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Heatstroke vs Heat Exhaustion: हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन में क्या अंतर है? जानें दोनों के लक्षण और सावधानियां

Sun, 15 Jun 2025 03:21 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इन दिनों गर्मी का मौसम अपने चरम पर है, दिन के समय बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं। इस मौसम में हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन होना बहुत आम बात है। अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि इन दोनों में क्या अंतर है, आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन - फोटो : Adobe Stock
Heatstroke vs Heat Exhaustion: भारत में इस वक्त गर्मी का प्रकोप अपने चरम पर है, और सूरज की तपिश ऐसी है कि कई शहरों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के आंकड़े को भी पार कर रहा है। दिन के समय बाहर निकलना किसी चुनौती से कम नहीं, क्योंकि लू के थपेड़े और तपती हवा शरीर से ऊर्जा और पानी दोनों सोख लेती है। यह सिर्फ असहज करने वाला मौसम नहीं, बल्कि हमारी सेहत के लिए गंभीर खतरे भी पैदा कर रहा है।

इस भीषण गर्मी में हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन जैसी स्वास्थ्य समस्याएं अब एक आम बात हो गई हैं। ये स्थितियां इतनी गंभीर हो सकती हैं कि थोड़ी सी भी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। शरीर का तापमान अनियंत्रित होना, अत्यधिक पसीना आना, चक्कर आना और बेहोशी जैसे लक्षण बताते हैं कि शरीर गर्मी का सामना नहीं कर पा रहा है। ऐसे में, इन खतरों को समझना और इनसे बचने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है। अब कई लोगों के मन में ये सवाल होगा कि हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन में क्या अंतर है? आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन - फोटो : Adobe Stock
हीट एक्जॉशन क्या है?
हीट एक्जॉशन तब होता है जब गर्मी और पसीने के कारण शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स बहुत कम हो जाता है। यह लंबे समय तक धूप में रहने, मेहनत करने या अपर्याप्त पानी पीने से होता है। इसके लक्षणों में अत्यधिक पसीना, थकान, चक्कर, सिरदर्द, मांसपेशियों में ऐंठन, जी मिचलाना और ठंडी, चिपचिपी त्वचा शामिल हैं। अगर इसे अनदेखा किया जाए, तो यह हीटस्ट्रोक में बदल सकता है, जो अधिक खतरनाक है।

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हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन - फोटो : Adobe Stock
हीटस्ट्रोक की गंभीरता
हीटस्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है, जिसमें शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस (104°F) तक पहुंच जाता है या उससे ऊपर चला जाता है। शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र विफल होने से यह स्थिति उत्पन्न होती है। इसके लक्षणों में तेज बुखार, गर्म और शुष्क त्वचा, भ्रम, चिड़चिड़ापन, तेज दिल की धड़कन, सांस लेने में तकलीफ, बेहोशी या दौरे शामिल हैं। हीटस्ट्रोक में तुरंत उपचार न मिले तो यह जानलेवा हो सकता है।

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हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन - फोटो : Adobe Stock
दोनों में मुख्य अंतर
हीट एक्जॉशन और हीटस्ट्रोक में गंभीरता का अंतर है। हीट एक्जॉशन में त्वचा ठंडी और पसीने वाली होती है, जबकि हीटस्ट्रोक में गर्म और शुष्क। हीट एक्जॉशन में थकान और कमजोरी होती है, लेकिन हीटस्ट्रोक में बेहोशी जैसे गंभीर लक्षण दिखते हैं। हीटस्ट्रोक में शरीर का तापमान खतरनाक स्तर तक बढ़ जाता है, जो इसे अधिक जोखिम भरा बनाता है।
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हीट एक्जॉशन - फोटो : Freepik.com
प्राथमिक उपचार और इमरजेंसी
हीट एक्जॉशन में व्यक्ति को छायादार, ठंडी जगह पर ले जाएं, पानी या ORS पिलाएं और ठंडे कपड़े से शरीर को ठंडा करें। अगर सुधार न हो, तो डॉक्टर से संपर्क करें। हीटस्ट्रोक में तुरंत बिना देर किए मेडिकल मदद लें। ध्यान रखें कि बेहोशी के हालत में पानी न पिलाएं।
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हीटस्ट्रोक - फोटो : Freepik.com
सावधानियां और सुझाव
गर्मी में 12 से 3 बजे तक बाहर निकलने से बचें। 8-10 गिलास पानी, नारियल पानी या इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक को अपनी डाइट में शामिल करें। हल्के, ढीले और हल्के रंग के कपड़े पहनें। टोपी, छाता और सनस्क्रीन का उपयोग करें। सावधानी और जागरूकता से भीषण गर्मी में भी हीटस्ट्रोक और हीट एक्जॉशन से बचा जा सकता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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