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Black Coffee: लिवर की बीमारियों से बचा सकती है ब्लैक कॉफी, पर इसके इन गंभीर नुकसान भी जान लीजिए

Fri, 07 Feb 2025 09:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जॉन्स हॉप्किंस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमित रूप से अगर आप दो-तीन कप कॉफी पीते हैं तो इससे लिवर की बीमारियों का तो खतरा कम होता है, पर क्या आप इसके साइड-इफेक्ट्स जानते हैं?
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ब्लैक कॉफी के साइड इफेक्ट्स - फोटो : Freepik.com
क्या आप भी कॉफी पीने के शौकीन हैं? दिन की शुरुआत चाय-कॉफी के साथ होती है? तो इससे होने वाले फायदे और नुकसान को भी जान लीजिए।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कॉफी से स्वास्थ्य संबंधी लाभ चाहते हैं तो दूध वाली कॉफी के बजाय ब्लैक कॉफी पीने की आदत बनाइए। ब्लैक कॉफी के कई फायदे हो सकते हैं, अध्ययनों में इसे मूड में सुधार करने, ध्यान केंद्रित करने और कैंसर का जोखिम कम करने के लिए फायदेमंद पाया गया है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं, जो उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में मदद देते हैं और आप स्वस्थ और लंबी आयु पा सकते हैं। 

कुछ शोध बताते हैं कि अगर नियमित रूप से संयमित मात्रा में ब्लैक कॉफी पीने की आदत बना लेते हैं तो ये लिवर से संबंधित कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करने में काफी मददगार हो सकती है। पर ध्यान रखने वाली बात ये भी है कि ब्लैक कॉफी का अधिक या लगातार सेवन आपके लिए नुकसानदायक भी हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहना चाहिए।
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ब्लैक कॉफी पीने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.comAl
ब्लैक कॉफी से लिवर की बीमारियों से होता है बचाव

ब्लैक कॉफी पीना सेहत के लिए कई प्रकार से फायदेमंद है। जॉन्स हॉप्किंस की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि नियमित रूप से अगर आप दो-तीन कप कॉफी पीते हैं तो इससे लिवर की बीमारियों का तो खतरा कम होता ही है, साथ ही इसे मस्तिष्क से संबंधित कई प्रकार की बीमारियों से बचाने वाली भी पाई गई है। कॉफी में कई प्रकार के प्रभावी एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जिनसे गंभीर क्रोनिक बीमारियों के जोखिम से भी बचाव किया जा सकता है। 

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार कॉफी पीने से मूड अच्छा रहता है और यह अवसाद के जोखिम को कम कर सकती है। ब्रेन को हेल्दी रखने के लिए इसको आहार का हिस्सा बनाएं।
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ज्यादा कॉफी पीने से बचें - फोटो : Freepik.com
सीमित मात्रा में ही पीनी चाहिए कॉफी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कॉफी पीने के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, हालांकि ध्यान रखने वाली बात ये है कि बिना दूध और चीनी वाली कॉफी पिएं। इसके अलावा कॉफी का सेवन सीमित मात्रा में (2-3 कप प्रतिदिन) ही किया जाना चाहिए। अधिक मात्रा में कैफीन का सेवन नींद, चिंता, और दिल की धड़कन बढ़ाने जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।

अगर आपको लगता है आपको कॉफी पीने की लत हो गई है तो इसमें सुधार कर लें। अधिक मात्रा में कॉफी पीने के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं।

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आपको भी तो नहीं लग गई है कॉफी की लत? - फोटो : istock
आपको भी तो नहीं हो गई है ब्लैक कॉफी की लत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, काम के दौरान ताजगी के लिए ब्लैक कॉफी की लत पड़ गई है या दिन में कई कप कॉफी पी जाते हैं तो सतर्क होने की जरूरत है। शरीर और दिमाग को तुरंत ऊर्जा देने वाली ब्लैक कॉफी का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

ब्लैक कॉफी में कैफीन होती है, ऐसे में लगातार सेवन से शरीर को कैफीन की आवश्यकता महसूस होने लगती है, जो एक तरह का नशा की तरह है। शरीर में कैफीन की अधिक मात्रा अनिंद्रा का कारण बन सकती है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। इतना ही नहीं ये पेट में जलन या गैस की दिक्कतें भी बढ़ाने वाली हो सकती है। 
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कॉफी के क्या दुष्प्रभाव हैं? - फोटो : Freepik.com
ज्यादा कॉफी के ये नुकसान भी जान लीजिए
  • कैफीन की अधिक मात्रा से तनाव और चिंता बढ़ सकती है। 
  • बहुत अधिक कैफीन का सेवन करने से दिल की धड़कन तेज हो सकती है। ऐसे में उच्च रक्तचाप और दिल के मरीजों को इसके अधिक सेवन से बचना चाहिए। 
  • लिवर के लिए कॉफी को फायदेमंद पाया गया है पर अगर आप इसका अधिक सेवन करने लगते हैं तो ये किडनी और लिवर की समस्या बढ़ाने लगती है।
  • गर्भवती महिलाओं को भी ज्यादा कैफीन के सेवन से बचना चाहिए। यह भ्रूण के विकास को प्रभावित कर सकता है।
  • ज्यादातर शोध बताते हैं कि एक दिन में 2-3 कप से ज्यादा ब्लैक कॉफी नहीं पीनी चाहिए।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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