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Diabetes Control: 'डायबिटीज किलर' मानी जाती हैं ये पत्तियां, टाइप-1 और टाइप 2 दोनों में देखे गए इसके लाभ

Sun, 29 Jun 2025 07:52 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कई अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डायबिटीज किलर पत्तियों के बारे में बताया है जिन्हें शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में बहुत फायदेमंद पाया गया है। 
  • गुड़मार की पत्तियों को न सिर्फ टाइप-2 बल्कि टाइप 1 डायबिटीज में भी लाभाकारी पाया गया है।
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डायबिटीज में कैसे पाएं आराम - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज एक गंभीर बीमारी है जिसका खतरा सभी उम्र के लोगों में देखा जा रहा है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण होने वाली ये बीमारी 20 से कम उम्र वालों में भी बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, डायबिटीज (हाई ब्लड शुगर) की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका ठीक से उपचार न हो पाए तो समय के साथ आंखों, किडनी, मेटाबॉलिज्म, हृदय से संबंधित समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। यही कारण है कि कम उम्र से ही सभी लोगों को शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने के लिए उपाय करने की सलाह दी जाती है।

अगर आपके परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की दिक्कत रही है तो आपको बचाव को लेकर और भी सावधान हो जाना चाहिए। खान-पान में सुधार, कुछ प्रकार के घरेलू उपायों और दवाओं की मदद से न सिर्फ डायबिटीज से बचा जा सकता है, बल्कि इसके कारण होने वाले जोखिमों को भी कम किया जा सकता है।

कई अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने डायबिटीज किलर पत्तियों के बारे में बताया है जिन्हें शुगर के स्तर को नियंत्रित करने में बहुत फायदेमंद पाया गया है। 
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गुड़मार की पत्तियों के लाभ - फोटो : Freepik.com
गुड़मार की पत्तियों के लाभ

वैसे तो नीम, तुलसी और करी पत्तों के सेवन को भी ब्लड शुगर की समस्या को कम करने वाला बताया जाता रहा है। पर कई शोध गुड़मार की पत्तियों को इसमें बहुत कारगर बताते हैं। 
 
जिमनेमा सिल्वेस्ट्रे जिसे गुड़मार के नाम से भी जाना जाता है, वैज्ञानिक इसे न सिर्फ टाइप-2 बल्कि टाइप 1 डायबिटीज के खतरे को कम करने में भी लाभकारी बताते हैं। इसका उपयोग आयुर्वेद में 2,000 से अधिक वर्षों से औषधीय रूप से किया जाता रहा है। इसकी पत्ती के पाउडर या अर्क दोनों का इस्तेमाल डायबिटीज की समस्या में करने को फायदेमंद बताया गया है।
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डायबिटीज को कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : Freepik.com
जिम्नेमिक एसिड बनाता है इसे खास

डायबिटीज वालों के लिए गुड़मार कैसे फायदेमंद हो सकता है, इसे समझने के लिए वैज्ञानिकों ने अध्ययन किया। शोध में पाया गया इस पौधे में मौजूद प्रमुख सक्रिय यौगिकों में से एक जिम्नेमिक एसिड इसे शुगर के मरीजों के लिए फायदेमंद बनाते हैं। मीठी चीजों के सेवन से पहले इसके सेवन से, जिम्नेमिक एसिड आपके टेस्ट बड्स पर शुगर के रिसेप्टर्स को अवरुद्ध कर देता है। यह मिठास का स्वाद लेने की क्षमता को कम कर देता है, जिससे मीठा खाना कम आकर्षक लगता है।

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जिम्नेमा का शुगर में लाभ - फोटो : Freepik.com
अध्ययनों में क्या पता चला?

जिम्नेमा की रक्त शर्करा को कम करने की क्षमता पर वैज्ञानिक प्रमाण अभी तक पर्याप्त नहीं हैं, लेकिन ज्यादातर अध्ययन संकेत देते हैं कि इससे शुगर के मरीजों को काफी लाभ मिल सकता है। इसी संबंध में साल 2001 में किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि जिम्नेमिक एसिड, आंतों में भी इन रिसेप्टर्स को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे शरीर में चीनी का अवशोषण कम हो जाता है। इसके चलते भोजन के बाद रक्त शर्करा का स्तर बढ़ने नहीं पाता।
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डायबिटीज को कंट्रोल करने के लिए क्या उपाय करें? - फोटो : Adobe stock
ये सावधानियां भी जरूरी
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो गुड़मार ज्यादातर लोगों के लिए सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, इसका इस्तेमाल गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली महिलाओं या बच्चों को नहीं करना चाहिए। ये मधुमेह की दवा का विकल्प भी नहीं है, इसका इस्तेमाल बिना डॉक्टर की सलाह के करना ठीक नहीं है।

जिन लोगों की पहले से शुगर की दवा चल रही है उन्हें इस तरह के किसी भी उपाय को प्रयोग में लाने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। खुद से इसका इस्तेमाल कई बार दवाओं के साथ रिएक्ट भी कर सकता है।


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स्रोत
A systematic review of Gymnema sylvestre in obesity and diabetes management


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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