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Hand Feet Numbness: हाथ-पैर सुन्न होना कब सामान्य और कब खतरे की घंटी? आप भी हैं परेशान तो जरूर जानिए ये बातें

Sat, 08 Aug 2026 09:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हाथ-पैर सुन्न होने या झुनझुनी महसूस होने की स्थिति को पेरेस्थीसिया कहा जाता है। यह तब होती है जब त्वचा या अंगों तक संवेदना पहुंचाने वाली नसों पर दबाव पड़ता है, उनमें चोट लगती है या वे किसी बीमारी के कारण ठीक से काम नहीं कर पातीं। 
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पैरों में होने वाली समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या आपको भी सुबह उठने पर हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी जैसा महसूस होता है? आमतौर पर लोग इस समस्या को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। वैसे तो हर बार यह चिंता की बात भी नहीं होती, लेकिन अगर यह समस्या बार-बार होने लगे या लंबे समय तक बनी रहे तो इसपर गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत होती है। कई बार छोटी सी लगनी वाली ये दिक्कत बड़ी समस्याओं का संकेत भी हो सकती है।

हाथ-पैर सुन्न होने या झुनझुनी महसूस होने की स्थिति को मेडिकल भाषा में पैरेस्थीसिया कहा जाता है। जब त्वचा या अंगों तक संवेदना पहुंचाने वाली नसों पर किसी कारण से दबाव पड़ता है, तो ये समस्या महसूस हो सकती है। कई बार लंबे समय तक गलत मुद्रा या पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने से भी ये समस्या हो सकती है। ऐसी स्थिति में दबाव हटते ही रक्त प्रवाह और नसों का काम सामान्य होने लगता है और समस्या अपने आप ठीक हो जाती है।

लेकिन यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के बार-बार हाथ-पैर सुन्न हो रहे हैं, झुनझुनी लगातार बनी रहती है या शरीर के केवल एक हिस्से में अचानक सुन्नपन महसूस होता है, तो इसकी तुरंत जांच करा लें। आइए जानते हैं कि कब ये समस्या खतरे भी घंटी हो सकती है?
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पैरों में झनझनाहट की समस्या - फोटो : Freepik.com
हाथ-पैर सुन्न क्यों होते हैं?

हाथ-पैर सुन्न होने की समस्या आमतौर पर शरीर के पेरिफेरल नर्वस सिस्टम, रीढ़ की हड्डी या मस्तिष्क से जुड़े तंत्रिका तंत्र में किसी गड़बड़ी के कारण हो सकती है।
 
  • जब नसों पर दबाव पड़ता है या उनमें रक्त की आपूर्ति कुछ समय के लिए कम हो जाती है, तब मस्तिष्क तक संदेश ठीक से नहीं पहुंच पाते और हाथ या पैर सुन्न महसूस होने लगते हैं। 
  • अधिकांश मामलों में यह कुछ मिनटों में ठीक हो जाता है, लेकिन यदि समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो यह नसों को नुकसान का संकेत भी हो सकता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ न्यूरोलॉजी के अनुसार, यदि सुन्नपन बार-बार हो या लगातार बढ़ रहा हो तो इसकी जांच जरूरी होती है। कई बार ये किसी गंभीर बीमारी के कारण भी हो सकती है।
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हाथ-पैर सुन्न होना - फोटो : Freepik.com
कब सामान्य मानी जाती है ये समस्या?

हर बार हाथ-पैर सुन्न होना हमेशा किसी बीमारी का संकेत नहीं होता। आमतौर पर नसों पर दबाव पड़ने के कारण ये दिक्कत हो सकती है। 
 
  • लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने, पैर पर पैर चढ़ाकर बैठने या सिर के नीचे हाथ रखकर सोने के कारण आपको ऐसी दिक्कत हो सकती है। 
  • इन स्थितियों में नस और रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ता है, जिससे कुछ समय के लिए संवेदना कम हो जाती है।
  • हालांकि जैसे ही आप अपनी स्थिति बदलते हैं और दबाव हटता है, इससे रक्त संचार सामान्य होने लगता है और कुछ मिनटों में झुनझुनी व सुन्नपन खत्म हो जाती है।
  •  यह शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया मानी जाती है और आमतौर पर किसी इलाज की जरूरत नहीं होती।

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न्यूरोलॉजिकल समस्याएं - फोटो : Freepik.com
कब बन सकती है खतरे की घंटी?

हाथ-पैर सुन्न होना तब गंभीर माना जाता है जब यह अचानक शुरू हो, लंबे समय तक बना रहे या इसके साथ अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण भी दिखाई दें। 
 
  • यदि शरीर के केवल एक तरफ हाथ और पैर अचानक सुन्न हो जाएं, बोलने में कठिनाई हो, देखने में दिक्कत आए या संतुलन बिगड़ जाए, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है क्योंकि स्ट्रोक में हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
  • इसी तरह यदि सुन्नपन के साथ मांसपेशियों में कमजोरी, चलने में कठिनाई हो, गर्दन-पीठ में तेज दर्द हो तो यह रीढ़ की हड्डी, नसों या मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
  • यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज है और उसके हाथ-पैर लगातार सुन्न रहते हैं, तो यह डायबिटिक न्यूरोपैथी का लक्षण हो सकता है।
  • विटामिन बी12 की कमी,  थायरॉयड या कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां भी ऐसी समस्या पैदा कर सकती हैं।
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न्यूरोलॉजिकल बीमारी और इसके लक्षण - फोटो : Freepil.com
मल्टीपल स्केलेरोसिस में भी होती है ये दिक्कत

मल्टीपल स्केलेरोसिस एक ऑटोइम्यून न्यूरोलॉजिकल बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मस्तिष्क और रीढ़ की नसों की सुरक्षात्मक परत पर अटैक कर देती है।
 
  • इस बीमारी के शुरुआती लक्षणों में हाथ-पैर सुन्न होने-झुनझुनी, धुंधला दिखने, संतुलन बिगड़ने और मांसपेशियों में कमजोरी जैसी दिक्कत होती है। 
  • कई बार लक्षण कुछ दिनों तक रहते हैं और फिर कम हो जाते हैं, जिससे मरीज इन्हें नजरअंदाज कर देता है।

अचानक चक्कर आना या सिर घूमना किन बीमारियों का संकेत हो सकता है जानने के लिए यहां क्लिक करें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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