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Health Tips: हार्ट अटैक का खतरा पहचानने के लिए कराएं ये 6 जांच, दिल की बीमारियों से मिलेगी सुरक्षा

Tue, 02 Sep 2025 08:03 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आज के समय में हार्ट अटैक की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है। ऐसे में बहुत से लोगों में जेहन में सवाल उठता है कि दिल के स्वास्थ्य का जांच करने के लिए कौन सा टेस्ट करना चाहिए। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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हार्ट, हार्ट अटैक - फोटो : Freepik.com
Which Tests Should be Done For Heart Disease: आज की बदलती जीवनशैली में हृदय रोग एक गंभीर समस्या बनकर उभरा है, जो न सिर्फ बुजुर्गों को, बल्कि युवाओं को भी प्रभावित कर रहा है। हार्ट अटैक का मुख्य कारण दिल की धमनियों में फैट का जमना है, जिससे रक्त प्रवाह बाधित होता है। अक्सर लोग दिल की बीमारी के शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे स्थिति गंभीर हो जाती है। 

लेकिन, कुछ जरूरी जांचें करवाकर हम दिल की सेहत का पता लगा सकते हैं और हार्ट अटैक के खतरे को समय रहते पहचान सकते हैं। ये जांचें एक तरह से दिल के स्वास्थ्य की 'रिपोर्ट' होती हैं, जो हमें बताती हैं कि हमारा दिल कितना स्वस्थ है। आइए इस लेख में ऐसी 6 महत्वपूर्ण जांचों के बारे में जो दिल से संबंधित बीमारियों के खतरे को पहले ही बता सकती हैं और आपके दिल के स्वास्थ्य को सुरक्षा दे सकती हैं।
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हृदय रोग, हार्ट अटैक - फोटो : adobe stock photos
इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी)
ईसीजी दिल के स्वास्थ्य की सबसे पहली और बुनियादी जांच है। यह दिल की धड़कन और इलेक्ट्रिक एक्टिविटी को रिकॉर्ड करती है। अगर आपकी दिल की धड़कन अनियमित है, तो ईसीजी से इसका पता लगाया जा सकता है। यह टेस्ट दिल के दौरे के दौरान या बाद में होने वाली क्षति का पता लगाने में भी मदद करता है।

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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Freepik.com
2D इकोकार्डियोग्राफी (2D ECHO)
यह एक तरह का अल्ट्रासाउंड टेस्ट है जो दिल की संरचना और कार्य को दिखाता है। 2D ECHO से यह पता लगाया जाता है कि दिल के वॉल्व और चैम्बर ठीक से काम कर रहे हैं या नहीं। यह दिल की पम्पिंग क्षमता और किसी भी संरचनात्मक असामान्यता को पहचानने में बहुत मददगार होता है।

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हार्ट अटैक - फोटो : Freepik.com
ट्रेडमिल टेस्ट (टीएमटी)
ट्रेडमिल टेस्ट, जिसे स्ट्रेस टेस्ट भी कहते हैं, यह पता लगाता है कि आपका दिल शारीरिक तनाव के दौरान कैसा प्रदर्शन करता है। इस टेस्ट में आपको एक ट्रेडमिल पर चलना होता है, जिसकी गति और ढलान को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है, इसी दौरान डॉक्टर आपकी ईसीजी और ब्लड प्रेशर की निगरानी करते हैं। यह दिल की छिपी हुई समस्याओं को उजागर कर सकता है जो आराम की स्थिति में नहीं दिखतीं है।
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कार्डियक बायोमार्कर्स (प्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik.com
कार्डियक बायोमार्कर्स
जब दिल को नुकसान पहुंचता है, तो खून में कुछ खास प्रोटीन और एंजाइम निकलने लगते हैं। ट्रोपोनिन और क्रिएटिन काइनेज (CK-MB) जैसे बायोमार्कर्स का बढ़ा हुआ स्तर यह संकेत देता है कि दिल की मांसपेशियों को नुकसान पहुंचा है। हार्ट अटैक के बाद इस टेस्ट को बार-बार किया जाता है ताकि नुकसान की गंभीरता का पता लगाया जा सके।
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इंफ्लेमेटरी मार्कर्स (प्रतिकात्मक तस्वीर) - फोटो : Freepik.com
इंफ्लेमेटरी मार्कर्स
शरीर में सूजन भी दिल की बीमारियों का एक प्रमुख कारण है। सी-रिएक्टिव प्रोटीन (CRP) जैसे इंफ्लेमेटरी मार्कर्स का बढ़ा हुआ स्तर यह बताता है कि शरीर में कहीं सूजन है, जो दिल के दौरे के खतरे को बढ़ा सकती है। यह टेस्ट दिल की बीमारी के खतरे का आकलन करने में मदद करता है।
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खून - फोटो : Freepik.com
लिपिड प्रोफाइल और ब्लड शुगर
इन दोनों जांचों का सीधा संबंध दिल के स्वास्थ्य से है। लिपिड प्रोफाइल (कोलेस्ट्रॉल) बताता है कि शरीर में गुड और बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर क्या है। ब्लड शुगर (ग्लूकोज) की जांच से डायबिटीज का पता चलता है, जो दिल की बीमारियों का एक बड़ा जोखिम कारण है। इन दोनों का सही स्तर बनाए रखना दिल को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरूरी है। ये सभी जांच कराने से पहले अपने डॉक्टर से एक बार जरूर सलाह लें और जांच के रिपोर्ट्स को किसी चिकित्सक से ही दिखाएं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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