उम्र बढ़ने के साथ किसी का नाम याद न आना, सामान रखकर भूल जाना या किसी तारीख को याद करने में ज्यादा समय लगना आम बात है। 60 की उम्र होते-होते शरीर में कई तरह के बदलाव होने लगते हैं, दिमागी क्षमता भी उनमें से एक है। यही वजह है कि परिवार के लोग अक्सर बुजुर्गों की हर भूल को उम्र का असर मानकर नजरअंदाज कर देते हैं।
पर क्या आप जानते हैं कि हर भूल सामान्य नहीं होती? 60 की उम्र के बाद अल्जाइर रोग और डिमेंशिया के मामले भी बढ़ जाते हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है।
डिमेंशिया में याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता इतनी प्रभावित हो जाती है कि इसका रोजमर्रा के कामों पर भी असर पड़ने लगता है। बार-बार एक ही सवाल पूछना, परिचित जगहों पर रास्ता भूल जाना, बिल या पैसों का हिसाब संभालने में परेशानी होना, बातचीत करने में दिक्कत होना ऐसे संकेत हैं जिन्हें गंभीरता से लेना चाहिए।
लेकिन याददाश्त में कमी का मतलब हमेशा डिमेंशिया भी नहीं होता। इसके कई और भी कारण हो सकते हैं, जिनकी पहचान जरूरी है।