Breast Cancer Kyu Hota Hai: जब भी किसी महिला के ब्रेस्ट में दर्द होता है तो उन्हें लगता है कि ये ब्रेस्ट कैंसर की वजह से है, पर इस बात में कितनी सच्चाई है, आइए जानते हैं।
Breast Cancer Kyu Hota Hai: ब्रेस्ट में दर्द होते ही क्या आपके मन में भी यह सवाल आता है कि कहीं यह ब्रेस्ट कैंसर का संकेत तो नहीं? ब्रेस्ट में दर्द कब सामान्य माना जाता है और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए? साथ ही, अगर दर्द के साथ ब्रेस्ट में गांठ, निप्पल से डिस्चार्ज या त्वचा में बदलाव नजर आए तो क्या करना चाहिए? इन सभी सवालों को लेकर महिलाओं के मन में अक्सर चिंता बनी रहती है।
इस लेख में आपके ऐसे ही सवालों के जवाब हम देंगे। यहां जानेंगे कि ब्रेस्ट में दर्द होने के आम कारण क्या हैं, इसका ब्रेस्ट कैंसर से कितना संबंध है और किन संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इसलिए अगर आपको भी ब्रेस्ट में दर्द या इससे जुड़े किसी बदलाव की चिंता है, तो पूरी जानकारी जरूर पढ़ें।
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क्या ब्रेस्ट में दर्द हमेशा कैंसर का संकेत है?
नहीं, ब्रेस्ट में दर्द होना हमेशा ब्रेस्ट कैंसर का संकेत नहीं होता। तो अगर आपके ब्रेस्ट में हल्का दर्द है, तो इसपर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।
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ब्रेस्ट में दर्द होने के आम कारण
ब्रेस्ट पेन यानी मास्टाल्जिया कई वजहों से हो सकता है। सबसे आम कारणों में हार्मोनल बदलाव शामिल हैं। पीरियड्स से पहले दोनों ब्रेस्ट में भारीपन, खिंचाव या दर्द महसूस होना सामान्य हो सकता है। यह दर्द पीरियड शुरू होने के बाद कम भी हो सकता है।
इसके अलावा प्रेग्नेंसी, स्तनपान, मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलाव, कुछ दवाएं, ब्रेस्ट या छाती पर चोट और कुछ गैर-कैंसर वाली ब्रेस्ट स्थितियां भी दर्द का कारण बन सकती हैं। कभी-कभी गर्दन, कंधे या पीठ की मांसपेशियों की समस्या का दर्द भी ब्रेस्ट में महसूस हो सकता है।
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क्या ब्रेस्ट दर्द और कैंसर का सीधा संबंध है?
नहीं, केवल ब्रेस्ट दर्द को देखकर कैंसर का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के अनुसार, ब्रेस्ट कैंसर में आमतौर पर दर्द शुरुआती लक्षण नहीं होता। कई मामलों में शुरुआती ब्रेस्ट कैंसर में कोई स्पष्ट लक्षण भी नहीं दिखाई देता। इसलिए ब्रेस्ट में दर्द होने पर घबराने के बजाय यह देखना जरूरी है कि इसके साथ कोई दूसरा असामान्य बदलाव तो नहीं है।
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ब्रेस्ट कैंसर के किन लक्षणों पर ध्यान दें?
ब्रेस्ट में इन बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
ब्रेस्ट या बगल में नई गांठ या सूजन
ब्रेस्ट के आकार या शेप में नया बदलाव
निप्पल का अंदर की ओर मुड़ना या उसके आकार में बदलाव
निप्पल से ऐसा डिस्चार्ज होना जो स्तनपान से संबंधित न हो, खासकर अगर उसमें खून हो
ब्रेस्ट की त्वचा पर गड्ढे या सिकुड़न दिखाई देना
त्वचा का लाल, सूजा हुआ या असामान्य रूप से मोटा होना
बगल में गांठ या सूजन महसूस होना।
इनमें से कोई बदलाव कैंसर होने की पुष्टि नहीं करता, क्योंकि कई गैर-कैंसर वाली स्थितियां भी ऐसे लक्षण पैदा कर सकती हैं। लेकिन जांच कराना जरूरी है।
अगर दर्द पीरियड्स के आसपास होता है और फिर अपने आप ठीक हो जाता है, तो यह हार्मोनल बदलाव से जुड़ा हो सकता है। लेकिन दर्द लगातार बना रहे, बढ़ता जाए या रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित करने लगे तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
अगर दर्द के साथ गांठ, निप्पल डिस्चार्ज, त्वचा में बदलाव या ब्रेस्ट के आकार में परिवर्तन नजर आए, तो जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर शारीरिक जांच के बाद उम्र, लक्षण और मेडिकल हिस्ट्री के आधार पर इमेजिंग या अन्य टेस्ट की सलाह दे सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।