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सावधान: ज्यादा परफ्यूम लगाने से हो सकती है कैंसर जैसी गंभीर बीमारी

Thu, 01 Apr 2021 12:18 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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perfumes
गर्मियों में होने वाले पसीने और शरीर से आने वाली बदबू से बचने के लिए हम सभी तरह-तरह के ब्रॉड के परफ्यूम इस्तेमाल करते हैं। समय के साथ महिलाओं और पुरुषों के लिए बाजार में अलग-अलग परफ्यूम भी बिकने लगे हैं। इसके एक-दो स्प्रे से न सिर्फ शरीर से आने वाली बदबू चली जाती है साथ ही आपको दूसरों से मिलते वक्त शरीर की दुर्गंध के कारण शर्मिंदा नहीं होना पड़ता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि बाजार में बिकने वाले डियो और परफ्यूम आपकी सेहत के लिए कितने नुकसानदायक हो सकते है? जानकारों का मानें तो इन परफ्यूम में कई ऐसे रसायन मिले होते हैं जो आपको कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का शिकार बना सकते हैं। आइए जानते हैं कि आखिर खुशबू देने वाले ये परफ्यूम हमारे लिए इतने खतरनाक क्यों होते हैं?
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deo - फोटो : deo
क्यों हैं इतने नुकसानदायक
विशेषज्ञों का कहना है कि परफ्यूम को बनाने और इसकी खुशबू को लंबे समय तक बरकरार रखने के लिए कंपनियां कई तरह के ऐसे रसायनों को प्रयोग में लाती हैं जिनके संपर्क में आने तक से हमें स्वास्थ्य संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा हो सकता है। इन परफ्यूमों और डियो में कई तरह के ऐसे सिंथेटिकों को भी मिलाया जाता है जो त्वचा को बहुत नुकसान पहुंचा सकती हैं। अब सोचिए जिस परफ्यूम को आप दिन में दो से चार बार प्रयोग में ला रहे हैं उससे आपको कितना नुकसान हो रहा है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
परफ्यूम में इस्तेमाल किए जाने वाले रसायनों से हार्मोनल असंतुलन और स्किन एलर्जी होना सामान्य है। त्वचा से इन रसायनों के संपर्क होते ही आपको भी जलन महसूस होती होगी। कुछ रसायन इतने खतरनाक होते हैं जिनके कारण आपको त्वचा पर चकत्ते, बांझपन और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं।

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आत्मनिर्भर बनेगा भारत का रसायन क्षेत्र - फोटो : pixabay
किन रसायनों का होता है सबसे ज्यादा प्रयोग
जानकारों की मानें तो परफ्यूमों में फ्थेलेट्स, मस्क कीटोन और फॉर्मलडिहाइड जैसे रसायनों को प्रयोग में लाया जाता है। फ्थेलेट्स के उपयोग को कई देशों ने बैन कर रखा है। इससे ध्यान लगाने में परेशानी, मस्तिष्क के विकास संबंधी दिक्कतों के साथ तंत्रिका तंत्र से संबंधित बीमारियां होने का डर रहता है। इसके अलावा मस्क कीटोन ऊतकों और ब्रेस्ट मिल्क में आसानी से घुल जाता है जिससे नवजात को कई प्रकार की बीमारियां होने का खतरा रहता है।
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परफ्यूम
ब्रेस्ट कैंसर प्रीवेंशन पार्टनर्स (बीसीपीपी) के पॉलीसी डायरेक्टर जेनेट न्यूडेलमैन ने एक रिपोर्ट में दावा किया था कि इस  तरह के उत्पादों में कम से कम 4000 तरह के रसायनों का प्रयोग किया जाता है लेकिन आप इन्हें परफ्यूम के बॉटल पर अंकित नहीं पाएंगे। कंपनियां लोगों से इन्हें छिपाकर रखती हैं।
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deo - फोटो : getty images
इससे पहले साल 2018 की में बीपीसीसी ने एक अध्ययन के दौरान सुगंध देने वाले ऐसे ही 140 उत्पादों का परीक्षण किया था। इस दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि इन उत्पादों का तीन-चौथाई हिस्सा विषाक्त रसायनों से युक्त होता है। इन सभी रसायनों को क्रोनिक स्वास्थ्य स्थितियों और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का कारक पाया गया।
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cosmetic
महिलाओं को सबसे ज्यादा खतरा
जेनेट न्यूडेलमैन के मुताबिक वैसे तो सभी लोगों को इस तरह के उत्पादों से होने वाली समस्याओं को लेकर अवगत कराया जाता है, लेकिन देखने को मिलता है कि महिलाओं को इन उत्पादों के साइड इफेक्ट्स ज्यादा झेलने पड़ते हैं। इसका मुख्य कराण उनको तरह तरह के सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल करना होता है। औसत अमेरिकी महिला एक दिन में 12-16 उत्पादों का उपयोग करती है, जिनमें से कई में हानिकारक रसायनों का प्रयोग होता है।
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