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Ebola Update: इबोला प्रकोप में अब तक 400 से ज्यादा मौतें, डब्ल्यूएचओ ने जांच के लिए इस खास टेस्ट को दी मंजूरी

Fri, 03 Jul 2026 05:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुंडीबुग्यो वायरस स्ट्रेन की पहचान करने वाले दुनिया के पहले मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट को अपनी इमरजेंसी यूज लिस्ट में शामिल कर लिया है।
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इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
अफ्रीकी देशों के लिए इबोला संक्रमण गंभीर चिंता का कारण बना हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कांगो में इबोला से अब तक 400 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और यह अभी भी फैल रहा है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक हेल्थ (आईएनएसपी) की गुरुवार को जारी ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 15 मई को बीमारी फैलने की घोषणा के बाद से संक्रमण की पुष्टि वाले 1,406 लोगों में से 438 लोगों की मौत हो चुकी है, यानी मृत्यु दर 31 प्रतिशत से थोड़ी ज्यादा है।  

इस बीमारी के फैलने का मुख्य केंद्र उत्तर-पूर्वी इतुरी प्रांत था, यहां पर 83 प्रतिशत से ज्यादा मौतें हुई हैं। इस प्रांत की सीमा दक्षिण सूडान और युगांडा से लगती है, जहां 20 मामले सामने आए हैं और दो लोगों की मौत हुई है। यह वायरस आस-पास के प्रांतों में भी फैल गया है।

24 जून को प्रकाशित रिपोर्ट में हमने फ्रांस में इबोला के पहले मामले की जानकारी साझा की थी। मौजूदा प्रकोप इबोला वायरस के ‘बुंडीबुग्यो’ स्ट्रेन के कारण फैला है। इस स्ट्रेन के खिलाफ फिलहाल कोई स्वीकृत वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। ये फिलहाल इस प्रकोप को लेकर सबसे बड़ी चिंता की बात है।
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इबोला की जांच - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि लैब टेस्ट में एक 24 वर्षीय गर्भवती महिला के शरीर में इबोला संक्रमण की पुष्टि हुई है। महिला के शव को चुपके से मोटरसाइकिल के जरिए इतुरी के निया हेल्थ जोन से किसंगानी ले जाया गया था। चूंकि मौत के बाद भी इबोला का संक्रमण तेजी से फैलता है, इसलिए मध्य अफ्रीका में इस बीमारी के फैलने में शवों को असुरक्षित तरीके से संभालने की बड़ी भूमिका रही है।

डब्ल्यूएचओ ने मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट को दी मंजूरी

इस बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने बुंडीबुग्यो स्ट्रेन की पहचान करने वाले दुनिया के पहले मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक टेस्ट को अपनी इमरजेंसी यूज लिस्ट में शामिल कर लिया है। इससे वायरस के आनुवंशिक स्थिति यानी उसके जेनेटिक मैटेरियल/RNA को पहचानकर संक्रमण की पुष्टि करने में मदद मिल सकती है।

यह टेस्ट मरीज के खून की जांच करके वायरस के आनुवंशिक पदार्थ की पहचान करता है। इससे जल्दी और सटीक तरीके से पता लगाया जा सकता है कि व्यक्ति इस वायरस से संक्रमित है या नहीं?
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इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

डब्ल्यूएचओ में हेल्थ सिस्टम, एक्सेस और डेटा मामलों की असिस्टेंट डायरेक्टर-जनरल डॉ. युकिको नकातानी कहती हैं, पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी के समय न सिर्फ तेजी की जरूरत होती है, बल्कि इस बात का भरोसा भी जरूरी है कि इस्तेमाल किए जा रहे हेल्थ प्रोडक्ट्स क्वालिटी, सेफ्टी और परफॉर्मेंस के स्टैंडर्ड्स पर खरे उतरते हों।

तेजी से फैलने वाली बीमारी के दौरान, क्वालिटी-एश्योर्ड डायग्नोस्टिक टेस्ट्स तक समय पर पहुंच बीमारी को फैलने से रोकने में बहुत बड़ा फर्क ला सकती है। इस 'इमरजेंसी यूज लिस्टिंग' के जरिए, डब्ल्यूएचओ देशों को भरोसेमंद डायग्नोस्टिक टूल्स तेजी से उपलब्ध कराने में मदद कर रहा है ताकि वे ज्यादा असरदार तरीके से इसका सामना कर सकें।



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स्रोत: 
WHO adds first diagnostic test for Ebola Bundibugyo virus to its Emergency Use Listing


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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