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विशेषज्ञों ने किया अलर्ट: बच्चों में तेजी से बढ़ती 'क्रुप' बीमारी में कोविड-19 जैसे ही होते हैं लक्षण, जानिए कैसे करें अंतर?

Tue, 24 May 2022 02:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों में बढ़ते क्रुप रोग के मामले - फोटो : iStock
वैश्विक स्तर पर कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले आम लोगों से लेकर स्वास्थ्य संगठनों के लिए गंभीर चिंता का कारण बने हुए हैं। इस समय सबसे ज्यादा असर कोरोना के ओमिक्रॉन और इसके सब-वैरिएंट्स का देखा जा रहा है। कोरोना के दूसरे वैरिएंट्स की तुलना में इसे अधिक संक्रामकता दर वाला बताया जा रहा है, इससे सभी आयुवर्ग के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है।

इस बीच कुछ देशों में बच्चों में क्रुप रोग के मामले भी बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। बच्चों की इस गंभीर जानलेवा बीमारी के ज्यादातर लक्षण कोविड-19 से मिलते-जुलते होते हैं, ऐसे में इनमें अंतर कर पाना लोगों के लिए काफी कठिन हो रहा है।

हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित रह चुके छोटे बच्चों में क्रुप का खतरा अधिक हो सकता है। क्रुप की जटिलताएं काफी गंभीर हो सकती हैं, अगर समय रहते इसपर ध्यान न दिया जाए तो इसके कारण मौत का जोखिम भी बढ़ जाता है। इस समय दुनियभार में ओमिक्रॉन और क्रुप दोनों के मामले रिपोर्ट किए जा रहे हैं, चूंकि इन दोनों के ज्यादातर लक्षण समान हो सकते हैं, ऐसे में सभी लोगों के लिए इनमें समय रहते अंतर करना आवश्यक हो जाता है। आइए जानते हैं कि ओमिक्रॉन और क्रुप की पहचान कैसे की जा सकती है, साथ ही यह स्थिति कितनी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है?
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क्रुप रोग के बारे में जानिए - फोटो : iStock
कोरोना ने बढ़ा दिया है क्रुप का खतरा

शोध से पता चलता है कि जिस रफ्तार से कोरोना संक्रमण बढ़ रहा है और इस बार बच्चे भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, संभवत: इसी वजह के क्रुप के मामले भी काफी बढ़ गए हैं। जर्नल पीडियाट्रिक्स में प्रकाशित एक अध्ययन में कोविड-19 के कारण आपातकालीन विभाग में भर्ती कुछ बच्चों पर अध्ययन किया गया।

शोधकर्ताओं ने नोट किया कि ओमिक्रॉन वैरिएंट से संक्रमित ज्यादातर बच्चों में लंबे समय के लिए क्रुप जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। इन दोनों ही रोगों में लक्षण समान ही देखे जाते हैं, ऐसे में लोगों के लिए इसका आसानी से निदान कर पाना थोड़ा कठिन हो सकता है।
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बच्चों में क्रुप रोग - फोटो : iStock
क्रुप के खतरे के बारे में जानिए

क्रुप मुख्यरूप से बच्चों के ऊपरी वायुमार्ग में होने वाली संक्रमण की समस्या है, जिसके कारण सांस लेने में तकलीफ और आवाज में भारीपन होने जैसी दिक्कत हो सकती है। इस संक्रमण में  वॉयस बॉक्स (स्वरयंत्र), विंडपाइप (श्वासनली) और ब्रोन्कियल ट्यूब में सूजन हो जाती है, जिसके कारण आवाज और सांस से संबंधित जटिलताओं का अनुभव हो सकता है।

क्रुप से संक्रमित बच्चों में तेज बुखार के साथ, कर्कश आवाज और सांस लेने में आवाज आने जैसी समस्या हो सकती है। यह सारे लक्षण कोरोना संक्रमण की स्थिति में भी देखे जा सकते हैं, ऐसे में इसको लेकर लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता होती है।

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कोरोना ने बढ़ा दिया है क्रुप का खतरा - फोटो : i stock
ओमिक्रॉन संक्रमित बच्चों के लक्षण

कोरोना के नए वैरिएंट्स से संक्रमित बच्चों में लक्षणों को लेकर किए गए अध्ययन में शोधकर्ताओं ने पाया कि ओमिक्रॉन जैसे वैरिेएंट बच्चों में रोग को बढ़ा सकते हैं। कोरोनावायरस संक्रमण के दौरान बच्चों में थकान और कमजोरी को सबसे सामान्य लक्षणों में से पाया गया है। इसके अलावा सिरदर्द, गले में खराश, नाक बहना, छींक आना भी संकेत के तौर पर देखा जा सकता है।

कोरोनावायरस संक्रमण भी चूंकि ऊपरी वायुमार्ग को प्रभावित करता है ऐसे में इसके कारण भी आवाज और सांस लेने में दिक्कतों का अनुभव हो सकता है।
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कोविड-19 और क्रुप रोग - फोटो : iStock
क्रुप और कोरोना में कैसे अंतर करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक बुखार, नाक बहना या गले में खराश और आवाज में बदलाव जैसे लक्षण क्रुप और कोरोना दोनों में देखे जा सकते हैं, हालांकि क्रुप संक्रमित बच्चों में 'बार्किंग कफ' की समस्या काफी अधिक देखी जाती है जबकि कोरोना संक्रमण में संक्रमितों में सामान्य खांसी या सूखी खांसी की दिक्कत होती है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि क्रुप मुख्यरूप से पतझड़ और सर्दियों के दौरान अधिक देखा जाता है जबकि कोविड-19 का संक्रमण कभी भी हो सकता है।
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बच्चों के विशेष देखभाल की जरूरत - फोटो : iStock
क्रुप हो जाए तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो क्रुप के ज्यादातर मामले प्रारंभिक उपचार के माध्यम से घर पर ही ठीक किए जा सकते हैं। इसमें संक्रमितों को आराम करने, खूब पानी पीने और डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई दवाइयों को प्रयोग में लाने की सलाह दी जाती है। हालांकि अगर सांस लेने में तकलीफ ठीक नहीं हो रही है तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। लक्षणों को नजरअंदाज करने से समस्या के बढ़ने का खतरा हो सकता है। 



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स्रोत और संदर्भ
COVID-19–Associated Croup in Children

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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