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Mobile Effects: मोबाइल इस्तेमाल करने वाले हर किसी को जान लेनी चाहिए ये जरूरी बात, रिसर्च में हुआ बड़ा खुलासा

Fri, 17 Jul 2026 03:35 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रिपोर्टों में मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियोफ्रीक्वेंसी तरंगों के प्रभाव का गहन विश्लेषण किया गया है। अब तक उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यह नहीं बताते कि सामान्य तरीके से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करने से ब्रेन कैंसर होने का स्पष्ट और ठोस सबूत मिल चुका है।
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मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं आप? - फोटो : Amarujala.com/AI
मोबाइल फोन हम सभी की जिंदगी का सबसे जरूरी हिस्सा बन चुका है। सुबह आंख खुलने से लेकर रात को सोने तक शायद ही कोई ऐसा पल होता हो, जब फोन हमारे हाथ से दूर रहता हो। लेकिन जितनी तेजी से मोबाइल का इस्तेमाल बढ़ा है, उसे लेकर कई रिपोर्ट्स लगातार चिंता जताती रही हैं। मोबाइल के इस्तेमाल से निकलने वाली ब्लू लाइट को नींद, ब्रेन हेल्थ के लिए नुकसानदायक बताया जाता रहा है। 

मोबाइल के इस्तेमाल को लेकर लोगों के मन में एक बड़ा सवाल ये भी रहा है कि क्या घंटों मोबाइल पर बात करना या लंबे समय तक फोन का इस्तेमाल करना ब्रेन ट्यूमर या कैंसर के खतरे को भी बढ़ा देता है?

सोशल मीडिया पर वायरल इससे संबंधित कई पोस्ट में दावा किया जाता रहा है कि मोबाइल से निकलने वाला रेडिएशन दिमाग को नुकसान पहुंचा सकता है। लंबे समय में इससे ब्रेन ट्यूमर होने का भी खतरा रहता है, क्या वास्तव में ऐसा है?

इसको लेकर वैज्ञानिकों की एक टीम ने जरूरी जानकारी साझा की है, जो हर किसी को जरूर जाननी चाहिए।


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मोबाइल का इस्तेमाल - फोटो : Adobe Stock
मोबाइल का इस्तेमाल क्या वास्तव में खतरनाक

मोबाइल कई तरह की तरंगे निकालता है। हमारे चारों ओर भी विद्युत-चुंबकीय तरंगें मौजूद होती हैं। इन्हीं की मदद से हमें रेडियो पर गाने सुनने, वाई-फाई चलाने, जीपीएस (सैटेलाइट नेविगेशन) से रास्ता ढूंढने और मोबाइल फोन से बात करने की सुविधा देती हैं। ये तरंगें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन का ही एक हिस्सा हैं।

रेडिएशन शब्द सुनकर अक्सर लोग डर जाते हैं, लेकिन हर तरह का रेडिएशन खतरनाक नहीं होता। मोबाइल फोन से निकलने वाली तरंगें इस स्पेक्ट्रम के सबसे कम ऊर्जा वाले हिस्से में आती हैं। यानी इनमें ऊर्जा बहुत कम होती है।  

चूंकि कई अध्ययनों में पाया गया है कि एक्स-रे जैसी हाई एनर्जी वाली किरणें कैंसर का खतरा बढ़ा सकती हैं, इसलिए लोगों यह चिंता बनी हुई है कि कहीं मोबाइल फोन से निकलने वाली रेडियो तरंगें भी इंसानों के लिए नुकसानदायक तो नहीं हैं?
 
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मोबाइल फोन का ब्रेन पर असर - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या सामने आया?

वैज्ञानिकों की अलग-अलग टीमों ने पहले से प्रकाशित हजारों अध्ययनों का विश्लेषण किया। 
 
  • ब्रेन कैंसर वाली समीक्षा के लिए साल 1994 से 2022 के बीच प्रकाशित 63 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया।
  • इसमें पाया गया कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल और ब्रेन कैंसर, सिर के कैंसर या गर्दन के कैंसर का कोई लिंक नहीं है।
  • इतना ही नहीं, इससे कोई फर्क भी नहीं पड़ा कि कोई व्यक्ति मोबाइल का कितना ज्यादा या कितने वर्षों से इस्तेमाल कर रहा था।
  • वैज्ञानिकों ने यह भी पाया गया कि रेडियो और टेलीविजन ट्रांसमिशन से निकलने वाली तरंगों से भी कैंसर का खतरा नहीं रहता है।
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मोबाइल फोन का इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

वैज्ञानिकों ने कहा, अगर मोबाइल फोन वास्तव में ब्रेन कैंसर का खतरा बढ़ाते, तो जैसे-जैसे मोबाइल फोन का इस्तेमाल बढ़ा, वैसे-वैसे ब्रेन कैंसर के मामलों में भी साफ बढ़ोतरी दिखाई देती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

उदाहरण के तौर पर ऑस्ट्रेलिया में 1980 के दशक से अब तक सभी प्रकार के ब्रेन कैंसर की दर लगभग स्थिर बनी हुई है, जबकि मोबाइल फोन का व्यापक इस्तेमाल तो इसके कई साल बाद शुरू हुआ।

वैज्ञानिकों ने यह भी साफ कहा कि विज्ञान कभी यह 100 प्रतिशत साबित नहीं कर सकता कि किसी चीज से बिल्कुल भी जोखिम नहीं है। लेकिन फिलहाल उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण यही बताते हैं कि मोबाइल फोन के इस्तेमाल से कैंसर का खतरा नहीं है। मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल कई दूसरी तरह की दिक्कतें बढ़ाता हुआ देखा गया है, जिसको लेकर अलर्ट रहना चाहिए। विशेषतौर पर बच्चों में मोबाइल फोन के इस्तेमाल को कम करना बहुत जरूरी है। 



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स्रोत:
No evidence mobile phones cause brain cancer – new study

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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