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कोरोना काल में तनाव और डिप्रेशन से बचना है तो खाएं ये चीजें, मूड रहेगा हमेशा बेहतर

Mon, 17 May 2021 12:01 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खाने से रखें मूड को अच्छा - फोटो : pixabay
कोरोना वायरस संक्रमण के तेजी से बढ़ते मामले और दूसरी लहर में हो रही मौत की खबरों को सुनकर ज्यादातर लोगों को इस समय तनाव और चिंता महसूस हो रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि कोविड के इस दौर में हम सभी को शारीरिक और मानसिक दोनों ही तरह से खुद का ख्याल रखना बेहद जरूरी है। ऐसे में सवाल आता है कि इस नकारात्मक माहौल में अपने मूड को सही कैसे रखा जा सकता है?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि हमारे खान-पान और मूड के बीच गहरा संबध होता है। मूड को स्थिर रखने वाले सेरोटोनिन हार्मोन का 90 फीसदी अंश आंत में उत्पन्न होता है। इसके बाद यह न्यूरोट्रांसमीटर के माध्यम से हमारे मस्तिष्क तक पहुंचता है। ऐसे में सेरोटोनिन उत्पादन को बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन मूड को ठीक रखने में काफी हद तक सहायक माना जाता है। आइए आहार विशेषज्ञों से जानते हैं कोरोना के समय में किन खाद्य पदार्थों का सेवन करके मूड को अच्छा रखा जा सकता है?
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कई रसायन मूड अच्छा करने में सहायक होते हैं - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी पोषक तत्व
आहार और पोषण विशेषज्ञ कविता रस्तोगी कहती हैं, 'कोरोना के समय में यदि आप अवसाद महसूस कर रहे हैं तो आपको ज्यादा से ज्यादा मात्रा में फलों का सेवन करना चाहिए। ओमेगा -3, जिंक, विटामिन बी-12, मैग्नीशियम, प्रोबायोटिक्स, एंटीऑक्सिडेंट, विटामिन डी और आयरन, मस्तिष्क के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व माने जाते हैं। आप रोजाना दो केले खा सकते हैं, इसमें ट्रिप्टोफेन होता है जो सेरोटोनिन में परिवर्तित होकर मूड को ठीक रखने में सहायक हो सकता है।
इसके अलावा आगे की स्लाइडों में बताए जा रहे खाद्य पदार्थों के सेवन से भी मूड को ठीक रखने में मदद मिल सकती है। 
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तनाव कम करता है डार्क चॉकलेट - फोटो : istock
डार्क चॉकलेट
आहार विशेषज्ञ बताते हैं कि डार्क चॉकलेट खाने से आपका मूड अच्छा रहता है साथ ही आप शांत और खुश महसूस करते हैं। डार्क चॉकलेट एंडोर्फिन के उत्पादन को बढ़ा देता है। यह रसायन मस्तिष्क में खुशी और आनंद की भावना उत्पन्न करते हैं। इसके अलावा डार्क चॉकलेट मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाने, सूजन को कम करने और मस्तिष्क को स्वास्थ रखने में भी सहायक है।
 

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नट्स और सीड्स में ट्रिप्टोफैन की होती है अधिकता - फोटो : Social media
नट्स और सीड्स
नट्स और सीड्स में ट्रिप्टोफेन नामक एमिनो एसिड पाया जाता है। यह सेरोटोनिन उत्पादन को बढ़ाने में मदद करता है। कद्दू के बीज, तिल और सूरजमुखी के बीज, बादाम, काजू, मूंगफली, और अखरोट जैसे नट्स एमिनो एसिड के अच्छे स्रोत माने जाते हैं। कोरोना के समय में इनका सेवन मूड को ठीक रखने में सहायक हो सकता है। 
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पालक के फायदे अनेक - फोटो : Pixabay
पालक
मूड को ठीक रखने में पालक का सेवन भी आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। पालक को मैग्नीशियम का बेहतर स्रोत माना जाता है जो सेरोटोनिन को बढ़ाने में मदद करने के साथ मूड को भी ठीक रखता है। जिन लोगों में मैग्नीशियम की कमी होती है, उन्हें डिप्रेशन और घबराहट जैसी दिक्कतें होने का खतरा अधिक होता है। मैग्नीशियम युक्त खाद्य पदार्थ आपको शांत महसूस कराने के अलावा प्रतिरक्षा को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं।
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अंडे में होता है प्रोटीन - फोटो : pixabay
इन खाद्य पदार्थों का करें सेवन
पोषण और आहार विशेषज्ञ गीतांजली नारायण भटनागर बताती हैं, 'कोरोना के समय में ट्रिप्टोफेन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन ज्यादा करना चाहिए। प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अंडे और मुर्गी को ट्रिप्टोफेन का बेहतर स्रोत माना जाता है। ये खाद्य पदार्थ स्वाभाविक रूप से सेरोटोनिन उत्पादन को भी बढ़ाते हैं। इसके अलावा संतरे, नींबू जैसे खट्टे फल और लाल शिमला मिर्च को विटामिन सी से भरपूर माना जाता है जो कि प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मददगार हैं।
 
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प्रोस्स्ड खाद्य पदार्थों के सेवन से करें परहेज - फोटो : Social media
किन चीजों से करें बिल्कुल परहेज
आहार विशेषज्ञ गीतांजली कहती हैं कि कोरोना के समय में उदासी और चिंता से बचे रहने के लिए प्रोसेस्ड मीट, ज्यादा तला हुआ भोजन, कैंडी, पेस्ट्री और उच्च वसा वाले डेयरी उत्पादों का सेवन बहुत कम या न के बराबर करना चाहिए। प्रोसेस्ड खाद्य का ज्यादा सेवन करने से शरीर में विषाक्त का संचय हो सकता है जो सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ देते हैं।

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नोट: यह लेख पोषण और आहार विशेषज्ञ गीतांजली नारायण भटनागर और कविता रस्तोगी के सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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