मी में पर्याप्त पानी नहीं पीते, जिससे डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ता है। सभी माता-पिता सुनिश्चित करें कि बच्चा दिन में 2-3 लीटर पानी और अन्य तरल पदार्थों का सेवन करता रहे।



------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें