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हेल्थ अलर्ट: 46 हजार से ज्यादा मामले और 133 मौतें, पड़ोसी देश में डेंगू के भयानक प्रकोप से मचा हाहाकार

Thu, 10 Sep 2026 08:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बरसात और नमी के साथ डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छरों का खतरा बढ़ता देखा जा रहा है। ज्यादातर मरीज वैसे तो जल्दी ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में डेंगू गंभीर हो सकता है। बुखार कम होने के बाद पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, रक्तस्राव, सांस तेज चलना या अत्यधिक कमजोरी जैसे संकेत दिखें तो तुरंत डॉक्टरी सहायता जरूरी है।
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डेंगू का खतरनाक प्रकोप - फोटो : Amarujala.com/AI
बरसात और इसके बाद का मौसम स्वास्थ्य के लिए कई तरह की चुनौतियां लेकर आता है। भारी बारिश के कारण जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल माहौल बना देता है। इसी वजह से मानसून के दौरान डेंगू जैसे मच्छर जनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है।

भारत में अगस्त-अक्तूबर के महीने को सबसे चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस दौरान बारिश और नमी का माहौल डेंगू-मलेरिया को लेकर सबसे ज्यादा चिंताओं वाला रहता है। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इस साल डेंगू के 10,000 से अधिक मामले रिकॉर्ड किए गए हैं। दिल्ली-एनसीआर में अगस्त के आखिरी हफ्ते तक 311 से ज्यादा लोगों को डेंगू का शिकार पाया गया।

इन दिनों पड़ोसी देश बांग्लादेश डेंगू की गंभीर चपेट में है। यहां 46 हजार से ज्यादा लोग डेंगू के शिकार पाए गए हैं। इतना ही नहीं इस साल अब तक करीब 133 लोगों की डेंगू से मौत भी हो चुकी है। 

आइए बांग्लादेश में डेंगू से बिगड़ते हालात के बारे में जान लेते हैं।
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बांग्लादेश में डेंगू से बिगड़ते हालात - फोटो : Adobe stock
बांग्लादेश में बिगड़ते हालात

रिपोर्ट्स के मुताबिक मंगलवार (7 सितंबर) को डेंगू के 1,463 नए मामले सामने आए और कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है।
 
  • पिछले साल देश में डेंगू से 413 लोगों की मौत हुई थी और 1.02 लाख से अधिक लोग इससे संक्रमित हुए थे।
  • इसके अलावा 2024 में डेंगू से 575 लोगों की मौत हुई थी और 1,01 लाख लोग संक्रमित हुए थे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सितंबर में मामलों में हुई भारी बढ़ोतरी से अस्पतालों पर दबाव बढ़ गया है और इस बात का डर है कि आने वाले हफ्तों में मच्छरों से फैलने वाली यह बीमारी और गंभीर हो सकती है।

डेंगू की बीमारी से बुखार, तेज सिरदर्द और जानलेवा जटिलताएं हो सकती हैं। पहले से ही बांग्लादेश खसरे (मीजल्स) के प्रकोप से जूझ रहा है, खसरे से इस साल लगभग 1,000 बच्चों की मौत हो चुकी है। ऐसे में डेंगू का प्रकोप स्थिति को और बिगाड़ने वाला हो सकता है।
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डेंगू का खतरा - फोटो : Freepik.com
कैसे गंभीर रूप ले लेता है डेंगू

गौरतलब है कि डेंगू संक्रमित एडीज एजिप्टी मच्छर के काटने से फैलने वाला वायरल संक्रमण है। ज्यादातर लोगों में यह हल्के लक्षणों के साथ ठीक हो जाता है, लेकिन कुछ मामलों में यह गंभीर रोग में बदल सकता है। इसमें शरीर के अंदर गंभीर रक्तस्राव, ब्लड प्रेशर बहुत लो से सदमे की स्थिति और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर जैसी समस्याएं हो सकती हैं। गंभीर स्थिति जानलेवा भी हो सकती है।
 
  • डेंगू की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि गंभीर स्थिति के संकेत कई बार उस समय दिखाई देते हैं जब बुखार कम होने लगता है।
  • इसलिए बुखार उतरने को हमेशा ठीक होने का संकेत नहीं माना जा सकता।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, बीमारी के करीब तीसरे से सातवें दिन के बीच गंभीर डेंगू का खतरा बढ़ सकता है।

ऐसे में केवल डेंगू से बचाव ही नहीं, बल्कि इसके शुरुआती लक्षणों, गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत और सही समय पर अस्पताल पहुंचने की जानकारी भी जरूरी है। 

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डेंगू बुखार और इससे होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
बुखार उतरने के बाद भी रहें सावधान

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि डेंगू में सबसे जरूरी बात यह है कि बुखार कम होने का मतलब हमेशा बीमारी भी खत्म होना नहीं है। 
 
  • डेंगू की गंभीर स्थिति अक्सर बुखार कम होने के आसपास या उसके बाद दिखाई दे सकती है। 
  • इसमें रोगियों को पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी होने, मसूड़ों-नाक से खून आने, सांस तेज चलने, बहुत ज्यादा कमजोरी या बेचैनी जैसी दिक्कतें होती है।
  • गंभीर स्थितियों में अक्सर लो ब्लड प्रेशर और प्लेटलेट काउंट भी कम होने लगता है, जिसमें समय रहते सुधार न होने पर जान जाने का भी जोखिम हो सकता है।
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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
कुछ सावधानियां बहुत जरूरी

डॉक्टर बताते हैं, डेंगू का वायरस खत्म करने वाली कोई विशेष दवा अभी तक उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसके इलाज में सहायक उपचार ही दिया जाता है। इसके अलावा रोगियों को पर्याप्त आराम करने, खूब तरल पदार्थ लेने की सलाह दी जाती है। बुखार और दर्द के लिए डॉक्टर पैरासिटामोल और लक्षणों को कम करने के लिए कुछ और जरूरी दवाएं दे सकते हैं। 
 
  • डेंगू में कभी भी खुद से कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं।
  • डेंगू की आशंका होने पर बिना देर किए डॉक्टर से जांच और सलाह लें, गंभीर संकेतों का इंतजार करने में समय गंवाना भारी पड़ सकता है।
  • घर में किसी को डेंगू हो तो उसे मच्छरों से बचाना भी जरूरी है, क्योंकि संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद वही मच्छर वायरस को दूसरे लोगों तक पहुंचा सकता है। 




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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