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Heart Health: हृदय रोगों से बचे रहने के लिए आज से ही दिनचर्या में शामिल कर लीजिए ये चार जरूरी उपाय

Sun, 26 Jan 2025 03:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हृदय का स्वस्थ रहना और इसका ठीक से काम करते रहना बहुत आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है इसने कम उम्र के लोगों में भी इस बीमारी के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। 
आइए जानते हैं कि आप दिनचर्या में किन बातों का ध्यान रखकर हार्ट हेल्थ को ठीक रख सकते हैं?
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
हृदय रोग वैश्विक स्तर पर बढ़ती सबसे गंभीर बीमारियों में से एक है जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। हृदय रोगों में कई ऐसी बीमारियां शामिल हैं जो आपके दिल की सेहत को प्रभावित करती हैं। कोरोनरी आर्टरी डिजीज (सीएडी) इसमें सबसे आम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और खान-पान में गड़बड़ी बढ़ती जा रही है इसने कम उम्र के लोगों में भी इस बीमारी के जोखिम को काफी बढ़ा दिया है। 

हृदय का स्वस्थ रहना और इसका ठीक से काम करते रहना बहुत आवश्यक है। जब आपका दिल ठीक से काम नहीं कर रहा होता है या उसमें कोई परेशानी होती है तो उसे शरीर में पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन पहुंचाते रहने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। ये अतिरिक्त दबाव हार्ट अटैक जैसे गंभीर और जानलेवा स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती है। 

आइए जानते हैं कि आप दिनचर्या में किन बातों का ध्यान रखकर हार्ट हेल्थ को ठीक रख सकते हैं?
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सब्जियां-फल खाएं - फोटो : Freepik.com
पौष्टिक आहार आपकी पहली प्राथमिकता

आपके आहार का सीधा प्रभाव हृदय स्वास्थ्य पर पड़ता है। संतुलित और पौष्टिक आहार हृदय को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने में मदद करते हैं। इसके लिए जरूरी है कि आप नियमित रूप से फलों और हरी सब्जियों का भरपूर सेवन करें। अध्ययनों में ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजों को हार्ट के लिए बहुत जरूरी पाया गया है। इसके लिए मछली, अखरोट और अलसी के बीज को आहार का हिस्सा बनाएं। 

क्या खाएं से ज्यादा जरूरी ये जानना है कि क्या न खाएं। तले-भुने और अधिक फैट वाले भोजन, नमक और चीनी के अधिक सेवन को हृदय स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक माना गया है। इनसे दूरी बनाकर रखें।
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शारीरिक गतिविधि हृदय को मजबूत बनाती है। - फोटो : Adobe stock
नियमित व्यायाम जरूर करें

शारीरिक गतिविधि हृदय को मजबूत बनाती है और रक्त प्रवाह को सुधारती है। अध्ययनों से पता चलता है कि जो लोग शारीरिक तौर पर निष्क्रिय रहते हैं उनमें हृदय रोग और हार्ट अटैक होने का जोखिम अधिक देखा जाता है। इन समस्याओं से बचे रहने के लिए वॉकिंग, रनिंग, योग, साइकिलिंग और तैराकी जैसे एरोबिक व्यायाम करें।

शोध बताते हैं सप्ताह में कम से कम 150 मिनट मध्यम स्तर की या 75 मिनट तीव्र स्तर की शारीरिक गतिविधि आपके हार्ट को स्वस्थ रखने में मददगार हो सकती है।

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तनाव की समस्या बहुत नुकसानदायक - फोटो : Adobe stock
ज्यादा तनाव का भी हार्ट पर होता है असर

यदि आप अक्सर तनाव ग्रस्त रहते हैं तो ये भी हार्ट हेल्थ के लिए ठीक नहीं है। अत्यधिक तनाव भी हृदय रोगों का बड़ा कारण बन सकता है। तनाव की स्थिति सूजन, रक्तचाप बढ़ाने और हृदय की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचाने लगती है जिसके कारण हृदय रोगों का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए जरूरी है कि आप स्ट्रेस मैनेजेंट के लिए उपायों का पालन करें। रोजाना 10-20 मिनट ध्यान और मेडिटेशन की मदद से तनाव को कम करने में लाभ मिल सकता है। ऐसा शौक अपनाएं जो आपको खुशी और सुकून दें, जैसे संगीत सुनना, पेंटिंग करना या बागवानी।
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धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान और शराब का सेवन बिल्कुल बंद करें

धूम्रपान और शराब दोनों ही आपके हृदय स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं हैं। धूम्रपान के कारण रक्तचाप की समस्या हो सकती है और ये हृदय को सीधे नुकसान पहुंचाती है। इसी तरह से शराब का अधिक सेवन हृदय की मांसपेशियों को कमजोर कर सकता है। इन आदतों से दूरी बनाकर रखना आपके हार्ट को स्वस्थ और ठीक रखने में काफी मददगार हो सकता है। 

समय-समय पर अपनी ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और ब्लड शुगर की जांच भी कराते रहें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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