लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का जोखिम बढ़ा दिया है। डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं अब काफी आम हो गई हैं। कैंसर के मामले भी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि कैंसर के कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है।
साल 2022 के आंकड़ों के अनुसार दुनियाभर में कैंसर से लगभग 9.7 मिलियन (97 लाख) मौतें हुईं। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि साल 2050 तक यह आंकड़ा बढ़कर 18.2 मिलियन (1.82 करोड़) होने का अनुमान है।
अध्ययनों से पता चलता है कि कैंसर से होने वाली लगभग एक-तिहाई मौतें तंबाकू-शराब के सेवन, हाई बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण होती हैं। 2022 में फेफड़े, ब्रेस्ट और कोलोरेक्टल कैंसर के कारण सबसे ज्यादा मौतें हुईं।
एक-दो दशकों पहले की तुलना में मेडिकल साइंस में हुई प्रगति और आधुनिक उपचार विधियों ने कैंसर के इलाज को काफी आसान बना दिया है। इसी क्रम में दवा बनाने वाली कंपनी ल्यूपिन को इलाज के लिए असदार मानी जानी वाली दवा के लिए मंजूरी मिल गई है। इससे कैंसर के इलाज की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।