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Deadly eye infections: जानलेवा हो सकती है आंखों में संक्रमण की समस्या, ऐसे लक्षणों के दिखते ही तुरंत हो जाएं सावधान

Thu, 24 Feb 2022 08:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आंखों में संक्रमण की समस्याएं - फोटो : iStock
Medically reviewed by-
डॉ पूजा अंगादी
(वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ)
दिल्ली



आंखें शरीर के उन नाजुक अंगों में से एक हैं जिन्हें विशेष सुरक्षा और देखभाल की आवश्यकता होती है, पर क्या इस अति संवेदनशील अंग की सेहत को लेकर वास्तव में हम सभी अलर्ट हैं? यह सवाल इसलिए लाजमी है क्योंकि आंखों में होने वाली सामान्य परेशानियों को हम सभी बहुत हल्के में लेते रहते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारी इस तरह की लापरवाही गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। विशेषतौर पर आंखों में होने वाले संक्रमण को नजरअंदाज करना, या फिर खुद से ही इसके लिए दवाइयां लेना जानलेवा हो सकता है। आपको भी निश्चित ही आंखों की परेशानियों का जानलेवा एंगल सुनकर अचरज हो रहा होगा, पर वास्तविकता ऐसी ही है।

अध्ययनों से पता चलता है कि गर्मियों में आंखों में संक्रमण होना काफी आम बात है, पर कुछ तरह के संक्रमण जानलेवा भी हो सकते हैं। यही कारण है कि सभी लोगों को आंखों की सेहत को लेकर विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता है। आंखों में होने वाली किसी भी तरह की समस्या को लेकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए, इसमें होने वाली लापरवाही आपके लिए बड़ी मुसीबतों का कारण बन सकती है। आइए आगे की स्लाइडों में जानते हैं कि आंखों में होने वाले किस तरह के संक्रमण की समस्या को जानलेवा माना जाता है?
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ब्लैक फंगस की गंभीर समस्या (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
म्यूकोरमाइकोसिस
कोरोना के इस दौर में म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस संक्रमण) के मामले काफी चर्चा में रहे। यह एक फंगल इंफेक्शन है, जो  ग्लोमेरोमाइकोटा फ़ाइलम से संबंधित सूक्ष्मजीवों के कारण होता है। यह फंगस हमारे वातावरण में हमेशा मौजूद रहता है, हालांकि इससे मुकाबले के लिए शरीर में प्राकृतिक प्रतिरक्षा होती है। कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों, विशेषकर डायबिटीज रोगी या अधिक स्टेरॉयड दवाओं का सेवन करने वालों में इस संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। यह संक्रमण नाक से होते हुए रक्त वाहिकाओं पर आक्रमण करता है और साइनस से होते हुए मस्तिष्क तक पहुंच सकता है। संक्रमितों को एक तरफ के चेहरे में सूजन, नाक, आंख के पास काले धब्बे दिख सकते हैं, ऐसे लक्षणों में तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है। इलाज के अभाव में रोगी की जान जा सकती है।
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आंखों की समस्या को पहचानें - फोटो : iStock
एस्परगिलोसिस 
ब्लैक फंगस की ही तरह एस्परगिलोसिस भी बेहद घातक आंखों के संक्रमण में से एक है।  एस्परगिलस फंगस के कारण यह संक्रमण होता है। हम में से ज्यादातर लोगों के शरीर में सांस के माध्यम से यह फंगस पहुंचता है, पर इससे कोई क्षति नहीं होती। मोल्ड स्पोर्स में सांस लेने या कटे या खुले घाव के माध्यम से भी यह शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। अस्थमा या सिस्टिक फाइब्रोसिस वाले व्यक्तियों में इसका खतरा अधिक होता है। एस्परगिलस ओकुलर इन्फेक्शन से प्रभावित मरीजों को दर्द, जलन, हाइपरमिया और धुंधली दृष्टि की समस्या हो सकती है। समय से इलाज न मिलने के कारण यह जानलेवा भी हो सकता है।

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आंखों में संक्रमण के गंभीर लक्षण - फोटो : Pixabay
ऑर्बिटल सेल्युलाइटिस
ऑर्बिटल सेल्युलाइटिस, आंख के आसपास की चर्बी और मांसपेशियों में होने वाला संक्रमण है। यह पलकों, भौहों और गालों को प्रभावित करता है। यह अचानक शुरू हो सकता है या किसी संक्रमण का परिणाम भी हो सकता है। संक्रमितों को आंख में या उसके आसपास दर्द और सूजन, आंख को इधर-उधर करने में दर्द और दोहरी दृष्टि जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इलाज की कमी के कारण इससे संक्रमित 5-25 फीसदी लोगों की मौत हो जाती है।
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आंखों की परेशानियों को न करें अनदेखा - फोटो : Pixabay
क्या है विशेषज्ञ की सलाह?
अमर उजाला से बातचीत में डॉ पूजा अंगादी (वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ, शार्प साईट आई हॉस्पिटल्स) बताती हैं, आंखों की सेहत के लेकर की जाने वाली लापरवाही गंभीर समस्याओं यहां तक कि कुछ संक्रमण मौत का भी कारण बन सकते हैं। किसी भी तरह की परेशानी में खुद से दवाइयां या आई ड्रॉप्स लेने से बचें, इससे रोग बढ़ सकता है। आंखों में लालिमा, खुजली या लगातार बने रहने वाले दर्द के सही कारणों का निदान और उसके आधार पर इलाज आवश्यक होता है। आंखों की सेहत को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही न बरतें। 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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