फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Crohn's Disease: बनी रहती है पेट में दर्द और ऐंठन, कहीं आपको क्रोहन डिजीज तो नहीं? जानिए क्या है ये बीमारी

Sun, 18 Jan 2026 02:59 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या आपको भी अक्सर पेट में दर्द, ऐंठन या सूजन की दिक्कत महसूस होती रहती है? सामान्य दवाओं और उपचार के माध्यम से भी इसमें आराम नहीं मिल पा रहा है? इस तरह की दिक्कतें हैं तो इसे हल्के में लेने की गलती न करें। कई बार ये आंतों से संबंधित गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती है।
विज्ञापन
1 of 5
पाचन स्वास्थ्य की समस्याएं और पेट में दर्द - फोटो : Freepik.com
दिनचर्या की गड़बड़ी और खान-पान ठीक न रहने के कारण कई तरह की बीमारियां कम उम्र में ही लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही हैं। पाचन से जुड़ी समस्याएं  इसका प्रमुख उदाहरण हैं।

पाचन ठीक रहने को स्वस्थ शरीर का आईना माना जाता है। डॉक्टरों के अनुसार, अगर पाचन तंत्र सही से काम नहीं करता तो इसका असर पूरे शरीर पर पड़ता है। अक्सर पेट में बनी रहने वाली समस्याओं और पाचन तंत्र के ठीक से काम न करने के कारण भोजन से मिलने वाले पोषक तत्व ठीक से अवशोषित नहीं हो पाते। 

बार-बार पेट खराब रहना, खाना खाने के बाद बेचैनी या जलन महसूस होना और सुबह पेट साफ न होना, ये सभी संकेत बताते हैं कि आपका पाचन तंत्र कमजोर हो रहा है। गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट्स की मानें तो लंबे समय तक बनी रहने वाली पेट की समस्याएं जैसे दर्द या ऐंठन की दिक्कत को हल्के में नहीं लेना चाहिए। कई बार ये पाचन विकारों से कहीं ज्यादा क्रोहन डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों का संकेत भी हो सकती हैं।
विज्ञापन

2 of 5
पेट की समस्या और क्रोहन डिजीज - फोटो : Freepik.com
क्रोहन डिजीज के बारे में जान लीजिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, क्रोहन डिजीज के मामले युवाओं में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। 
  • क्रोहन रोग एक प्रकार का क्रॉनिक इन्फ्लेमेटरी बाउल डिजीज (आईबीडी) है।
  • इस रोग के कारण पाचन तंत्र में कहीं भी सूजन पैदा हो सकती है। ये अक्सर छोटी आंत और बड़ी आंत को प्रभावित करती है।
  • कई बार सूजन की समस्या आंत की गहरी परतों तक फैल जाती है, जिसके कारण पाचन में गड़बड़ी और पेट दर्द की दिक्कत हो सकती है।
  • क्रोहन रोग के कारण पेट में अक्सर तेज दर्द तो रहता ही है साथ ही इसके कारण शरीर तेजी से कमजोर भी होने लग जाता है।
विज्ञापन

3 of 5
पेट में दर्द और ऐंठन बने रहने के क्या कारण हैं? - फोटो : adobe stock images
क्यों होती है ये बीमारी?

क्रोहन रोग होने का सही कारण अभी भी पता नहीं चल पाया है। हालांकि विशेषज्ञ डाइट और स्ट्रेस की समस्या को इसके लिए प्रमुख रूप से जिम्मेदार मानते हैं। अध्ययनों में कुछ अन्य स्थितियों को भी इस बीमारी के लिए जिम्मेदार बताया गया है।
  • 200 से ज्यादा जीन क्रोहन रोग से जुड़े हुए पाए गए हैं। इस तरह के एक या उससे अधिक जीन होने से किसी व्यक्ति को क्रोहन रोग होने की आशंका रहती है।
  • बैक्टीरिया, वायरस या अन्य पर्यावरणीय कारक भी क्रोहन रोग को ट्रिगर कर सकते हैं। 
  • जिन लोगों के माता-पिता या किसी करीबी को ये समस्या रही है उनमें भी क्रोहन रोग होने का खतरा बढ़ जाता है।
  • इसके अलावा धूम्रपान की आदत को क्रोहन रोग होने का सबसे महत्वपूर्ण कारण माना जाता है। 

4 of 5
पाचन को ठीक रखने के उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com
इस बीमारी से बचने के लिए क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आप क्रोहन डिजीज से पूरी तरह से बचाव नहीं कर सकते, लेकिन धूम्रपान छोड़ने, तनाव को मैनेज करने, नियमित व्यायाम आदि की मदद से इस बीमारी के खतरे को कम जरूर कर सकते हैं।  हाई-फाइबर और संतुलित आहार जैसे मेडिटेरेनियन डाइट अपनाकर भी इस रोग के जोखिमों को कम किया जा सकता है।
  • डॉक्टर रोजाना खूब मात्रा में पानी और तरल पदार्थों के सेवन की सलाह देते हैं। 
  • शराब और कैफीन वाले पेय आपकी आंतों के लिए दिक्कतें बढ़ाने वाले माने जाते हैं। इनसे दूरी बनाने की सलाह दी जाती है।
  • ज्यादा तनाव लेने वाले लोगों में क्रोहन रोग होने का खतरा अधिक होता है, इसलिए स्ट्रेस को कम करना भी बहुत जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
पेट की समस्याओं को न करें अनदेखा - फोटो : Adobe Stock
पेट दर्द और ऐंठन को न करें अनदेखा

डॉक्टर कहते हैं, अगर आपको अक्सर पेट दर्द और अपच की समस्या बनी रहती है, तो इसे अनदेखा न करें। क्रोहन रोग के अलावा ये गैस्ट्राइटिस, अल्सर, इरिटेबल बाउल सिंड्रोम या लिवर से जुड़ी दिक्कतों का भी संकेत हो सकती है। लगातार एसिडिटी रहने से भोजन की नली में सूजन आ सकती है, जो आगे चलकर गंभीर रूप ले सकती है।

यही कारण है कि समय रहते डॉक्टर से मिलकर इसका इलाज जरूर करा लें ताकि किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या से बचाव किया जा सके।



--------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें