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Study: कैंसर-हृदय रोगों से बचे रहने के लिए ऑक्सफोर्ड के वैज्ञानिकों ने बताया सबसे आसान तरीका, वो भी एकदम फ्री

Tue, 27 May 2025 07:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ आदतें, पर्यावरणीय और आनुवांशिक कारक कैंसर के खतरे को बढ़ा रहे हैं। विशेषज्ञों ने एक अध्ययन की रिपोर्ट में बताया है आप दिनचर्या में एक आदत को शामिल करके 'फ्री' में इस समस्या से बचे रह सकते हैं।
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हृदय रोग-कैंसर से कैसे बचें? - फोटो : Adobe stock
कैंसर वैश्विक स्तर पर बढ़ती एक गंभीर और जानलेवा बीमारी है जिसके मामले बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ आदतें, पर्यावरणीय और आनुवांशिक कारक कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। चूंकि इसका जोखिम किसी को भी हो सकता है, इसलिए सभी लोगों को कैंसर से बचे रहने के उपाय बचपन से ही करते रहने चाहिए।

आप कैंसर से कैसे बच सकते हैं, इसके बारे में ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में बड़ा दावा किया है।

विशेषज्ञों ने एक अध्ययन की रिपोर्ट में बताया है कि नियमित रूप से हल्की-फुल्की गतिविधियां जैसे कि सामान्य रूप से वॉक करना, रनिंग या यहां तक कि घर के काम-काज भी खुद से करना भी कैंसर होने के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकता है।
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वॉक करने के फायदे - फोटो : adobe stock images
कैंसर से बचाव कैसे करें?

ऑक्सफोर्ड सेंटर फॉर अर्ली कैंसर डिटेक्शन द्वारा किए गए शोध में पाया गया कि प्रतिदिन वॉक करने की आदत भी आपको कैंसर-हृदय रोग सहित कई अन्य बीमारियों से सुरक्षित रखने में मददगार हो सकती है। विशेषज्ञों ने बताया कि जो लोग प्रतिदिन 7,000 कदम चलते हैं, उनमें 5,000 से कम कदम चलने वालों की तुलना में कैंसर का जोखिम 11% कम होता है। 9,000 कदम चलने वालों में जोखिम 16% कम हो जाता है।

इसका मतलब है कि आप जीवनशैली में इस एक आदत को शामिल करके न सिर्फ सेहत में विशेष सुधार कर सकते हैं, साथ ही ये जानलेवा बीमारियों से बचाने में भी मददगार है। इस अध्ययन की रिपोर्ट बीएमजे जर्नल में प्रकाशित की गई है।
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कैंसर का खतरा और बचाव - फोटो : Adobe stock photos
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अध्ययन के वरिष्ठ लेखक और प्रोफेसर एडेन डोहर्टी ने कहा, "हमारा शोध सभी तरह की गतिविधियों के महत्व को उजागर करता है। चाहे वह रोजाना वॉक करने को बढ़ाना हो या मध्यम से लेकर जोरदार व्यायाम करना हो, शारीरिक गतिविधि का कोई भी स्तर कैंसर के जोखिम को कम करने में योगदान देता है।

दिनभर शारीरिक रूप से सक्रिय रहना, चाहे अधिक पैदल चलना हो या घर के काम निपटाना हो, कैंसर के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभाव डाल सकता है।

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धूप में समय - फोटो : Freepik.com
वॉक करना कैसे लाभकारी?

अब सवाल ये है कि वॉक करने की आदत कैंसर के जोखिमों को कैसे कम करती है? इस बारे में विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप रोजाना 7-10 हजार कदम चलने की आदत बना लेते हैं तो यह हार्मोन को विनियमित करने, प्रतिरक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने, शरीर में सूजन को कम करने और पाचन स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करता है। इसके अतिरिक्त, पैदल चलने से वजन को स्वस्थ बना रहता है जो कई कैंसर के जोखिम को कम करने में एक महत्वपूर्ण कारक है। 

अगर कम उम्र से ही खूब चलने की आदत बना ली जाए तो ये आपको कई प्रकार के कैंसर से बचाए रखने में मददगार हो सकता है। इससे पहले के अध्ययनों में 10 हजार कदम चलने को हृदय रोगों-डायबिटीज से बचाव के लिए काफी फायदेमंद बताया गया था।
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हृदय रोगों से कैसे बचें? - फोटो : Freepik.com
हृदय रोगों से भी होता है बचाव

इससे पहले जर्नल सर्कुलेशन में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया कि प्रतिदिन 10000 कदम चलने की आदत हृदय रोगों के जोखिमों को कम करने में मददगार हो सकती है।

संयुक्त राज्य अमेरिका सहित 42 अन्य देशों के 20,152 व्यक्तियों के स्वास्थ्य डेटा का उपयोग करके विश्लेषण में पाया गया है कि नियमित वॉक करने की आदत आपके लिए बहुत लाभकारी हो सकती है।  जो लोग प्रतिदिन 6,000 से 9,000 कदम चलते हैं, उनमें हृदय रोग जैसे दिल का दौरा या स्ट्रोक का जोखिम 40 से 50% तक कम होता है। 

वॉक करने और शारीरिक रूप से सक्रिय रहने की आदत वजन कंट्रोल में रखती है जिससे हृदय रोगों के अलावा उच्च रक्तचाप, मोटापा और टाइप-2 डायबिटीज से भी बचे रहने में भी मदद मिल सकती है।


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स्रोत और संदर्भ
Amount and intensity of daily total physical activity, step count and risk of incident cancer in the UK Biobank


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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