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Heatwave: आसमान से बरस रही 'आग' गर्भवती और बच्चों की सेहत के लिए बहुत खतरनाक, ऐसे करें बचाव

Mon, 20 May 2024 05:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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गर्मी के कारण होने वाले दुष्प्रभाव - फोटो : freepik.com
राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्य इन दिनों भीषण गर्मी और लू की चपेट में हैं। तापमान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है, सोमवार को दिल्ली के नजफगढ़ में तापमान 47 डिग्री से भी अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग ने अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि अगले एक हफ्ते तक तेज गर्मी और लू का प्रकोप जारी रह सकता है। जिस स्तर पर तापमान बढ़ता जा रहा है इससे सेहत को कई प्रकार से नुकसान होने का खतरा है।

आसमान से बरस रही 'आग' बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है, जिसको लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने अपने पूर्वानुमान में बताया अगले एक हफ्ते तक दिल्ली सहित देश के कई हिस्सों में लू चलने की आशंका है। जिन लोगों को पहले से ही कोमोरबिडिटी की शिकायत है उन्हें इस मौसम में सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों को भी इस भीषण गर्मी से बचाकर रखने की सलाह दी है। 
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बढ़ती गर्मी के हो सकते हैं कई नुकसान - फोटो : istock
शिशुओं और बच्चों को हीटवेव से बचाना जरूरी

आईएमडी ने देशभर में बढ़ते तापमान को लेकर रेड अलर्ट जारी किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अत्यधिक गर्मी और आर्द्रता के कारण शिशुओं, बच्चों, गर्भवती और बुजुर्गों की सेहत पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है। गर्मी और लू की गंभीर स्थिति हीट स्ट्रोक का कारण बन सकती है जिसपर गंभीरता से ध्यान न दिया जाए तो ये कोमा और मृत्य के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। बच्चों की सेहत को लेकर परिजनों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
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बच्चों को होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik
बच्चों की सेहत पर हो सकता है नकारात्मक असर

बाल रोग विशेषज्ञ डॉ सुरभि जयसवाल बताती हैं, शिशुओं और छोटे बच्चों में गर्मी से संबंधित बीमारियों का खतरा अधिक होता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि वे अपने शरीर के तापमान को ठीक तरीके से  नियंत्रित नहीं कर पाते हैं। खुद को गर्मी से बचाने के लिए भी वह सक्षम नहीं होते हैं। बच्चों में अधिक गर्मी के कारण निर्जलीकरण और लू लगने का खतरा भी अधिक होता है।

डॉक्टर बताती हैं, कुछ अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि अधिक तापमान बच्चों के मस्तिष्क स्वास्थ्य को भी प्रभावित करने वाला हो सकता है, इसलिए बच्चों को धूप के सीधे संपर्क में आने से बचाना जरूरी है।

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गर्भावस्था की समस्या - फोटो : istock
गर्भवती बरतें विशेष सावधानी
 
बच्चों की ही तरह से गर्भवती के लिए भी अधिक तापमान कई प्रकार से जोखिम कारक हो सकता है। गर्मी और निर्जलीकरण से शिशु का वजन कम होने, समय से पहले जन्म और यहां तक कि मृत शिशु के जन्म का भी खतरा बढ़ सकता है। तेज गर्मी के कारण गर्भावस्था से संबंधित समस्याओं, जल्दी प्रसव पीड़ा होने के साथ गर्भकालीन मधुमेह और उच्च रक्तचाप होने का भी जोखिम काफी अधिक हो सकता है।
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गर्मी से करें बचाव - फोटो : iStock
बच्चों-गर्भवती को कैसे रखें सुरक्षित?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कुछ उपाय बताए हैं जिनकी मदद से बच्चों-गर्भवती को तेज धूप और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं से बचाया जा सकता है।
  • नियमित रूप से ध्यान रखें कि कहीं बच्चा प्यासा तो नहीं है, मुंह सूखा या सिरदर्द का अनुभव तो नहीं कर रहा है?
  • बच्चे को तेज बुखार या चक्कर आ रहा है या फिर तेजी से सांस ले रहा है, तो उसे तुरंत डॉक्टर के पास ले जाएं।
  • सुनिश्चित करें कि बच्चे को घमौरिया और अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए ढीले कपड़े पहनाए जाएं।
  • स्तनपान कराने वाली माताओं को खूब पानी पीना चाहिए क्योंकि निर्जलीकरण स्तन के दूध उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।
  • गर्भवती के लिए जरूरी है कि आप खूब पानी पीती रहें और धूप के सीधे संपर्क में जाने से भी बचें।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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