किडनी ट्रांसप्लांटेशन
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पहले पूरा मामला जान लीजिए
अमेरिका में 66 वर्षीय टिम एंड्रयूज की टाइप-2 डायबिटीज के कारण किडनी की बीमारी लास्ट स्टेज में पहुंच चुकी थी। उनके लिए तत्काल इंसानी किडनी मिलने की संभावना बेहद कम थी और डायलिसिस के साथ लंबा इंतजार करना भी जोखिम भरा था। फिर डॉक्टरों ने एक ऐसा फैसला लिया, जो कुछ साल पहले तक किसी साइंस फिक्शन फिल्म की कहानी जैसा लगता।
- जनवरी 2025 में एंड्रयूज के शरीर में एक सुअर की किडनी ट्रांसप्लांट की गई। वैज्ञानिकों ने उस सुअर के आनुवंशिक ढांचे में 69 बदलाव किए, ताकि उसका अंग इंसानी शरीर के लिए अनुकूल बनाया जा सके और संक्रमण तथा अंग के रिजेक्ट होने का खतरा कम हो।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि यह किडनी करीब 271 दिनों तक काम करती रही और इस दौरान एंड्रयूज लगभग नौ महीने तक बिना डायलिसिस के स्वस्थ रहे। इस दौरान वह खाना बना सकते थे, घर की सफाई कर सकते थे। उनके लिए यह सिर्फ एक मेडिकल प्रयोग नहीं था, बल्कि लंबे समय बाद सामान्य जिंदगी में लौटने का मौका था।
बाद में लगाई गई इंसान की किडनी
हालांकि छह महीने बाद सुअर की किडनी की रक्त वाहिकाओं में कुछ डैमेज दिखना शुरू हुआ और कुछ समय बाद उसे शरीर से निकालना पड़ा। इसके बाद एंड्रयूज को स्वस्थ रखने के लिए डॉक्टरों को फिर से डायलिसिस का सहारा लेना पड़ा। इस बीच एक इंसानी डोनर की किडनी मिल गई, जो ट्रांसप्लांट होने के छह महीने बाद अब अच्छी तरह काम कर रही है।
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि सुअर की किडनी को डॉक्टरों ने एक ब्रिज ट्रांसप्लांट यानी पुल की तरह इस्तेमाल किया। मसलन सुअर की किडनी ने जिंदगी को उस समय तक संभाले रखा, जब तक इंसानी किडनी उपलब्ध नहीं हो गई। अब सवाल उठने लगे हैं कि क्या आने वाले समय में किडनी ट्रांसप्लांट के लंबे इंतजार से परेशान मरीजों के लिए सुअर की किडनी अस्थायी सहारा बन सकती है?
एंड्रयूज इसे 'चमत्कार' बताते हैं। उनका कहना था कि इस ट्रांसप्लांट के बाद उन्हें ऐसा लगा जैसे फिर से नई जिंदगी मिल गई हो।