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Heatstroke: सिर्फ तेज बुखार ही नहीं ये लक्षण भी देते हैं हीट स्ट्रोक की चेतावनी, भूलकर भी न करें नजरअंदाज

Sun, 24 May 2026 07:47 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हीट स्ट्रोक के दौरान शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र फेल होने लगता है। शरीर का तापमान लंबे समय तक बहुत अधिक बना रहे तो यह जानलेवा हो सकता है और तुरंत इलाज जरूरी होता है।
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हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
देशभर में इन दिनों भीषण गर्मी और लू का प्रकोप देखा जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से पारा 45 डिग्री सेल्सियस या इससे ऊपर बना हुआ है। विदर्भ का ब्रह्मपुरी 47.2°C के साथ सबसे गर्म स्थान बन गया है, जबकि तेलंगाना में लू से 16 लोगों की मौत की खबर है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी की है कि मध्य और उत्तर भारत में इस महीने के अंत तक भीषण गर्मी जारी रहने वाली है। दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सहित कई राज्यों में दिन में 10 बजे के बाद से ही सूरज की प्रचंड गर्मी महसूस की जा सकती है।

मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली, पंजाब और हरियाणा में तापमान में अभी और इजाफा हो सकता है। बढ़ती गर्मी के साथ स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को हीट स्ट्रोक के खतरे को लेकर भी अलर्ट कर रहे हैं। अगर समय रहते हीट स्ट्रोक के लक्षणों की पहचान न हो पाए या इसका इलाज न मिले तो इससे जान जाने तक का खतरा हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, हीट स्ट्रोक में सिर्फ शरीर बहुत ज्यादा गर्म ही नहीं होता बल्कि कुछ और भी लक्षण हो सकते हैं जिसपर गंभीरता से ध्यान देते रहने की जरूरत होती है।
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हीट स्ट्रोक के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe stock
हीट स्ट्रोक हो सकता है खतरनाक

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि जब तापमान 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच जाता है तो किस तरह से इसका शरीर के तमाम अंगों पर नकारात्मक असर हो सकता है। 
 
  • हीट स्ट्रोक या लू लगना एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक बना रहता है।
  • ये स्थिति शरीर की प्राकृतिक कूलिंग सिस्टम को प्रभावित कर देती है। अगर ये समस्या लंबे समय तक बनी रह जाए तो किडनी, हृदय और ब्रेन पर भी असर पड़ सकता है।
  • हीट स्ट्रोक की स्थिति में चूंकि शरीर का कूलिंग सिस्टम फेल हो जाता है, इसलिए आपको तेज बुखार महसूस हो सकता है। पर इसके अलावा भी कई लक्षण हैं जिसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
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हीट स्ट्रोक के लक्षणों को जानिए - फोटो : Adobe Stock
हीट स्ट्रोक आपके दिल और किडनी के लिए भी खतरनाक है। गंभीर हीट स्ट्रोक में मल्टी ऑर्गन फेलियर तक का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ कहते हैं कि कई लोग शुरुआती लक्षणों को सामान्य थकान या बुखार समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। ये लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। आइए हीट स्ट्रोक के अन्य लक्षणों को भी जान लेते हैं।


मांसपेशियों में ऐंठन और कमजोरी
 
  • तेज गर्मी में लगातार पसीना निकलने से शरीर में सोडियम और पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स कम हो जाते हैं। इससे मांसपेशियों में दर्द, ऐंठन और कमजोरी महसूस हो सकती है। मांसपेशियों में बार-बार क्रैम्प आना शरीर में पानी और मिनरल की कमी का संकेत हो सकता है।

त्वचा पर होने वाला असर
  • हीट स्ट्रोक में शरीर पसीना बनाना बंद कर देता है। ऐसे में त्वचा गर्म, लाल और सूखी महसूस होती है। अगर किसी व्यक्ति का शरीर असामान्य रूप से गर्म लगे और पसीना न आ रहा हो, तो तुरंत सावधान हो जाना चाहिए।
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हीट स्ट्रोक के कारण सांस फूलने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
सांस फूलने की समस्या
 
  • हीट स्ट्रोक में शरीर खुद को तेजी से ठंडा रखने की कोशिश करता है, इसमें दिल की  धड़कन बढ़ सकती है। हार्ट रेट बढ़ना और सांस फूलना भी हीट स्ट्रोक की ओर इशारा माना जाता है। शरीर का तापमान बढ़ने के साथ अगर हार्ट रेट तेज हो या सांस फूले तो सावधान हो जाएं।

उल्टी-मितली का खतरा
 
  • हीट स्ट्रोक का असर पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। हीट स्ट्रोक के कारण मतली, उल्टी और पेट खराब होने जैसी समस्या भी होने लगती है। शरीर में पानी की कमी पेट और आंतों की कार्यक्षमता प्रभावित कर देती है। यदि गर्मी के दौरान लगातार उल्टी हो रही हो और कमजोरी महसूस हो रही हो, तो इसे सामान्य फूड पॉइजनिंग समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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