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जानिए क्या है डिस्लेक्सिया? क्यों होती है बच्चों में ये बीमारी और क्या हैं इस रोग के लक्षण

Mon, 04 Mar 2019 05:25 PM IST
मोना नारंग लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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आपने फिल्म ‘तारे जमीन पर’ कई बार देखी होगी। इस फिल्म में मुख्य किरदार ईशान डिस्लेक्सिया बीमारी से पीड़ित होता है, जिसकी पहचान उसके घरवाले नहीं कर पाते। फिल्म में ईशान के प्रति उसके पेरेंट्स का रविया देख आपको बहुत गुस्सा आया होगा, लेकिन इसके लिए आप पूरी तरह उसके माता पिता को दोष नहीं दे सकते। इस बीमारी की पहचान कर पाना किसी के लिए आसान नहीं है।
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सालों से साइकॉलजिस्ट, स्पेशल एजुकेटर्स और कॉग्निटिव साइंटिस्ट इस बीमारी पर रिसर्च कर रहे हैं जिससे इसे समधा जाए और इसे निजात पा सकें। यह बीमारी एक लर्निंग डिसऑर्डर है, जिससे 3-7 फीसदी बच्चों ग्रसित होते हैं। इन बच्चों को पढ़ने और किसी शब्द की सही स्पेलिंग बोलने में दिक्कत आती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि डिस्लेक्सिया से प्रभावित दिमाग को किसी भी इन्फॉर्मेशन को प्रोसेस करने में कठिनाई होती है।
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क्या आप जानते हैं दुनिया के सबसे दिमागदार लोगों में से कुछ लोग डिस्लेक्सिया से ग्रसित थे। वॉल्ट डिजनी, लियोनार्डो द विंसी, पिकासो, एल्बर्ट आइंस्टीन कुछ ऐसे हैं, जिन्हें डिस्लेक्सिया था। बच्चों का स्पेलिंग गलत बोलना और पढ़ने में मुश्किल होना डिस्लेक्सिया के लक्षण हैं। इन बच्चों को अक्षरों को मैच करने या उन्हें बोलने में कन्फ्यूजन रहता है।

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डिस्लेक्सिया से प्रभावित बच्चे हावभाव और ऑब्जर्वेशन के जरिए अच्छे तरीके से समझ पाते हैं। इन बच्चों में एक जैसे लक्षण नहीं होते हैं। कई बार ऐसे बच्चों की आंखें कमजोर होती हैं। हालांकि आंखों की जांच से इस बीमारी के बारे में कुछ भी पता नहीं लग सकता है।
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डिस्लेक्सिया से जूझ रहे बच्चों की क्लासरूम तक ही नहीं घर पर भी कई तरीके से मदद की जा सकती है। सबसे पहले आपको इस बात का खास ख्याल रखना होगा कि यह डिसऑर्डर एडवांस स्टेज पर ना पहुंचा हो। अगर स्टार्टिंग स्टेज में ही इस डिसऑर्डर का पता लगा लिया जाए तो यह बच्चे के लिए अच्छा होगा।
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यह बात रिसर्च में भी सामने आ चुकी है कि बच्चों के लिए मैनुस्क्रिप्ट लेसन पढ़ने में मदद करता है। जितनी जल्दी बच्चा पढ़ना लिखा सीखता है उतना ही उसके ब्रेन के लिए अच्छा होता है।  डिस्लेक्सिया प्रभावित बच्चे चीजों को काफी बार रिपीट करते हैं। ऐसे में उनके पेरेंट्स और टीचर्स को  धैर्य रखना चाहिए। वह अपने दिमाग में यह बात हमेशा रखें कि यह एक धीमी प्रक्रिया है। शुरुआत से ही परिणाम की उम्मीद न रखें। इस पूरी प्रक्रिया के दौराम हिम्मत न हारें।
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लक्षण
-समझने या सोचने में कठिनाई
-किसी बात को याद रखने में कठिनाई
-वर्तनी शब्द परेशानी
-देरी तर्क
-वाक्य बाधा
-सिरदर्द
-सीखने की विकलांगता
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