वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले आम लोगों से लेकर स्वास्थ्य संगठनों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर कोरोना के ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स का देखा जा रहा है। कोरोना के दूसरे वैरिएंट्स की तुलना में इसे अधिक संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है, इससे सभी आयुवर्ग के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।
इस बीच कुछ देशों में बच्चों में क्रुप रोग के मामले भी बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। बच्चों की इस गंभीर जानलेवा बीमारी के ज्यादातर लक्षण कोविड-19 से मिलते-जुलते होते हैं, ऐसे में इनमें अंतर कर पाना लोगों के लिए काफी कठिन हो रहा है।
हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित रह चुके छोटे बच्चों में क्रुप का खतरा अधिक हो सकता है। क्रुप की जटिलताएं काफी गंभीर हो सकती हैं, अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण मौत का जोखिम भी बढ़ जाता है। इस समय दुनियभार में ओमिक्रॉन और क्रुप दोनों के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, चूंकि इन दोनों के ज्यादातर लक्षण समान हो सकते हैं, ऐसे में सभी लोगों के लिए इनमें समय रहते अंतर करना आवश्यक हो जाता है। आइए जानते हैं कि ओमिक्रॉन और क्रुप की पहचान कैसे की जा सकती है, साथ ही यह स्थिति कितनी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है?