इबोला और इसके खतरे
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2. इबोला के शिकार मरीजों को शुरुआत में तेज बुखार, सिरदर्द, गले में दर्द, मांसपेशियों में कमजोरी और अत्यधिक थकान महसूस हो सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार शुरुआती पहचान बेहद जरूरी होती है, क्योंकि संक्रमण बढ़ने पर स्थिति तेजी से गंभीर हो सकती है।
3. इबोला वायरस जानवरों, मुख्य रूप से चमगादड़ों को संक्रमित करता है लेकिन अगर आप इनके सीधे संपर्क में आते हैं, तो इंसानों में भी संक्रमण का जोखिम रहता है। संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, उल्टी, पेशाब जैसे तरल पदार्थों के संपर्क से भी ये दूसरों में फैल सकता है।
4. इबोला के हवा के माध्यम से फैलने का खतरा नहीं होता है। ये मुख्यरूप से संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क से फैलता है। पूरी तरह ठीक होने के बाद, आपका इम्यून सिस्टम ऐसी एंटीबॉडीज बनाता है जो आपको लगभग 10 साल तक इबोला से सुरक्षित रखने में मददगार हो सकती है।
5. संक्रमण बढ़ने पर इबोला के लक्षण बेहद गंभीर हो सकते हैं। मरीज को लगातार उल्टी, दस्त, पेट दर्द और शरीर में पानी की कमी हो सकती है। गंभीर स्थिति में रक्तस्राव शुरू हो सकता है और इससे किडनी-लिवर को भी खतरा रहता है।