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Health Tips: आपका वजन नॉर्मल है या नहीं? मिनटों में करें चेक और बीमारियों से रहें सुरक्षित

Thu, 08 Jan 2026 07:34 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • वैज्ञानिकों की टीम ने बताया है कि मोटापे के खतरे का पता लगाने में वेस्ट-टू-हाइट रेशियो (कमर-से-ऊंचाई अनुपात) बीएमआई की तुलना में ज्यादा बेहतर हो सकता है।
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वजन की जांच बहुत जरूरी - फोटो : Freepik.com
मोटापा या वजन अधिक होना, मौजूदा समय की सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक हैं। यह सिर्फ शरीर की बनावट में गड़बड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि कई गंभीर बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देती है। डॉक्टर कहते हैं,  जिन लोगों का वजन सामान्य से अधिक होता है उनमें दिल की बीमारी, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और जोड़ों की समस्याओं जैसे आर्थराइटिस का खतरा कई गुना अधिक हो सकता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों का बढ़ता वजन और भी गंभीर चिंता का विषय है। इसके कारण कम उम्र में ही क्रॉनिक बीमारियों का खतरा हो सकता है। गड़बड़ लाइफस्टाइल, जंक फूड्स खाना और मोबाइल-टीवी की लत के कारण बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। बचपन का मोटापा आगे चलकर अगर युवावस्था और वयस्क उम्र में भी बना रहता है, तो इसके कारण कम उम्र में ही दिल और डायबिटीज जैसी बीमारियां हो सकती हैं।

मसलन मोटापा गंभीर स्वास्थ्य चुनौती है। अपने वजन पर ध्यान देना और इसे कंट्रोल में रखना आपके लिए बहुत आवश्यक हो जाता है। क्या आप भी इसका शिकार हैं, क्या आप अपना वजन सही तरीके से माप रहे हैं?
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बढ़ने न पाए शरीर का वजन - फोटो : Freepik.com
वजन की जांच का क्या है सही तरीका?

वजन चेक करने के लिए बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) की जांच को कारगर तरीका माना जाता रहा है। पर हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया है कि मोटापे के खतरे का पता लगाने में वेस्ट-टू-हाइट रेशियो (कमर की चौड़ाई और ऊंचाई का अनुपात) बीएमआई की तुलना में ज्यादा बेहतर हो सकता है।

जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है मोटापा और मोटापे से जुड़ी बीमारियां भी बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी स्क्रीनिंग टूल के तौर पर कमर-से-ऊंचाई के अनुपात लेना अच्छा विकल्प हो सकता है।

बीएमआई फैट और मसल मास के बीच फर्क नहीं करता, वहीं कमर-से-ऊंचाई का अनुपात विसरल फैट (पेट की चर्बी) को बेहतर तरीके से दर्शाता है। पेट की चर्बी बढ़ने को सेहत के लिए सबसे खतरनाक माना जाता रहा है।
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मोटापा की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शेफील्ड और नॉटिंघम यूनिवर्सिटी के इस अध्ययन में इंग्लैंड में 2005 से 2021 के बीच मोटापे के ट्रेंड का आकलन किया गया। शोधकर्ताओं ने मोटापे को मापने का सबसे आम तरीके बीएमआई के साथ-साथ दूसरे तरीकों से भी जांच की, जिसमें कमर-से-ऊंचाई का अनुपात भी शामिल है। शोधकर्ताओं ने पता लगाया कि क्या मोटापे के ट्रेंड मुख्य रूप से उम्र बढ़ने, पर्यावरणीय कारकों या पीढ़ीगत अंतर के कारण थे?

शेफील्ड यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ मेडिसिन एंड पॉपुलेशन हेल्थ में प्रोफेसर डॉ. लौरा ग्रे कहती हैं, बीएमाई एक बहुत ही जाना-माना और अच्छी तरह से समझा जाने वाला पैमाना है। हालांकि सभी के लिए फिट पैमाना हो ऐसा जरूरी नहीं है।

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बेली फैट बढ़ना बहुत खतरनाक - फोटो : Adobe stock photos
कैसे जानें आपका वजन ठीक है या नहीं?

शोधकर्ताओं ने कहा, कमर और हाइट का रेशियो लोगों के लिए समझना और याद रखना आसान है। लोग मेजरिंग टेप से भी आसानी से अपना रिस्क चेक कर सकते हैं। अगर आपकी कमर की चौड़ाई आपकी हाइट के आधे से कम है, तो यह एक अच्छा संकेत है कि आपका वजन हेल्दी है। अगर ये बढ़ रहा है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए।

जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को मोटापा और इससे होने वाली बीमारियां रही हैं, उन्हें और ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है।
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मोटापा कम करने वाले तरीके - फोटो : Adobe stock photos
मोटापा घटाने वाली दवा की खोज

मोटापे घटाने वाले उपायों और कारगर दवाओं के लिए दुनियाभर के वैज्ञानिक लगातार अध्ययन कर रहे हैं। हाल ही में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि विशेषज्ञों ने इसके लिए एक असरदार दवा ढूंढ ली है।

ऑस्ट्रेलियाई वैज्ञानिकों की एक टीम ने एक ऐसी खोज दावा किया है जो न सिर्फ मोटापा घटाने में मदद करती है बल्कि ये उस तरह से शरीर में काम करती है कि आप लंबे समय तक इस समस्या से बचे रह सकें। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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