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Ebola Outbreak: इबोला के मामले 1000 पार, हजारों संदिग्ध अब भी लापता; विशेषज्ञों ने बताई सबसे बड़ी चुनौतियां

Mon, 22 Jun 2026 02:16 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अफ्रीकी देशों में फैला इबोला का प्रकोप स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। वैज्ञानिक और स्वास्थ्य अधिकारी पहले संक्रमित व्यक्ति की पहचान भी नहीं कर पाए हैं। इसके अलावा पिछले सप्ताह तक ऐसे 35,000 से ज्यादा लोगों का पता लगाना बाकी था, जो संक्रमित मरीजों के संपर्क में आए थे।
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इबोला का आतंक - फोटो : Amarujala.com/AI
वैश्विक स्तर पर इबोला के मामले इन दिनों स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। कांगो और यूगांडा से शुरू हुआ ये प्रकोप कई अन्य देशों के लिए भी समस्याएं बढ़ाता देखा जा रहा है। जारी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं को देखते हुए भारत में भी इबोला के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। यहां विदेश से आने वाले यात्रियों की एयरपोर्ट पर ही जांच की जा रही है। संभावित लक्षण वाले मरीजों के लिए आइसोलेशन की व्यवस्था की गई है।

हाल ही में अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने जानकारी दी थी कि दक्षिण सूडान से लौटी एक महिला को केरल के कोट्टायम मेडिकल कॉलेज के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था। देश में इससे पहले भी इबोला के संदिग्ध मामलों की खबरें आती रही हैं।

इबोला वायरस का  प्रकोप तेजी से फैल रहा है और हालात इतने गंभीर हो चुके हैं कि हजार से ज्यादा मामलों की पुष्टि हो चुकी है, सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी हजारों ऐसे लोग हो सकते हैं जिनकी पहचान बाकी है। 
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कांगो और युगांडा में इबोला का प्रकोप - फोटो : ANI
250 से अधिक लोगों की हो चुकी है मौत

अधिकारियों ने रविवार देर रात एक बयान में कहा कि पूर्वी कांगो में इबोला के मामलों की संख्या 1,003 तक पहुंच गई है, जिनमें 254 मौतें शामिल हैं। मरीजों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

 
  • कांगो के स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 15 मई को इबोला फैलने की घोषणा के बाद से, मुख्य रूप से इतूरी प्रांत में फैले इस संक्रमण से कुल 100 लोग ठीक हो चुके हैं। मंत्रालय के अनुसार, कम से कम 365 मरीज अस्पतालों में या आइसोलेशन में हैं।
  • मंत्रालय ने कहा कि स्थानीय अधिकारियों के लिए 'कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग' (संक्रमित लोगों के संपर्क में आए लोगों का पता लगाना) एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। वे अब तक केवल 55% लोगों तक ही पहुंच पाए हैं।
  • अभी तक इस प्रकोप के 'पेशेंट जीरो' (सबसे पहले संक्रमित व्यक्ति) की पहचान नहीं हो पाई हैं। 
  • साथ ही, अभी भी उन 35,000 से ज्यादा लोगों का पता लगाना है जो पिछले हफ्ते तक संक्रमित लोगों के संपर्क में आए थे।
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इबोला अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI
विशेषज्ञों के लिए ये है सबसे बड़ी चुनौती

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि संक्रमितों का सही आंकड़ा पता न चल पाने का बड़ा कारण ये है कि पूर्वी कांगो विद्रोही गुटों की हिंसा से जूझ रहा है। 
 
  • इतूरी में, इस्लामिक स्टेट समर्थित 'एलाइड डेमोक्रेटिक फ़ोर्स' के हमलों के कारण कई गांवों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है और लोगों को अपने घर छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा है।
  • प्रकोप शुरू हुए एक महीने से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन अधिकारियों का मानना है कि बचाव और नियंत्रण के प्रयासों की तुलना में संक्रमण की रफ्तार कहीं ज्यादा है। किसी को भी इसके वास्तविक दायरे का अंदाजा नहीं है।
  • 'अफ्रीका सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन' के डायरेक्टर-जनरल डॉ. जीन कासेया ने पिछले हफ्ते एक इंटरव्यू में बताया था कि, अगर आप किसी प्रकोप, खासकर इबोला के प्रकोप को नियंत्रित करना चाहते हैं, तो आपको 'इंडेक्स केस' (सबसे पहला मामला) के बारे में पता होना चाहिए। हमें पक्का नहीं पता कि यह प्रकोप कब शुरू हुआ था।
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इबोला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
डब्ल्यूएचओ भी चिंतित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस पहले ही कह चुके हैं कि इबोला विशेषज्ञों की सोच से भी तेज गति से फैल रहा है। कांगों में हालात ऐसे हैं कि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और बीमारी को फैलने से रोकना बहुत मुश्किल हो गया है। स्वास्थ्य अधिक के पास वायरस के बुन्डिबुग्यो  स्ट्रेन से होने वाली बीमारी को सीमित करने के लिए  कोई वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। यह स्ट्रेन दुर्लभ है और 2007 में इसकी खोज के बाद से इसके कारण केवल चार बार प्रकोप फैला है।
 
  • इसी बीच, अमेरिका ने केन्या में संभावित संक्रमित लोगों को कुछ समय तक अलग रखकर निगरानी करने की व्यवस्था का नया प्लान घोषित किया है।
  • जो अमेरिकी नागरिक उन इलाकों से लौटेंगे जहां इबोला फैल रहा है, उन्हें अब केन्या भेजकर विशेष रूप से प्रशिक्षित पब्लिक हेल्थ सर्विस और रक्षा विभाग के अधिकारियों की निगरानी में रखा जाएगा।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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