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अध्ययन: ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करने वालों में डेमेंशिया का खतरा अधिक, कहीं आप भी तो नहीं करते हैं सेवन?

Sat, 25 Dec 2021 07:31 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डेमेंशिया के खतरे को पहचानिए - फोटो : Pixabay
हाल के वर्षों में जिन मानसिक रोग के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिली है, डेमेंशिया उनमें से एक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक हमारे खान-पान और जीवनशैली का हमारे स्वास्थ्य पर असर पड़ता है। हाल में वर्षों में ज्यादातर लोगों में बिगड़ी इन दोनों आदतों के कारण डेमेंशिया का निदान कम उम्र वाले लोगों में भी हो रहा है। डेमेंशिया, मानसिक रोगों की एक गंभीर समस्या है जिसमें लोगों में कमजोर याददाश्त, भाषा को समझने, समस्याओं का समाधान कर पाने और सोचने की क्षमता से संबंधित दिक्कतें हो सकती हैं।

अध्ययनों से पता चलता है कि हमारे पर्यावरण, जीवन-शैली की खराब आदतों और खान-पान में गड़बड़ी के कारण मानसिक रोगों का खतरा पहले की तुलना में अधिक बढ़ गया है। वैसे तो डेमेंशिया के लिए आनुवंशिकी, आयु जैसे कई कारकों को जिम्मेदार माना जा सकता है, इसमें भी भोजन की गड़बड़ी के कारण समस्या बढ़ जाती है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आखिर किस प्रकार के भोजन के कारण लोगों में डेमेंशिया का खतरा बढ़ रहा है। 
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मानसिक स्वास्थ्य का रखें ख्याल - फोटो : Pixabay
आहार और मानसिक स्वास्थ्य
वैसे तो आम धारणा है कि शारीरिक रूप से स्वस्थ रहने के लिए स्वस्थ भोजन करना आवश्यक है, पर वास्तव में यह हमारे मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी उतना ही महत्वपूर्ण है। अध्ययनों से पता चलता है कि जंक फूड और भोजन में पोषक तत्वों की कमी के कारण चिंता, तनाव और अवसाद का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह, अस्वास्थ्यकर भोजन की आदतें डेमेंशिया के खतरे को भी बढ़ा देती हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट का ज्यादा सेवन करने वाले लोगों में डेमेंशिया का खतरा अधिक हो सकता है। 
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खान-पान का विशेष ध्यान रखना आवश्यक - फोटो : iStock
रिफाइंड कार्ब्स का अधिक सेवन है नुकसानदेय
रिफाइंड कार्ब्स, शरीर में ग्लूकोज के स्तर को बढ़ा देते हैं इसलिए इसे संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक अन्य प्रकार के कार्ब्स की तुलना में रिफाइंड कार्ब्स तेज़ी से ग्लूकोज में बदल जाते हैं। यह ब्लड शुगर के स्तर में भारी उतार-चढ़ाव का कारण बनते हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि समय के साथ रक्त शर्करा के स्तर में लगातार उतार-चढ़ाव से डेमेंशिया और टाइप 2 मधुमेह, दोनों का खतरा बढ़ जाता है।

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मानसिक स्वास्थ्य पर दें ध्यान - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं अध्ययन?
न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि ग्लूकोज के कारण हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा एक अन्य अध्ययन से पता चलता है कि मधुमेह के रोगियों में अन्य लोगों की तुलना में डेमेंशिया होने का खतरा अधिक होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि बहुत अधिक मात्रा में चीनी का सेवन करने वाले लोगों में मधुमेह के बिना भी डेमेंशिया का खतरा हो सकता है। अधिक चीनी का सेवन मस्तिष्क के स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।
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स्वस्थ और पौष्टिक आहार का करें सेवन - फोटो : iStock
खान-पान पर विशेष ध्यान रखने की जरूरत
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डेमेंशिया के खतरे से बचे रहने के लिए हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले भोजन और रिफाइंड कार्ब्स से परहेज करना चाहिए। इसके अलावा रिफाइंड आटे से बने उत्पादों जैसे ब्रेड, पास्ता, पिज्जा, कुकीज का भी सेवन कम से कम करें। इसकी जगह पर साबुत अनाज और फाइबर युक्त भोजन को खाना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। प्लेट में अधिक से अधिक सब्जियों, फल और फलियां को शामिल करें।


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स्रोत और संदर्भ
Glucose Levels and Risk of Dementia

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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