लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले दो दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि दुनियाभर में नपुंसकता और बांझपन जैसी प्रजनन से संबंधित समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन डिवीजन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत की प्रजनन दर में भी गिरावट देखी गई है, जो 1950 में 5.9 से घटकर 2023 में 2.0 रह गई है। यह आंकड़ा अब रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है, जो दूरगामी प्रभावों वाले जनसांख्यिकीय बदलाव को दर्शाता है।
रिप्लेसमेंट लेवल, प्रजनन दर का मतलब है कि हर पीढ़ी के पास खुद को बदलने के लिए पर्याप्त बच्चे हैं। यदि ये दर 2.1 से नीचे गिरती है (जैसा कि भारत में हुआ है) तो समय के साथ जनसंख्या कम होने लगती है, क्योंकि मरने वाले लोगों की तुलना में कम बच्चे पैदा हो रहे होते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक प्रजनन दर में इस गिरावट के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं, जैसे आर्थिक दबाव, विवाह में देरी और लैंगिक असमानता। डॉक्टरों का मानना है कि इसके लिए जीवनशैली में गड़बड़ी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है।