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Hepatitis Ayurvedic Tips: आयुर्वेद में है हेपेटाइटिस का बेहतर उपचार, स्वस्थ लिवर के लिए अपनाएं ये नुस्खे

Thu, 28 Jul 2022 08:30 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हेपेटाइटिस का आयुर्वेदिक उपचार - फोटो : istock

Ayurvedic Medicine To Cure Hepatitis : लीवर में सूजन होना हेपेटाइटिस की बीमारी से ग्रसित होना है। लिवर की सेहत को लेकर लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 28 जुलाई को विश्व हेपेटाइटिस दिवस मनाया जाता है। हेपेटाइटिस वायरस संक्रमण के कारण होने वाला रोग है। इसके अलावा अल्कोहल के अधिक सेवन से भी हेपेटाइटिस का खतरा बढ़ता है। वैसे तो हेपेटाइटिस से बचाव और इस रोग का इलाज संभव है। इसके लिए लोगों का जागरूक रहना भी जरूरी है। वहीं आयुर्वेद में भी हेपेटाइटिस से बचने के लिए बेहतर इलाज उपलब्ध है। आयुर्वेद में इसे कामला रोग भी कहा जाता है। इसकी उत्पत्ति पित्त के रक्त से मिलने के कारण होती है। हेपेटाइटिस को लेकर राजकीय स्नातकोत्तर आयुर्वेद महाविद्यालय के कायचिकित्सा व पंचकर्म विभाग के प्रवक्ता डॉ. अजय कुमार ने जानकारी देते हुए बताया कि शुरुआत में हेपेटाइटिस के लक्षण बहुत सीमित और न के बराबर नजर आ सकते हैं। सबसे ज्यादा घातक हेपेटाइटिस बी और सी होता है। डाॅ. अजय के मुताबिक कुछ दवाइयां जैसे एसिटामिनोफेन के अधिक सेवन से भी हेपेटाइटिस हो सकता है।

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लिवर में संक्रमण के लक्षण से करें रोग की पहचान - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस के शुरुआती लक्षण सीमित

डॉ. अजय का कहना है, यकृत में पित्त का निर्माण होता है। यही पित्त जब यकृत विकृति से व अन्य किसी वजह से रक्त में मिलने लगता है तो कामला रोग होने की संभावना बढ़ जाती है। चिकित्सा में विलंब करने और भोजन में लापरवाही बरतने से कामला रोग अधिक उग्र होता जाता है। उदर में शूल की विकृति भी होती है। रोगी बहुत अधिक निर्बल और थकावट अनुभव करता है। औषधियों के साथ ही पंचकर्म विशेष रूप से विरेचन कर्म बहुत ही लाभदायक होता है।
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सबसे घातक हेपेटाइटिस है बी और सी - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस के कारण

आयुर्वेद के मुताबिक हेपेटाइटिस होने के जो कारण बताए गए, वह निम्न हैं,
  • वायरल संक्रमण के कारण
  • शराब के अधिक सेवन के कारण
  • ज्यादा मात्रा में कुछ खास दवाओं के सेवन से
  • दूषित खानपान और जल से
  • अधिक तीखा व मिर्च, मसाले वाले खाद्य पदार्थों के सेवन से
  • पित्त नलिका में पथरी की वजह से
  • अधिक अम्लीय, क्षारीय, अति उष्ण, विरुद्ध और असात्म्य भोजन से

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आयुर्वेदिक उपचार - फोटो : पेक्सेल्स
हेपेटाइटिस का आयुर्वेदिक इलाज

फैटी लिवर रोग, पीलिया और हेपेटाइटिस की समस्या से बचाव के लिए लिवर को सेहतमंद रखें। इसके लिए आप आयुर्वेदिक नुस्खे आजमा सकते हैं। आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों और खाद्य सामग्रियों को डाइट में शामिल करके लिवर को मजबूत कर सकते हैं। स्वस्थ लिवर के लिए इन आयुर्वेदिक नुस्खों को अपनाएं।
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पपीता - फोटो : pixabay
पपीता

पपीता कई स्वास्थ्य लाभों के लिए जाना जाता है। लिवर की सेहत के लिए भी पपीते के फल और पत्तियों व बीच का सेव कर सकते हैं। अगर आपको पीलिया या लिवर सिरोसिस जैसी बीमारियों से दूर रहना है तो पपीते का सेवन करें। आप पपीते के बीजों को धूप में सुखाकर उसे पीस लें और इसका पाउडर एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच मिलाकर रोजाना पीएं। इस पेय जल में नींबू का रस मिला सकते हैं। चाहें तो पत्तियों को पीस कर इसका रस निकालकर रोजाना पिएं।
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त्रिफला - फोटो : सोशल मीडिया
त्रिफला

रोजाना सोने से पहले त्रिफला का चूर्ण एक चुटकी खाएं। इस से मेटाबॉलिज्म को बढ़ावा मिलता है। खून साफ होता है और शरीर डिटॉक्सीफाई होता है।
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लहसुन - फोटो : istock
लहसुन

लिवर की सेहत के लिए लहसुन फायदेमंद है। कई लिवर की बीमारियों के खतरे को भी लहसुन कम कर सकता है। लहसुन लिवर में वसा के संचय को रोकता है। शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है।
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आंवला (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
आंवला

विटामिन सी से भरपूर ये खट्टा फल लिवर को स्वस्थ रखता है। आंवले को आप कच्चा, जूस बनाकर या आंवला पाउडर का सेवन कर सकते हैं। अच्छे परिणामों के लिए खाली पेट आंवला के सेवन करें।
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नोट: यह लेख स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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