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HIV & AIDS: एचआईवी को लेकर अब चिंता की जरूरत नहीं, बचाव के लिए आ गई 100% प्रभावशीलता वाली वैक्सीन

Tue, 24 Jun 2025 07:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने पहली बार साल में दो बार दिए जाने वाले टीके को मंजूरी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टीके की मदद से संक्रमण की रोकथाम में विशेष मदद मिल सकती है। 
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एचआईवी संक्रमण का खतरा - फोटो : Freepik.com
HIV Vaccine: हाल के दशकों में जिन बीमारियों ने लोगों को सबसे ज्यादा डराया है, एड्स उनमें से एक है।  एचआईवी का संक्रमण, एड्स रोग का कारण बनता है। एक्वायर्ड इम्यूनोडेफिशिएंसी सिंड्रोम (एड्स) को लाइलाज बीमारी माना जाता रहा है पर मेडिकल साइंस में हुई प्रगति और नवीनतम शोधों के चलते अब इससे जान जाने के खतरे को कम किया जा सकता है। हाल के वर्षों में कई प्रभावी दवाएं सामने आई हैं जिनको लेकर शोधकर्ताओं का दावा है कि इनसे इस जानलेवा बीमारी के जोखिमों को कम किया जा सकता है।

एड्स हर साल लाखों लोगों के मौत का कारण बनती है। साल 2023 के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि दुनियाभर में एचआईवी से संबंधित कारणों से लगभग 630,000 लोगों की मृत्यु हुई। अच्छी बात ये है कि 2004 से एड्स से संबंधित मौतों में 69% की कमी आई है। 

एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए अब फूड एण्ड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने पहली बार साल में दो बार दिए जाने वाले टीके को मंजूरी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस टीके की मदद से संक्रमण की रोकथाम में विशेष मदद मिल सकती है। 
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एचआईवी संक्रमण और एड्स का खतरा - फोटो : Adobe Stock
हर साल लाखों लोग होते हैं एचआईवी का शिकार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, साल 2023 में अकेले भारत में अनुमानित 39.9 मिलियन (करीब 4 करोड़) लोग एचआईवी संक्रमण की चपेट में आए। एचआईवी संक्रमण ह्यूमन इम्यूनोडेफिशिएंसी वायरस के कारण होता है। संक्रमण मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संपर्क, सुइयों को साझा करने और गर्भावस्था-प्रसव या स्तनपान के दौरान मां से बच्चे में हो सकता है।


(ये भी पढ़िए- भारत में यहां तेजी से फैल रहा है HIV, इसलिए लोग हो रहे हैं संक्रमण के शिकार)
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एचआईवी संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीनेशन - फोटो : Freepik.com
संक्रमण से बचाव के लिए टीके को मंजूरी

विशेषज्ञों ने कहा, इस टीके की मदद से संक्रमण होने के खतरे को किया जा सकता है। ये मूल रूप से 2012 में एचआईवी से पीड़ित लोगों के लिए एक उपचार के रूप में स्वीकृत की गई दवा है, जिसे लेनाकापाविर के रूप में जाना जाता है।

विशेषज्ञों ने अब एचआईवी की रोकथाम के लिए इसे येज्तुगो नाम से स्वीकृति दी है। वायरस के संपर्क में आने से पहले इससे टीकाकरण हो जाए तो न सिर्फ संक्रमण के खतरे को कम किया जा सकता है बल्कि ये एड्स से भी आपको बचाने में मददगार है।
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एचआईवी से बचाव के लिए वैक्सीनेशन - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

यूएस स्थित एमोरी यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन में संक्रामक रोगों के प्रभाग में प्रोफेसर कार्लोस डेल रियो ने कहा कि साल में सिर्फ दो बार टीका लगवाने से एचआईवी के खतरे को काफी कम करने में मदद मिल सकती है। येज्तुगो एक प्रभावी प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस विकल्प हो सकता है जिसका हम इंतजार कर रहे थे।

अध्ययनों में देखी गई है इसकी प्रभाविकता

दवा की निर्माता कंपनी गिलियड ने कहा कि एफडीए ने दो प्रमुख अध्ययनों के आधार पर येज्तुगो को मंजूरी दी है, जिसमें दिखाया गया है कि यह एचआईवी को रोकने के लिए अब तक दिए जाने वाले कई उपचारों से कहीं अधिक प्रभावी हो सकती है। इसकी प्रभावशीलता दर लगभग 99%  देखी गई है।

एक परीक्षण में, येज्तुगो लेने वाली 2,134 महिलाओं में से किसी को भी एचआईवी नहीं हुआ। साल में दो टीके (छह महीने में एक शॉट) की मदद से संक्रमण से बचाव में लाभ पाया जा सकता है।


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स्रोत
Yeztugo® (Lenacapavir) Is Now the First and Only FDA-Approved HIV Prevention Option Offering 6 Months of Protection


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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