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सेहत की बात: बीमारी चुपचाप बढ़ रही हो तो ये टेस्ट खोल सकते हैं राज, हर साल कराएं ये चार जांच

Thu, 01 Oct 2026 09:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

30 साल की उम्र के बाद नियमित स्वास्थ्य जांच जरूरी है। सीबीसी, ब्लड शुगर, थायरॉयड और लिवर फंक्शन जैसी जांचें शरीर में कई गड़बड़ियों के शुरुआती संकेत पहचानने में मदद कर सकती हैं। 
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सेहत की जांच - फोटो : Amarujala.com/AI
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि समय रहते कुछ स्वास्थ्य समस्याओं का उचित निदान और इलाज हो जाए तो बीमारियों को गंभीर रूप लेने से रोका जा सकता है। यही कारण है कि सभी लोगों को सालान स्तर पर पूरे शरीर की जांच जरूर करा लेनी चाहिए, ऐसा करके स्वास्थ्य समस्याओं का समय रहते सही निदान करना आसान हो जाता है। स्क्रीनिंग टेस्ट के माध्यम से लक्षण दिखाने शुरू होने से पहले ही बीमारियों का पता लगा सकते हैं, जिससे आपको निवारक उपाय करने में मदद मिलती है।

विशेषज्ञों के मुताबिक 30 साल की उम्र के बाद स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति की उम्र, फैमिली हिस्ट्री, पहले से मौजूद बीमारियों और डॉक्टर की सलाह के आधार पर छह महीने से एक साल के अंतराल में जरूरी जांच कराई जा सकती हैं। 

आइए जानते हैं कि आपके लिए कौन-कौन से जांच जरूरी हैं? और इससे किन समस्याओं का निदान किया जा सकता है?
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खून की जांच - फोटो : Freepik.com
कंप्लीट ब्लड काउंट टेस्ट जरूरी

कंप्लीट ब्लड काउंट यानी सीबीसी एक सामान्य रक्त जांच है, जिसमें खून का सैंपल लेकर रक्त की अलग-अलग कोशिकाओं की स्थिति देखी जाती है। इसमें लाल रक्त कोशिकाओं और सफेद रक्त कोशिकाओं समेत कई रक्त अवयवों की जांच होती है।
 
  • लाल रक्त कोशिकाएं शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक ऑक्सीजन पहुंचाने में मदद करती हैं, जबकि सफेद रक्त कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
  • सीबीसी की मदद से एनीमिया, संक्रमण और रक्त से जुड़ी कुछ अन्य असामान्यताओं का पता लगाने में मदद मिल सकती है। 
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थायरॉइ़ड - फोटो : Adobe Stock
थायरॉइ़ड की जांच

थायरॉइ़ड शरीर में कई महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने वाले हार्मोन बनाता है। इसका सीधा संबंध शरीर के मेटाबॉलिज्म, विकास और कई दूसरे शारीरिक कार्यों से होता है। थायरॉयड में गड़बड़ी होने पर शरीर के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है।
 
  • थायरॉइ़ड फंक्शन टेस्ट यानी टीएफटी में आमतौर पर टीएसएच जैसे हार्मोन की जांच की जाती है। 
  • इससे थायरॉइ़ड के कम या ज्यादा सक्रिय होने जैसी स्थितियों का आकलन करने में डॉक्टर को मदद मिलती है। 
  • महिलाओं में थायरॉइ़ड संबंधी समस्याएं अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती हैं। 

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डायबिटीज की जांच - फोटो : Adobe Stock
ब्लड शुगर की जांच क्यों जरूरी है?

डायबिटीज लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी रह सकती है। यही वजह है कि रक्त में ग्लूकोज की जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। ब्लड शुगर टेस्ट से यह पता लगाने में मदद मिलती है कि रक्त में शुगर का स्तर सामान्य है या बढ़ा हुआ है?
 
  • डॉक्टर स्थिति के अनुसार फास्टिंग शुगर, भोजन के बाद की शुगर या एचबीए1सी जैसी जांच कराने की सलाह दे सकते हैं।
  • भोजन के दो घंटे बाद 200 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर या उससे अधिक रक्त शर्करा का स्तर डायबिटीज की ओर संकेत कर सकता है।
  •  लंबे समय तक बढ़ी हुई ब्लड शुगर आंखों, किडनी, नसों और हृदय समेत कई अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। इसलिए समय पर पहचान और नियंत्रण जरूरी है।
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लिवर की जांच - फोटो : adobe stock images
लिवर फंक्शन टेस्ट से जानें लिवर की सेहत

लिवर शरीर के कई जरूरी काम करता है। यह भोजन से जुड़े पोषक तत्वों के प्रोसेस करने, शरीर से कुछ अपशिष्ट पदार्थों को हटाने और कई महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाने में भूमिका निभाता है। इसलिए लिवर की कार्यक्षमता में गड़बड़ी होने पर इसका असर पूरे शरीर पर पड़ सकता है।

लिवर फंक्शन टेस्ट यानी एलएफटी में खून के सैंपल की जांच करके कुछ एंजाइम, प्रोटीन और अन्य संकेतकों का स्तर देखा जाता है। इस टेस्ट के माध्यम से हेपेटाइटिस जैसी बीमारी के साथ यह जानने में मदद मिलती है कि लिवर सही तरीके से काम कर रहा है या नहीं?



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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