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Health Tips: आंत के बैक्टीरिया से मस्तिष्क का क्या संबंध है? आखिर कैसे दिमाग को कंट्रोल करते हैं ये बैक्टीरिया

Fri, 25 Jul 2025 04:44 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हमारा मस्तिष्क और हमारा पेट दोनों ही शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। बहुत कम लोगों को मालूम है कि हमारा मस्तिष्क का हमारे पेट से बहुत गहरा संबंध है। आइए इस लेख में जानते हैं कि आंत के बैक्टीरिया हमारे मस्तिष्क को कैसे प्रभावित करते हैं।
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आंत के बैक्टीरिया - फोटो : Adobe stock
Gut Bacteria And Brain: हमारा शरीर एक जटिल तंत्र है, जहां हर अंग एक-दूसरे से जुड़ा हुआ है। इनमें मस्तिष्क और पेट का संबंध सबसे महत्वपूर्ण संबंधों में से एक है। हालांकि ज्यादातर लोग सोचते हैं कि पेट का काम सिर्फ खाना पचाना है, पर बहुत कम लोगों को यह मालूम है कि हमारे मस्तिष्क का हमारे पेट से बहुत गहरा और सीधा संबंध है।

हमारा पेट सिर्फ भोजन पचाने का काम नहीं करता, बल्कि यह अरबों सूक्ष्मजीवों (माइक्रोब्स) का घर भी है, जिन्हें सामूहिक रूप से आंत माइक्रोबायोम कहते हैं। ये बैक्टीरिया हमारे शरीर का एक जरूरी हिस्सा हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि ये आंत के बैक्टीरिया हमारे मस्तिष्क के साथ लगातार संवाद करते हैं। यह संवाद सिर्फ हमारे शारीरिक स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि हमारे मानसिक स्वास्थ्य, हमारी भावनाओं, मूड और यहां तक कि सोचने-समझने की क्षमता को भी प्रभावित करता है। यह संबंध जितना हम सोचते हैं, उससे कहीं अधिक गहरा और प्रभावशाली है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं, साथ ही ये भी जानेंगे कि हमारे आंत के बैक्टीरिया हमारे मस्तिष्क को कैसे कंट्रोल करते हैं।
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मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
आंत और मस्तिष्क में संवाद के तरीके
आंत और मस्तिष्क के बीच का संवाद कई तरीकों से हो सकता है। सबसे पहला वेगस तंत्रिका एक सीधा रास्ता है, जो पेट से दिमाग और दिमाग से पेट तक संदेश ले जाती है, जिससे दोनों आपस में जुड़े रहते हैं। इसके अलावा, आंत के बैक्टीरिया कई रासायनिक संदेशवाहक (न्यूरोट्रांसमीटर) बनाते हैं, जैसे सेरोटोनिन, जिसका 90% हिस्सा पेट में ही बनता है।

ये रसायन हमारे मूड, नींद और भूख पर असर डालते हैं। साथ ही, आंत का स्वास्थ्य सीधे हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी प्रभावित करता है, आंत में असंतुलन होने पर सूजन बढ़ती है, जो दिमाग और मानसिक सेहत पर बुरा असर डाल सकती है।
 
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मस्तिष्क को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : Freepik.com
आंत के बैक्टीरिया मानसिक स्वास्थ्य और मूड को कैसे प्रभावित करते हैं?
आंत माइक्रोबायोम का असंतुलन, जिसे डिसबायोसिस कहते हैं, चिंता और डिप्रेशन के बढ़ते जोखिम या गंभीरता से जुड़ा हुआ है। एक अस्वस्थ आंत से शरीर में सूजन बढ़ सकती है और न्यूरोट्रांसमीटर का उत्पादन बाधित हो सकता है, जिससे मूड पर नकारात्मक असर पड़ता है। आंत के बैक्टीरिया शरीर की तनाव प्रतिक्रिया को भी प्रभावित करते हैं।

एक स्वस्थ आंत माइक्रोबायोम आपको तनाव के प्रति अधिक लचीला बना सकता है। इसके अलावा, आंत का संतुलन याददाश्त, सीखने की क्षमता और समग्र संज्ञानात्मक कार्य को बेहतर बनाने में भी मदद कर सकता है। नींद के पैटर्न भी आंत के स्वास्थ्य से जुड़े होते हैं।

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पाचन तंत्र - फोटो : Freepik.com
हमारे आंत के बैक्टीरिया का संतुलन कई चीजों से प्रभावित होता है। खराब डाइट जिसमें प्रोसेस्ड फूड, ज़्यादा चीनी और कम फाइबर हो, अच्छे बैक्टीरिया को नुकसान पहुंचाती है। एंटीबायोटिक्स भी अच्छे-बुरे दोनों बैक्टीरिया को खत्म कर देती हैं। इसके अलावा, लगातार तनाव और नींद की कमी भी आंत के माइक्रोबायोम को नकारात्मक रूप से बदल सकती है।

वहीं, आंत के बैक्टीरिया के लिए संतुलित आहार (फाइबर, फल, सब्जियां), प्रोबायोटिक्स (दही) वाले फूड्स बहुत फायदेमंद होते हैं। नियमित व्यायाम और तनाव प्रबंधन भी आंत में बैक्टीरिया की विविधता और स्वास्थ्य को बढ़ावा देते हैं।
 
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पेट की समस्या - फोटो : Adobe Stock
स्वस्थ आंत के लिए अपनाएं ये आदतें
अपने दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए अपनी आंत का ख्याल रखना बहुत जरूरी है। इसके लिए अपनी डाइट में फर्मेंटेड फूड्स जैसे दही, छाछ, किमची, और सॉवरक्रॉट को शामिल करें। फाइबर से भरपूर फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं।

प्रोसेस्ड फूड्स और चीनी का सेवन सीमित करें। नियमित रूप से व्यायाम करें, पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग या ध्यान जैसी तकनीकों को अपनाएं। यदि आप लगातार मूड संबंधी समस्याओं या गंभीर पाचन संबंधी परेशानियों का अनुभव कर रहे हैं, तो किसी डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से जरूर सलाह लें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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