दिल की सेहत का रखें ध्यान
- फोटो : adobe stock images
32 गुना ज्यादा बढ़ जाता है खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार हार्ट फेलियर की पहचान और उपचार में देरी मां और शिशु दोनों के लिए गंभीर परिणाम पैदा कर सकती है। राष्ट्रीय आंकड़ों के अनुसार हार्ट फेलियर से पीड़ित गर्भवती महिलाओं में प्रसव के आसपास मृत्यु का खतरा अन्य गर्भवती महिलाओं की तुलना में लगभग 32 गुना अधिक होता है।
इसके अलावा अनियमित हृदय गति, स्ट्रोक, हृदय की कार्यक्षमता में गिरावट, समयपूर्व प्रसव, प्रसवोत्तर अत्यधिक रक्तस्राव, संबंधी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि पहले साल में संतुलित और पौष्टिक भोजन, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन से भरपूर आहार लेना सभी महिलाओं के लिए जरूरी है। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह के अनुसार सप्लीमेंट्स लेनाना, पर्याप्त नींद और हल्की-फुल्की शारीरिक गतिविधियां शरीर को तेजी से रिकवर करने में मदद करती हैं।
--------------
स्रोत:
Heart Failure Occurring in the Perinatal Period: A Scientific Statement From the American Heart Association
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।