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Father's Day: 60 की उम्र के बाद पिता में कभी भी दिखें ये लक्षण, तुरंत ले जाएं डॉक्टर के पास

Sun, 21 Jun 2026 08:11 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त नींद और समय पर चिकित्सा सलाह स्वस्थ उम्र बढ़ने के महत्वपूर्ण आधार हैं। अपने पिता को स्वस्थ रखने के लिए उनमें कुछ लक्षणों पर निरंतर ध्यान देते रहना चाहिए।
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पिता की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : Amarujala.com/AI
पिता को किसी भी घर की सबसे मजबूत दीवार माना जाता है। हर मुश्किल में परिवार का सहारा बनने वाले, परिवार पर आने वाली किसी भी मुसीबत का एहसास तक न होने देने वाले पिता की सेहत को लेकर आप कितने अलर्ट हैं? आज फादर्स डे है। पिता के त्याग, प्रेम और परिवार के लिए उनके योगदान को सम्मान देने के लिए हर साल जून महीने के तीसरे रविवार को ये खास दिन मनाया जाता है।

फादर्स डे सिर्फ उपहार देने या साथ में तस्वीरें खिंचवाने का मौका नहीं है। यह उस शख्स की सेहत का ध्यान रखने का भी दिन है जिसने पूरी जिंदगी परिवार की जिम्मेदारियां निभाईं। बढ़ती उम्र के साथ हृदय रोग, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और प्रोस्टेट संबंधी समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। अच्छी बात यह है कि इनमें से कई बीमारियों के शुरुआती संकेत समय रहते पहचान लिए जाएं तो इलाज आसान हो जाता है।

अगर आपके पिता की भी उम्र 50 से अधिक हो रही है तो उनमें कुछ लक्षणों का निरंतर गंभीरता से ध्यान देते रहिए। ये उन्हें किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचाने में मदद कर सकता है, ये आपके पिता के लिए सबसे अच्छा गिफ्ट भी होगा।
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नियमित हेल्थ चेकअप जरूरी - फोटो : Freepik.com
60 के बाद नियमित जांच जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, शारीरिक सक्रियता, पर्याप्त नींद और समय पर डॉक्टरी सलाह उम्र बढ़ने के साथ होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में मददगार हो सकते हैं।

इस फादर्स डे पर आप अपने पिता को हेल्थ चेकअप के लिए जरूर ले जाएं। इसके अलावा नियमित रूप से कुछ लक्षणों पर ध्यान देते रहें ताकि किसी भी समस्या को समय रहते पहचानकर उसका उपचार किया जा सके।
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दिल की समस्याओं का खतरा - फोटो : Freepik.com
सीने में दर्द या चलते समय सांस तो नहीं फूलता?

60 वर्ष के बाद सीने में जकड़न, दबाव, दर्द या थोड़ी मेहनत में सांस फूलना हृदय संबंधी समस्या का संकेत हो सकता है। 
 
  • कई लोगों में दिल की बीमारियों का दर्द केवल सीने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि कंधे, बांह, गर्दन, जबड़े या पीठ तक फैल सकता है।
  • हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, धूम्रपान, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और मोटापा इन जोखिमों को बढ़ाते हैं। 
  • यदि ये लक्षण बार-बार हों या अचानक शुरू हों, तो तुरंत अपने पिता को डॉक्टर के पास ले जाएं।

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प्रोस्टेट का खतरा - फोटो : Adobe stock
बार-बार पेशाब आने या पेशाब करने में कठिनाई की दिक्कत तो नहीं?

बढ़ती उम्र के पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि का बढ़ना आम है। इसके कारण रात में कई बार पेशाब आना, पेशाब करने में कठिनाई या मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने का एहसास हो सकता है।
 
  • ये लक्षण हमेशा कैंसर का संकेत नहीं होते, लेकिन इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
  • 60 की उम्र के बाद पुरुषों में प्रोस्टेट की समस्या का खतरा काफी बढ़ जाता है।
  • समय पर पहचान से उपचार से बड़े खतरे को टाला जा सकता है।
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अल्जाइमर रोग के लक्षण - फोटो : Adobe Stock
अचानक भूलने की आदत या व्यवहार में बदलाव तो नहीं?

कभी-कभार चीजें भूल जाना सामान्य हो सकता है, लेकिन यदि आपके पित बार-बार रास्ता भूलने लगे हैं, परिचित लोगों को पहचानने में कठिनाई हो, रोजमर्रा के काम में परेशानी आ रही हो तो यह संज्ञानात्मक समस्या का संकेत हो सकता है।
 
  • याददाश्त में गिरावट कई कारणों से हो सकती है, जिनमें विटामिन की कमी, थायरॉयड विकार या न्यूरोडीजेनेरेटिव रोग शामिल हैं। 
  • शुरुआती जांच से कारणों की पहचान और इलाज हो सकता है।
  • भूलने की समस्या और व्यवहार में बदलाव अल्जाइमर रोग का लक्षण भी हो सकता है, जो 60 की उम्र के बाद काफी आम है।
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ब्रेन स्ट्रोक के संकेतों को पहचानिए - फोटो : Freepik.com
शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी या बोलने में दिक्कत तो नहीं?

चेहरे का एक तरफ झुक जाना, एक हाथ या पैर में अचानक कमजोरी और सुन्नपन, बोलने में कठिनाई होना स्ट्रोक का संकेत हो सकता है। 
 
  • स्ट्रोक एक पातस्थिति है जिसमें हर मिनट महत्वपूर्ण होता है।
  • अगर आपके पिता को भी इनमें से कोई दिक्कत है तो तुरंत अस्पताल पहुंचएं। 
  • जितनी जल्दी उपचार शुरू होता है, स्थायी विकलांगता और मृत्यु का जोखिम उतना कम हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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