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चिंताजनक: भारतीय आबादी में घट रही है प्रजनन की दर, जानिए क्या है इसका कारण और आप कैसे रहें सुरक्षित

Wed, 04 Dec 2024 07:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन डिवीजन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत की प्रजनन दर में भी गिरावट देखी गई है, जो 1950 में 5.9 से घटकर 2023 में 2.0 रह गई है। आइए जानते हैं कि आप अपनी प्रजनन क्षमता को ठीक रखने के लिए क्या उपाय कर सकते हैं?
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प्रजनन से संबंधित समस्याएं - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। पिछले दो दशक के आंकड़े उठाकर देखें तो पता चलता है कि दुनियाभर में नपुंसकता और बांझपन जैसी प्रजनन से संबंधित समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। यूनाइटेड नेशन्स पॉपुलेशन डिवीजन के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, भारत की प्रजनन दर में भी गिरावट देखी गई है, जो 1950 में 5.9 से घटकर 2023 में 2.0 रह गई है। यह आंकड़ा अब रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से नीचे है, जो दूरगामी प्रभावों वाले जनसांख्यिकीय बदलाव को दर्शाता है।

रिप्लेसमेंट लेवल, प्रजनन दर का मतलब है कि हर पीढ़ी के पास खुद को बदलने के लिए पर्याप्त बच्चे हैं। यदि  ये दर 2.1 से नीचे गिरती है (जैसा कि भारत में हुआ है) तो समय के साथ जनसंख्या कम होने लगती है, क्योंकि मरने वाले लोगों की तुलना में कम बच्चे पैदा हो रहे होते हैं।

विशेषज्ञों के मुताबिक प्रजनन दर में इस गिरावट के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं, जैसे आर्थिक दबाव, विवाह में देरी और लैंगिक असमानता। डॉक्टरों का मानना है कि इसके लिए जीवनशैली में गड़बड़ी भी एक प्रमुख कारण हो सकती है।
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प्रजनन की समस्या - फोटो : Adobe stock
प्रजनन समस्याओं का क्या कारण है?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अगर आपका स्वास्थ्य और लाइफस्टाइल ठीक नहीं है तो इसके कारण प्रजनन क्षमता पर भी नकारात्मक असर होता है। उदाहरण के लिए, भारत में मोटापा, डायबिटीज, पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) जैसी बीमारियां काफी तेजी से बढ़ती जा रही हैं। इन सभी के कारण भी पुरुषों और महिलाओं दोनों में प्रजनन विकारों का जोखिम बढ़ता जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बढ़ता तनाव, अस्वास्थ्यकर आहार, अपर्याप्त व्यायाम और पर्यावरण में बढ़ती विषाक्तता का भी प्रजनन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है। इसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता है।

आइए जानते हैं कि आप अपनी प्रजनन क्षमता को ठीक रखने के लिए क्या उपाय कर सकते हैं?
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खान पान में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
पौष्टिक रखें अपना आहार

संपूर्ण स्वास्थ्य को ठीक रखने में आहार की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। स्वस्थ और पौष्टिक चीजों का सेवन करना प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देने में भी लाभकारी है। अध्ययनों से पता चलता है कि आहार में ओमेगा-3 फैटी एसिड वाली चीजों को शामिल करके भी लाभ पाया जा सकता है। वसायुक्त मछलियां, अलसी के बीज, चिया सीड्स, अखरोट आदि को आहार का हिस्सा बनाएं। 

इसके साथ आहार में रिफाइंड कार्ब्स की मात्रा कम करें। रिफाइंड कार्ब्स वाली चीजें हाई ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) वाली होती हैं जिसका सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है। सोडा, पेस्ट्री, पास्ता आदि का सेवन कम करें।

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व्यायाम जरूरी - फोटो : Freepik.com
शारीरिक रूप से एक्टिव रहें

व्यायाम के कई स्वास्थ्य लाभ हैं, जिसमें प्रजनन क्षमता को बढ़ावा देना भी शामिल है। नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम की आदत से महिला और पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। व्यायाम की आदत बनाने से वजन कम रहता है और डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याओं का जोखिम भी कम होता है जिसे प्रजनन समस्याओं के लिए जोखिम कारक माना जाता रहा है।
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मोटापा की समस्या - फोटो : Freepik.com
बढ़ने न पाए वजन 

अधिक वजन या मोटापे की समस्या आपके मासिक धर्म चक्र, विशेष रूप से ओव्यूलेशन को प्रभावित करके प्रजनन क्षमता पर नकारात्मक असर डालती है। साल 2020 के शोध से पता चलता है कि शरीर के वजन को 5% कम करने के साथ-साथ लो बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) बनाए रखने से प्रजनन क्षमता बढ़ सकती है। वजन कम रखने से शरीर को कई अन्य बीमारियों से भी बचाया जा सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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