प्रतीकात्मक तस्वीर
कितनी कामयाब है ये दवा?
अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान के प्रमुख डॉ। एंथनी फाउची ने कहा है कि ट्रायल के आंकड़े बताते हैं कि ये दवा कोविड 19 से जूझ रहे मरीजों के ठीक होने में प्रभावी साबित हो रही है। उन्होंने कहा है कि दवा वायरस को ब्लॉक कर सकती है और ये बता रही थी कि हमारे पास अब वह रास्ता होगा कि हम मरीजों का इलाज कर सकते हैं।
हालांकि, इस दवा का कोविड 19 से होने वाली मौतों पर कोई स्पष्ट प्रभाव नहीं पड़ा है। वो लोग जिन्हें ये दवा दी गई, उनमें मृत्यु दर 8 फीसदी थी। वहीं, जिन्हें प्लेसीबो दिया गया, उनमें 11.6 फीसदी थी। लेकिन ये नतीजे सांख्यिकीय आधार से अहम नहीं हैं। इसका मतलब ये हुआ कि वैज्ञानिक ये बताने में सक्षम नहीं हैं कि मृत्यु दर में जो अंतर है, उसका आकलन सही भी है या नहीं।