इस तेजी से भागती दुनिया में हम चाहते-न चाहते मोबाइल और कंप्यूटर जैसे गैजेट्स के 'गुलाम' हो गए हैं। ऑफिस का काम हो, ऑनलाइन क्लास हो या दोस्तों से बातचीत, हम दिनभर इनसे घिरे रहते हैं। धीरे-धीरे यह आदत इतनी बढ़ गई है कि सूरज की रोशनी, ताजी हवा और बाहर की दुनिया से हमारा संपर्क कम होता जा रहा है।
क्या आप जानते हैं कि इसका असर सिर्फ आंखों या नींद तक सीमित नहीं है? लगातार स्क्रीन की तरफ देखना, खासकर मोबाइल और लैपटॉप की नीली रोशनी (ब्लू लाइट) हमें समय से पहले बूढ़ा बना सकती है और उन बीमारियों का जोखिम भी बढ़ा सकती है तो अमूमन बुजुर्गों को होती रही हैं।
पहले के भी कई वैज्ञानिक शोध बताते रहे हैं कि लंबे समय तक इन उपकरणों का इस्तेमाल शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित कर सकता है, जिससे जल्दी थकान, त्वचा पर झुर्रियां, हार्मोनल असंतुलन का खतरा बढ़ता जा रहा है। इससे समय से पहले बुढ़ापा आने का खतरा भी बढ़ जाता है।
क्या आप भी अक्सर ब्लू लाइट के संपर्क में रहते हैं, ऑफिस में दिनभर लैंपटॉप कंप्यूटर के सामने बैठे रहते हैं और घर के बाहर कम समय बिता पा रहे हैं? अगर हां तो अभी भी समय है सावधान हो जाइए।