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डॉक्टर से जानें दिल्ली की प्रदूषित हवा किस स्तर तक बन रही है आपके लिए खतरनाक

Sat, 09 Nov 2019 01:11 PM IST
अपराजिता शुक्ला लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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pollution in delhi ncr - फोटो : एएनआई
डाॅ (मेजर) राजेश भारद्वाज, ईएनटी स्पेशलिस्ट 
दिल्ली एनसीआर में प्रदूषण लगातार बढ़ा है ऐसे में आप वर्कआउट या सैर करना भूल जाइए। वायु प्रदूषण सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन चुका है। हर साल अक्टूबर से मार्च के दौरान हवा की गिरती गुणवत्ता लोगों के लिए घातक बन जाती है। यह खासतौर पर दीवाली के बाद दिल्ली एनसीआर के निवासियों के लिए चिंता का बड़ा विषय बन चुका है। 

 
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pollution - फोटो : अमर उजाला
वाहनों से निकला धुंआ, पराली जलाना और निर्माण कार्यों से निकलने वाली धूल इसके मुख्य कारण हैं। सर्दियों के मौसम में ठंडी हवा नीचे की ओर बहती है, जिससे पार्टीकुलेट मैटर और धूल सांस के साथ हमारे शरीर में जाने लगती है। हमें नीचे गैसें- (CO2, CO, SO2 and NO2) प्रदूषकों के बारे में जागरूक होना चाहिए। 

 
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दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : पीटीआई
पार्टीकुलेट मैटर 
सरकारी एजेन्सियां हवा में पार्टीकुलेट मैटर को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार के उपाय अपनाती हैं। यह पार्टीकुलेट मैटर रसायनों, ईंधन, खेती के दौरान पराली जलाने, सड़क निर्माण एवं अन्य निर्माण गतिविधियों से उत्पन्न होता है। लम्बी दौड़ में यह सांस और दिल की बीमारियों, आंखों, नाक और गले में जलन, सिरदर्द, मतली और फेफड़ों एवं दिल की गंभीर बीमारियों का कारण बन सकता है।

 

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pollution in delhi ncr - फोटो : ani
विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक दुनिया में हर नौ में से एक मौत का कारण वायु प्रदूषण है, इस तरह कुल सात मिलियन समयपूर्व मौतें प्रदूषण के कारण होती हैं। जिनमें 600,000 बच्चे भी शामिल हैं। 

 
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फेफड़े - फोटो : अमर उजाला
2.5 माइक्रोन साइज़ के पार्टीकुलेट मैटर सबसे ज़्यादा खतरनाक हैं, जो सिर्फ इलेक्ट्राॅन माइक्रोस्कोप से ही देखे जा सकते हैं और ये फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचाते हैं। मनुष्य के शरीर का प्राकृतिक फिल्टर इन कणों को शरीर के भीतर जाने से नहीं रोक सकता। वहीं दूसरी ओर बड़े आकार के पार्टीकुलेट मैटर लम्बी अवधि में मनुष्य के लिए घातक साबित होते हैं। 

 
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ओज़ोन- यह शरीर के लिए अच्छी है या बुरी?
ओज़ोन ऑक्सीजन के तीन परमाणुओं से बनी गैस है जो धरती के ऊपरी वातावरण में तथा भूस्तर पर पाई जाती है। इसका अच्छा या बुरा होना इस बात पर निर्भर करता है, कि यह कहां मौजूद है। 

 
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धुंध में दिल्ली-एनसीआर - फोटो : अमर उजाला
हवा के उपरी स्तर में (5 से 11 मील उपर) पाई जाने वाली ओज़ोन सनस्क्रीन की भूमिका निभाती है, यह हमें सूरज की हानिकर पराबैंगनी किरणों से सुरक्षित रखती है। लेकिन अगर यह प्रदूषक के रूप में भूस्तर पर मौजूद है (जैसे कारों से निकले वाली ओज़ोन) तो यह सूरज की रोशनी के साथ क्रिया करती है। स्माॅग का मुख्य अवयव ओज़ोन ही होता है जो सांस के साथ फेफड़ों में जाकर अस्थमा अटैक का कारण बन सकता है। 

 

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इस सीज़न अपने स्वास्थ्य की देखभाल कैसे करें?
सुबह के समय घर के भीतर ही रहें, क्योंकि इस समय हवा की गुणवत्ता सबसे खतरनाक स्तर पर होती है। जब हवा की गुणवत्ता का स्तर बुरा हो, उस समय बाहर न जाएं। आज कल स्वास्थ्य विभाग प्रदूषण और हवा की गुणवत्ता के बारे में नियमित अडवाइज़री जारी कर रहा है। 

 
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प्रदूषण रोधी मास्क - फोटो : pixabay
फेस मास्क पहनें, यह 90-95 पार्टीकुलेट मैटर को सांस के साथ भीतर जाने से रोकता और इसे धोकर दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है। 
घर की खिड़कियां बंद रखें, कार में आते-जाते समय भी खिड़कियां बंद रखें।  अगर हो सके तो एयर प्योरीफायर लगाएं, क्योंकि स्वच्छ हवा से शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता बढ़ती है। स्कूली बच्चों और बुजु़र्गों को सर्दियों में विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि वे सबसे ज़्यादा संवेदनशील होते हैं। मैं यात्रा के दौरान फेस मास्क पहनने की सलाह दूंगा।
मिथक  
यह खतरनाक मिथक है कि बुरी हवा के संपर्क में रहने से शरीर की प्रतिरक्षा की क्षमता बढ़ती है। यह पूरी तरह से गलत है, बुरी हवा शरीर के लिए खतरनाक है। 
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