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Diabetes Risk: इंसुलिन रेजिस्टेंस के शुरुआती संकेत क्या हैं और कब बढ़ जाता है डायबिटीज का खतरा?

Mon, 24 Aug 2026 06:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंसुलिन रेजिस्टेंस अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के विकसित होता है। पेट के आसपास ज्यादा चर्बी, मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, परिवार में डायबिटीज और कुछ मेटाबोलिक स्थितियां जोखिम बढ़ाती हैं। प्री-डायबिटीज की पहचान HbA1c, फास्टिंग ग्लूकोज या ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट से होती है। समय पर जांच और जीवनशैली में सुधार डायबिटीज के जोखिम को घटा सकते हैं।
 
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इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
डायबिटीज या ब्लड शुगर का अक्सर बढ़ा रहना कई तरह से मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती है। ऐसे मरीजों में समय के साथ लिवर-किडनी और आंखों से लेकर तंत्रिकाओं तक का खतरा हो सकता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अपने शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।

डायबिटीज की शुरुआत हमेशा बहुत ज्यादा प्यास, बार-बार पेशाब आने या रिपोर्ट में शुगर के बढ़े रहने से ही नहीं होती है। इससे शरीर इंसुलिन रेजिस्टेंस विकसित हो चुका होता है। डायबिटीज वालों के लिए सबसे बड़ा खतरा भी इसे ही माना जाता है। इसमें आप सामान्य महसूस कर सकते हैं, जबकि शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति पहले जैसी संवेदनशील नहीं रह जातीं।

इंसुलिन शरीर के लिए जरूरी हार्मोन है जो खून में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में कोशिकाएं इंसुलिन के संदेश का ठीक से जवाब नहीं देतीं। शरीर इसकी भरपाई के लिए ज्यादा इंसुलिन बनाने की लगता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस पर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इससे गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम हो सकता है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
इंसुलिन रेजिस्टेंस और इसके खतरे

इंसुलिन का काम खून से ग्लूकोज को मांसपेशियों, फैट और लिवर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करना है। जब ये कोशिकाओं में इंसुलिन के प्रति संवेदनशीलता कम हो जाती हैं, तो शरीर को ग्लूकोज को नियंत्रित रखने के लिए ज्यादा इंसुलिन की जरूरत पड़ सकती है।
 
  • शुरुआती दौर में अग्न्याशय ज्यादा इंसुलिन बनाकर इस समस्या की भरपाई कर सकता है। 
  • हालांकि समय के साथ यदि शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता, तो ब्लड ग्लूकोज बढ़ने लगता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर में डायबिटीज और इंसुलिन बढ़ने के लक्षणों की अगर समय रहते पहचान हो जाए और इसका इलाज शुरू हो जाए तो खतरे को काफी कम किया जा सकता है।
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मोटापा बढ़ा रहा डायबिटीज का खतरा - फोटो : ANI
इसकी पहचान कैसे करें?

इंसुलिन रेजिस्टेंस की शुरुआत में आमतौर पर कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता, फिर भी कुछ बदलाव खतरे का संकेत हो सकते हैं। 
 
  • पेट के आसपास चर्बी बढ़ना, कमर का आकार बढ़ना, वजन बढ़ना और शारीरिक गतिविधि का लगातार कम होना महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं।
  • कुछ लोगों में गर्दन या त्वचा की सिलवटों पर गहरे और मोटे पैच दिखाई दे सकते हैं। इसे एकैंथोसिस नाइग्रिकन्स कहा जाता है और यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा हो सकता है

कुछ लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस और प्री-डायबिटीज की आशंका दूसरों की तुलना में ज्यादा होती है। 35 वर्ष या उससे अधिक उम्र में जोखिम बढ़ता है। इसके अलावा यदि परिवार में पहले से टाइप-2 डायबिटीज की हिस्ट्री रही है, शारीरिक गतिविधि कम है तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
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डायबिटीज की समय पर कराएं जांच - फोटो : Freepik.com
समय पर जांच से टाल सकते हैं खतरा

डॉक्टर कहते हैं, यदि आपका वजन ज्यादा है, कमर के आसपास चर्बी बढ़ रही है, परिवार में डायबिटीज की हिस्ट्री रही है या शारीरिक गतिविधि कम है तो डॉक्टर से मिलकर ब्लड शुगर और HbA1c की जांच जरूर करा लें।

प्री-डायबिटीज की पहचान होने का मतलब यह नहीं कि डायबिटीज निश्चित रूप से होगी। वजन कंट्रोल करने, नियमित शारीरिक गतिविधि, आहार और नींद में सुधार जैसे बदलाव इंसुलिन रेजिस्टेंस और प्री-डायबिटीज के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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