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कोरोना से मुकाबला: ये तीन रास्ते हो सकते हैं संकट का समाधान, समझिए क्या है अंतर?

Sun, 16 May 2021 06:20 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना से जंग कैसे जीती जाए - फोटो : Pixabay
देश कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से जूझ रहा है। पिछले दिनों संक्रमण के आंकड़ों में थोड़ी कमी जरूर देखी गई है, लेकिन अभी स्थिति को बेहतर नहीं माना जा रहा है। कोविड के गंभीर संक्रमण वाले रोगियों को अस्पताल में भर्ती होने की आवश्यकता होती है, वहीं 80 फीसदी से अधिक रोगी डॉक्टरों से टेली-परामर्श के माध्यम से घर पर ही ठीक हो सकते हैं।
पिछले दिनों संक्रमण से मुकाबले को लेकर हर्ड इम्युनिटी बनाने की बात की जा रही थी। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि देश में कोरोना के मौजूदा हालात को देखते हुए इराडिक्शन और इलीमिनेशन के बारे में सोचना ऊंचे पहाड़ चढ़ने जैसा है, हां हर्ड इम्युनिटी के बारे में जरूर सोचा जा सकता है। इसके लिए भी सही दिशा में तेज रफ्तार से काम करना जरूरी है।
आइए जानते हैं कि कोरोना संकट समाधान के लिए विशेषज्ञ जिन तीन तरीकों का जिक्र कर रहे हैं, वह क्या हैं?
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देेश में तेजी से बढ़ रहे हैं मामले - फोटो : PTI
इराडिक्शन
इराडिक्शन को संक्रामक रोगों के संदर्भ में यूनिकॉर्न के रूप में देखा जाता है। दुनिया को इस संबंध में सिर्फ दो संक्रामक रोगों- रिंडरपेस्ट और स्मालपॉक्स में कामयाबी मिली है। कोविड के संदर्भ में विशेषज्ञ इराडिक्शन को फिलहाल असंभव सा मानते हैं।
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ज्यादा से ज्यादा जांच की जरूरत - फोटो : PTI
इलीमिनेशन
कोविड से संदर्भ में इलीमिनेशन की संभावना कुछ हद तक देखी जा सकती है। संक्रामक रोगों के संदर्भ में इलीमिनेशन तब माना जाता है जब संचरण को रोकने के निरंतर प्रयासों के कारण किसी विशिष्ट क्षेत्र मामले शून्य या शून्य के करीब हो जाते हैं। सरल भाषा में समझें तो किसी बीमारी को कुछ देशों या हिस्सों में बिल्कुल समाप्त कर देने की स्थिति को इलीमिनेशन माना जाता है। भारत के संदर्भ में पोलियो और नवजात टेटनस जैसे रोगों को इलीमिनेटेड माना जाता है।

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भारत में हर्ड इम्यूनिटी कब तक - फोटो : Social media
क्या है हर्ड इम्यूनिटी
कोरोना के मामलों को लेकर देश में हर्ड इम्यूनिटी विकसित करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है। जब किसी देश की बड़ी आबादी वायरस से संक्रमित हो जाए या फिर ज्यादातर लोगों का उस वायरस के खिलाफ टीकाकरण हो जाए तो शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। इस तरह से उस स्थान पर संक्रमण की रफ्तार कम हो जाती है और आसपास के हिस्सों में भी महामारी कमजोर होने लगती है।
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कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण तेज करके पाए जा सकती है हर्ड इम्यूनिटी - फोटो : PTI
भारत में कब तक हो सकती है हर्ड इम्यूनिटी
जिस तरह से देश में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं ऐसे में लोगों के मन में सवाल आ रहा है कि क्या देश के कुछ हिस्सों में हर्ड इम्यूनिटी बन गई है? इस बारे में हाल ही में एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने बताया कि दिल्ली में कोरोना की रफ्तार को देखते हुए सभी को लगने लगा थी यहां हर्ड इम्युनिटी वाली स्टेज आ गई है। सीरो सर्वे में भी देखा गया कि 50 से 60 प्रतिशत लोगों के अंदर एंटीबॉडी थी। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर में आंकड़े बदल गए हैं, वायरस के म्यूटेशन ने हर्ड इम्युनिटी के सपने को फिलहाल थोड़ा दूर कर दिया है। 
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